Thursday, February 12, 2026
- Advertisement -

ठेकेदार ने दिल्ली और रुड़की रोड से समेटा टोल का बोरिया बिस्तर

  • किला रोड पर व्हिकल एंट्री के नाम से नया प्वाइंट बन कर की जाएगी वसूली

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अब तक अफसरों को अपनी पिच पर खिलाने वाले कैंट बोर्ड के सदस्य बैठक में शनिवार को अफसरों की पिच पर खेलने को मजबूर दिखे। इसका तनाव भी दिखाई दिया। बोर्ड बैठक में कैंट अफसरों के आगे सदस्यों की एक न चली। हालांकि उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी ने चर्चा के दौरान बोर्ड अध्यक्ष ब्रिगेडियर अर्जुन सिंह राठौर व सीईओ नवेन्द्र नाथ को दबाव में लेने को कोर्ट की तर्ज पर पे्रजेटेंशन भी दी। अध्यक्ष ने बोर्ड से मतभेद दूर करने की नसीहत दी। तो उपाध्यक्ष ने किसी मतभेद से इंकार किया।

एक-दूसरे के पाले में गेंद

एक-एक सदस्य से टोल पर राय ली जा रही थी। इस पर सदस्य बजाय खुलकर बोलने के एक-दूसरे के पाले में गेंद सरकाते नजर आए। बोर्ड बैठक और उसमें सदस्यों की मौजूदगी तो सिर्फ रस्म अदायगी भर थी। एक दिन पहले यानि शुक्रवार को सदस्यों ने जो कुछ किया उसके बाद शनिवार को हुई बोर्ड बैठक में जो कुछ भी हुआ उसमे हैरानी जैसी कोई बात नहीं थी। बल्कि उम्मीद तो इससे ज्यादा की जा रही थी।

02 8

उपाध्यक्ष मोर्चे पर

जहां तक अन्य सदस्यों की बात है तो सभी ने मानों ठान लिया था कि उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी को पीछे से मोरल स्पोर्ट देना है। शायद यही कारण रहा जो नए ठेके पर चर्चा को बुलाई गई बैठक में सदस्यों के होठ सीले रहे। कोई कुछ भी बोलने को तैयार नहीं था सिवाय उपाध्यक्ष के बोलने के। 3.25 लाख प्रतिदिन की दर से 10 प्वाइंटों पर टोल वसूली का ठेका शनिवार को कैंट बोर्ड की सहमति से छोड़ दिया गया है।

दिल्ली और रुडकी रोड टोल प्वाइंट कर लगा ब्रेक

नए ठेके में दिल्ली रोड व रुड़की रोड के वसूली प्वाइंट नहीं रखे गए हैं। दरअसल, इन दोनों प्वाइंटों को सिद्धांत रूप से हटाए जाने की बात सीईओ कैंट ने पहले ही मान ली थी। दरअसल, मेट्रो के काज के चलते इन दोनों टोल प्वाइंटों को हटना ही था। ये बात अलग है कि इसका श्रेय बोर्ड सदस्य लेने पर तुले थे, लेकिन अंदर की यदि बात की जाए तो बोर्ड सदस्य यदि इस मुद्दे को नहीं भी उठाते तो भी मेट्रो के कारण यह दोनों प्वाइंट बंद किए जाने पहले से तय हो गया था।

खुला-खुला लगा टोल वसूली प्वाइंट

ठेकेदार के कारिंदों ने दिल्ली रोड व रुड़की रोड प्वाइंट से शनिवार तड़क से ताम झाम समेटना शुरू कर दिया। रुड़की रोड पर जो अवरोध टोल प्वाइंटों पर वाहनों को रोकने के लिए लगाए गए थे उनको ठेकेदार के लोगों ने उखाड़ दिया। दोनों ही प्वाइंटों पर शनिवार को दिन में स्टॉफ भी बहुत कम कर दिया गया। करीब आधा ही स्टॉफ यहां नजर आ रहा था। हालांकि ये दोनों प्वाइंट बंद होने से उन लोगों ने राहत की सांस ली है। जो इनकी वजह से लगने वाले जाम में देर तक फंसे रहते थे। आए दिन यहां एक्सीडेंट हुआ करते थे। हकीकत तो यही है कि टोल प्वाइंट लोगों के लिए मुसीबत बने हुए थे। इनके बंद होने से लोगों ने राहत की सांस ली है।

बीना वाधवा को नसीहत

जनवाणी में खबर प्रकाशित होने के बाद बीना वाधवा ने माल रोड की हालात पर ध्यान दिलाने की कोशिश की तो बजाय बात सुनने के अध्यक्ष ने उन्हें नसीहत देते हुए कहा कि सदस्य पहले जो दिलों में गड्ढे बना लिए हैं उनको भर लेें। हालांकि बीना वाधवा को ऐसी नसीहत की उम्मीद नहीं की जा रही थी।

ये रहे बैठक में शामिल

कैंट बोर्ड की बैठक में ब्रिगेडियर अर्जुन सिंह राठौर, सीईओ नवेन्द्र नाथ, ओएस जयपाल तोमर, उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी, सदस्य रिनी जैन, बुशरा कमला, बीना वाधवा, नीरज राठौर, अनिल जैन, मंजू गोयल, धर्मेंद्र सोनकर के अलावा एडम कमांडर सालवेकर, एडीएम सिटी आदि भी मौजूद रहे।

03 7

कैंट बोर्ड के नाराज सदस्यों का खेमा चाहे तबादला

व्हिकल एंट्री फीस के नाम पर चलाए जा रहे टोल ठेके में किरकिरी से नाराज कैंट बोर्ड सदस्यों का खेमे ने सीईओ कैंट नवेन्द्र नाथ के खिलाफ लामबंदी शुरू कर दी है। जानकारों की मानें तो टोल ठेके को लेकर दो दिनी फजीहत से नाराज खेमे के सदस्य चाहते हैं कि सीईओ की यहां से विदाई करा दी जाए। हालांकि जानकारों की मानें तो सीईओ का प्रमोशन तो पहले से ही तय है।

वो यहां कोई लंबी पारी के इरादे से हैं भी नहीं, लेकिन फिलहाल की यदि बात की जाए तो उनको लेकर सदस्यों ने स्थानीय संगठन को बाइपास कर मोर्चा बंदी शुरू कर दी है। हालांकि यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि नवेन्द्र नाथ के तबादले में लगे बोर्ड सदस्यों को कितनी सफलता मिलेगी, लेकिन जो कुछ भी पर्दे के पीछे चल रहा है, उससे सभी अंजान हों ऐसा भी नहीं है।

मगर, किस में कितना है दम और खम यह आने वाले दिनों में ही तय हो पाएगा। साथ ही यह भी माना जा रहा है कि यदि नवेन्द्र नाथ अपनी पूरी पारी कैंट बोर्ड में खेलने के बाद भी नॉट आउट रहते हैं तो कुछ के विकेट गिरने भी तय हैं। या यूं कहें जो मनसूबे पाले बैठे हैं, उन पर पानी भी फिरना तय है।

दरअसल, जो कुछ भी दो दिन में घटा है और उससे पहले कैंट बोर्ड के कर्मचारियों का आंदोलन इस पूरे घटनाक्रम ने खाई को जितना चौड़ा कर दिया है बोर्ड के कुछ सदस्यों का मानना है कि उसकी भरपाई केवल तबादला कराकर ही की जा सकती है। यदि ऐसा वो नहीं करा सके तो खुद उन्हें इतना बड़ा नुकसान हो सकता है जिसकी भरपाई वो खुद नहीं कर सकेंगे।

टोल ने पैदा कर दी कैंट बोर्ड सदस्यों में खाई, नए समीकरण

टोल के ठेके ने कैंट बोर्ड के सदस्यों में जहां खाई पैदा कर दी हैं। वहीं, दूसरी ओर ठेकेदार ने भी सदस्यों से मिलाने के बजाय हाथ खडेÞ कर दिए हैं। वहीं, दूसरी ओर बोर्ड बैठक में जो कुछ भी हुआ उससे सबसे ज्यादा खुश कैंट बोर्ड के कर्मचारी नजर आए। बैठक के दौरान वार्ड तीन की सदस्य बीना वाधवा बेहद चौंकाने वाले अंदाज से उपाध्यक्ष विपिन सोढ़ी के समर्थन में दिखाई दीं। उन्होंने बोर्ड अध्यक्ष से टोल पर उपाध्यक्ष के सवालों पर गंभीरता दिखाने को कहा। बीना वाधवा के रूख को बोर्ड में नए खेमे के तौर पर देखा जा रहा है।

इसमें अब विपिन सोढ़ी, बीना वाधवा व धर्मेंद्र सोनकर की गिनती की जा रही है। वहीं, दूसरा खेमा रिनी जैन, बुशरा कमाल, नीरज राठौर व अनिल जैन का माना जा रहा है। जबकि मंजू गोयल एकला चलो के अंदाज में हैं। बोर्ड बैठक के दौरान पूरा स्टाफ सदन के बाहर मौजूद था। मंजू गोयल ने आठ लाख के नुकसान की भरपाई के लिए जिम्मेदारी तय करने की बात कही तो तालियां गूंजने लगीं।

ऐसा पहली बार जब स्टाफ ने खुशियां जाहिर की हों। मंजू गोयल यहीं नहीं रुकीं। टंचिंग ग्राउंड के पाइंट पर प्रशासन की एनओसी के सवाल पर उन्होंने कहा कि जो जगह कैंट बोर्ड की है उस पर एनओसी का सवाल ही नहीं उठता। इस बात को सभी ने माना भी और ठहाका भी लगाया। बीना वाधव ने कहा कि कोई भी निर्णय लेते हुए सभी के हितों को ध्यान रखा जाना चाहिए। क्योंकि सभी के हितों में ही बोर्ड का हित है।

खिन्न नजर आए बोर्ड सदस्य

आमतौर पर कैंट अफसरों को अंगुलियों पर नचाने वाले बोर्ड सदस्य जिस प्रकार से ठेका छोड़ा गया है उससे खिन्न नजर आए। तमाम कोशिशों के बाद भी सदस्य अपनी मनोदशा को छिपा नहीं पा सके। ऐसा नहीं कि सदस्य ठेका छोड़ने के पक्ष में नहीं थे। कैंट विधायक के सुर में सुर मिलाने की जहां तक बात है तो वो तो संगठन का हिस्सा होने की वजह से मजबूरी थी, लेकिन असलियत तो यह है कि एक भी सदस्य ऐसा नहीं है जो ठेके की एवेज में मिलने वाले लाभ से खुद को वंचित रखना चाहता हो।

ठेके को लेकर अफसरों व ठेकेदार से ज्यादा उतावले तो बोर्ड के सदस्य नजर आते हैं। हालांकि इस बात की पुष्टि तो नहीं की जा सकती, लेकिन सुनने में आया है कि बोर्ड बैठकों में मनमाफिक फैसले कराने के लिए ठेकेदार को भारी भरकम भेट पूजा सदस्यों की करनी पड़ती थी। चर्चा है कि शुक्रवार की बोर्ड बैठक के अघोषित बहिष्कार के पीछे भी कुछ ऐसे ही कारण गिनाए जा रहे हैं। बस इस बार इतना हुआ है कि जो ठेकेदार अब तक बोर्ड सदस्यों की धुन पर ठुकता था वो इस बार कैंट अफसरों पर बलिहारी नजर आए।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

UP Budget 2026: योगी सरकार का बजट, 10 लाख रोजगार और लड़कियों के लिए 1 लाख रुपये सहायता

जनवाणी ब्यूरो | यूपी: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार...
spot_imgspot_img