
राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा यानी नीट यूजी 2024 का रिजल्ट 14 जून को जारी होने वाला था लेकिन नेशनल टेस्टिंग एजेंसी-एनटीए ने बिना किसी सूचना के 4 जून को अचानक जारी कर दिया। परिणामों ने तब खलबली मचा दी, जब 67 स्टूडेंट्स ने 720 में से 720 का स्कोर हासिल कर लिया। इससे पहले से चल रही पेपर लीक की आशंकाओं को बल मिला और लोगों ने सवाल खड़े करने शुरू कर दिए। अब तक नीट में एक, दो या बहुत हुआ तो तीन टॉपर होते थे। यह इतिहास में पहली बार है कि 720 में से 720 यानी फुल मार्क्स हासिल कर 67 स्टूडेंट्स ने आॅल इण्डिया रैंक-1 हासिल की है। हाल यह हो गया है कि देश के टॉप मेडिकल कॉलेज-दिल्ली एम्स में केवल 50 सीटें हैं और पूरे में से पूरे नंबर लाने के बावजूद स्टूडेंट्स को यहां एडमिशन नहीं मिल पा रहा। बीते साल नीट यूजी में शामिल अभ्यर्थियों के औसत मार्क्स 279.41 थे, जबकि इस बार यह बढ़कर 323.55 हो गए हैं। काट आॅफ में पहली बार एक ही साल में करीब 45 अंकों की जोरदार बढ़ोतरी देखने को मिली है।
हालत यह है कि पिछले साल 600 नंबर पर कई जनरल बच्चों को सरकारी कॉलेज मिल गया था, इस साल 640 नंबर वाले को भी सीट नहीं मिलेगी। पिछले साल 612 नंबर पर करीब 26 हजार रैंक थी, इस साल 76 हजार स्टूडेंट्स ने यह नंबर हासिल कर लिए। टॉपर्स लिस्ट के सीरियल नंबर 62 से लेकर 69 के स्टूडेंट्स हरियाणा के एक ही सेंटर के हैं। इनमें किसी छात्र के नाम में सरनेम नहीं है। इन 8 में से 6 छात्रों को 720 में से 720 अंक हासिल हुए है, वहीं, अन्य दो को 719, 718 हैं। ऐसी ही गड़बड़ी यूपी, गुजरात, राजस्थान, दिल्ली और कर्नाटक के टॉपर्स के मामले में आई है। यूपी, तमिलनाडु और गुजरात में रैंक-1 वालों के रोल नंबर काफी करीबी हैं। यह समानता बताती है कि इन स्टूडेंट्स को संभवत: एक ही सेंटर अलॉट हुआ है और एक सेंटर्स से नीट के ज्यादा टॉपर्स निकले। 67 कैंडिडेट्स परफेक्ट स्कोर पर एनटीए का कहना है कि इस बार सबसे ज्यादा 23.33 लाख कैंडिडेट्स ने एग्जाम दिया। 67 में से 17 कैंडिडेट नॉर्मल तरीके से ही टॉप कर रहे थे। 67 टॉपर्स में से 44 ऐसे छात्र हैं, जिन्होंने फिजिक्स के एक क्वेश्चन के आंसर को लेकर आपत्ति जताई थी। उन्हें इस क्वेश्चन पर पूरे नंबर मिले हैं। इस क्वेश्चन को लेकर कुल 13,373 चैलेंज मिले थे, जिसके बाद दोनों विकल्पों को सही मानना पड़ा। 4 जून को ही परिणाम जारी करने के बारे में एनटीए का कहना है कि कोर्ट ने फैसला दिया था कि पेपर कैंसिल नहीं किया जाएगा। इसलिए परिणाम तैयार होते ही रिजल्ट घोषित कर दिया। स्टूडेंट्स ने ग्रेस मार्क्स तय करने के तरीके पर भी कई सवाल उठाए हैं। जैसे-एनटीए ने सेंटर्स पर सीसीटीवी फुटेज और वहां के कर्मचारियों की रिपोर्ट और स्टूडेंट्स की एफिशिएंसी के आधार पर ग्रेस मार्क्स देने की बात कही है। लेकिन इसके लिए क्या नियम या फॉर्मूलस लगाया, नंबर किस आधार पर दिए। उदाहरण के लिए किसी स्टूडेंट का 15 मिनट पेपर लेट हुआ तो उसे मिनट के हिसाब से मार्क्स दिए गए या फिर कोई और तरीका निकाला गया, स्पष्ट नहीं है। केवल यह कह दिया गया है कि बच्चों का पेपर लेट हुआ। उनके लेट होने के समय और एक्यूरेसी के आधार पर ग्रेसिंग मार्क्स दिए गए। इसमें विसंगति यह है कि पेपर में स्टूडेंट सबसे पहले आसान सवाल ही सॉल्व करता है और नीट में तो आमतौर पर सबसे पहले बायोलॉजी का ही पेपर सॉल्व करते हैं। सबसे ज्यादा समय और एफर्ट लास्ट में और हार्ड सवालों में लगता है। फिर शुरूआती समय के आधार पर स्टूडेंट की बाद की एफिशिएंसी को कैसे जांचा जा सकता है। सवाल यह भी है कि आॅफलाइन पेपर में सीसीटीवी फुटेज या परीक्षा सेंटर में मौजूद कर्मियों के आधार पर कैसे स्टूडेंट्स की एक्यूरेसी निकाली जा सकती है। पहली बात तो आॅनलाइन एग्जाम क्लेट के फार्मूले को आॅफ लाइन नीट में लागू करना सही नहीं था। इसके अलावा फैसले के शुरू में ही स्पष्ट किया गया है कि इंजीनियरिंग और मेडिकल कॉलेज के मामले में यह लागू नहीं होगा, फिर एनटीए ने ऐसा किया ही क्यों…?
केंद्र सरकार ने स्टूडेंट्स की गड़बड़ी शिकायतों को की जांच लेकर एनटीए ने ग्रेस अंक विवाद को फिर से जांचने के लिए 4 सदस्यीय कमेटी का गठन किया है। कमेटी 1563 कैंडिडेट्स और 6 सेंटर्स की जांच करेगी, जहां टाइम लॉस की वजह से ग्रेस मार्क्स मिले हैं। ये सेंटर्स मेघालय, बहादुरगढ़ (हरियाणा), दंतेवाड़ा, बालोद (छत्तीसगढ़?), सूरत (गुजरात) और चंडीगढ़ के हैं। जरूरत पड़ी तो इनका रिजल्ट संशोधित किया जाएगा। इससे नीट रिजल्ट के बाद होने वाली एमबीबीएस व बीडीएस समेत अन्य मेडिकल कोर्सेज की एडमिशन प्रक्रिया पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कमेटी को एक हफ्ते में रिपोर्ट देने को कहा गया है। यह बात और है कि कमेटी का अध्यक्ष एनटीए के ही मुखिया प्रदीप कुमार जोशी को बनाया है। जोशी हालांकि यूपीएससी के चेयरमैन रह चुके हैं, लेकिन यह सवाल उठ रहा है कि किसी भी संस्था का मुखिया ही अपनी संस्थान की खामी की जांच के लिए बनी समिति का अध्यक्ष कैसे हो सकता है।
स्टूडेंट्स और उनके माता-पिता कई उम्मीदों के साथ अपने बच्चों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करवाते हैं, लेकिन जब परीक्षा में धांधली होती है तो इनकी उम्मीदें टूट जाती हैं। इससे उन छात्रों के बीच निराशा पैदा कर दी है जो कठोर तैयारी के बावजूद कटआॅफ से चूक गए। इससे मेडिकल शिक्षा प्रणाली में भरोसा भी कम होगा। छात्रों के भविष्य से जुड़े इस विषय की गहनता और पारदर्शी तरीके से जांच हो और छात्रों की समस्याओं का निस्तारण कर उन्हें जल्द से जल्द न्याय दिया जाए।


