- अपनों से बिछडेÞ और घर से फरार हुए बच्चों को जीआरपी ने आॅपरेशन मुस्कान के तहत वापस घर भिजवाया
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: सिटी एवं कैंट स्टेशन पर जीआरपी पुलिस के द्वारा ट्रेन में सफर करने वाले यात्रियों की सुरक्षा एवं ट्रेन व स्टेशन पर कोई घटना या दुर्घटना न हो जाये उसके लिये कड़ी सर्तकता बरती जाती है। कोई छोटी सी चूक बड़ी दुर्घटना न बन जाये उसके लिये जीआरपी पुलिस ट्रेन व स्टेशन पर समय-समय पर सघन चेकिंग अभियान चलाती है। वहीं, दूसरी ओर जीआरपी आॅपरेशन मुस्कान को भी बड़ी सफलतापूर्वक अंजाम दे रही है।
देखा जाये तो जीआरपी पुलिस के द्वारा आॅपरेशन मुस्कान को बड़ी ही सफलतापूर्वक अंजाम दिया जा रहा है। वहीं, परिजन अपने खोये हुए या डांट फटकार के कारण घर से भागे बच्चों को वापस पाकर सरकार की इस परिजयोजना एवं जीआरपी पुलिस की सतर्कता की उस समय सहराना करते देखे जा सकते हैं,जब उनका कोई बिछुडा या घर से भागा बच्चा उन्हे आपरेशन मुस्कान के अंतर्गत वापस मिलता है।
केंद्र व प्रदेश सरकार के द्वारा आरेशन स्माइल जिसे आपरेशन मुस्कान के नाम से भी जाना जाता है,उससे उन लोगों के चेहरे पर मुस्कान लौट रही है,जिनके बच्चे बीच सफर में कहीं अपनों से बिछड़ गये या फिर परिजनों की डांट फटकार से घर से भाग निकले। जिसमें वह किसी न किसी माध्यम से पुलिस तक पहुंच गये। जिसके बाद पुलिस उन बच्चों का नाम पता नोट करके उन्हे अपने घर वापस भिजवा देती है।
जिसमें अपनों से बिछडेÞ बच्चों को पाकर परिवार के सदस्यों के चेहरे पर स्माइल/मुस्कान वापस लौट आती है। इसमें रेलवे स्टेशन पर भी आॅपरेशन मुस्कान के अंतर्गत अपनों से खोये हुए बच्चों को वापस मिलवाने का क्रम जारी हैं। एक वर्ष में सिटी स्टेशन पर करीब 100 से अधिक बच्चों को उनके परिजनों को लौटकर उनके चेहरे पर मुस्कान जीआरपी पुलिस भी बड़ी सक्रियता निभा रही है।
एक वर्ष में ही यदि मेरठ के सिटी व कैंट स्टेशन पर इस मुहिम के तहत जीआरपी पुलिस के द्वारा अपनों से बिछड़े बच्चों को वापस परिजनों तक पहुंचाकर उनके चेहरे पर मुस्कान लौटाने के मामले देखे जायें तो करीब 100 से अधिक परिवारों के चेहरे पर मुस्कान लौटा चुकी है। जीआरपी थानाध्यक्ष राजेंद्र सिंह ने बताया कि प्रत्येक माह 4 से 5 बच्चे स्टेशन पर पहुंच जाते हैं, जोकि परिजनों की डांट फटकार से क्षुब्ध होकर या बीच रास्ते में अपनों से बिछड़ जाते हैं,

उनसे नाम पते की जानकारी कर उन्हे सुरक्षित अपने घर वापस भिजवा जाता है। यदि कोई ट्रेन आदि में अपनों से बिछड़ जाये और वह कुछ ही देर में मिल जाये और परिजनों को वापस लौटा दिया जाये तो उसका ज्यादा कोई डाटा नहीं रखा जाता, लेकिन कुछ ऐसे मामले होते हैं। जिसमें अपनों से बिछड़े एवं घर से भागे हुए बच्चों को वापस भिजवाया जाता है तो उनका पूरा रिकॉर्ड जीआरपी थाने पर रखा जाता है।
वहीं यदि बीते वर्ष 2022 का आंकड़ा देखा जाये तो फरवरी महीने में 3 बच्चे, मार्च में 4 बच्चे, अप्रैल में भी 4 बच्चे, मई में 5 बच्चे, सितंबर में 3 बच्चे, अक्टूबर में 4 बच्चे, नवंबर में 3 बच्चे, दिसंबर में 4 बच्चे, जनवरी 2023 में 5 बच्चे एवं फरवरी 2 बच्चे एवं मार्च में 4 बच्चे, यदि कुल आंकड़ा देखा जाये तो 40 से अधिक बच्चों का एक वर्ष में आॅन रिकॉर्ड हो जाता है। जोकि सिटी स्टेशन पर या तो अपनों से बीच सफर में बिछड़कर गलत ट्रेन में बैठकर स्टेशन पहुंचे और या फिर अपनों की डांट फटकार से किसी ट्रेन या अन्य माध्यम से स्टेशन पर पहुंच गये
और वह संदिग्ध हालत में घूमते पुलिस को मिल गये। जिसके बाद उनसे प्यार या फिर थोड़ी सख्ती से उनका सही नाम पता पूछकर उनके परिजनों तक पहुंचा जा चुका है। वहीं, दूसरी तरफ ऐसा नहीं है कि जो बच्चे स्टेशन पर पहुंचे हैं। वह आसपास के जनपद के होते हैं या स्थानीय। वह दूसरे प्रदेशों तक से सिटी स्टेशन पर आ जाते हैं। जिनका नाम पता तस्दीक करने के बाद उन्हे वापस उनके घर जब भिजवाया जाता है या परिजनों को थाने बुलवाकर उन्होंने सौंपा जाता है तो परिजनों के चेहरे पर मुस्कान देखी जा सकती है कि वह अपनों से बिछड़ने के बाद किस रह से उनके चेहरे पर खुशी दिखाई देती है।

