Wednesday, March 18, 2026
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Sawan 2025: क्या आप जानते हैं? जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में है गहरा अंतर

नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। श्रावण मास, जिसे भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना माना जाता है, इस बार 11 जुलाई 2025 से आरंभ हो चुका है। यह माह भक्ति, तप, व्रत और शिव आराधना का अनुपम संगम है। इस दौरान देशभर में शिवालयों में विशेष पूजा-अर्चना होती है, श्रद्धालु व्रत रखते हैं और लाखों कांवड़िए गंगाजल लाकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। इस मास में शिवलिंग पर जल चढ़ाने की परंपरा निभाई जाती है, जिसे जलाभिषेक कहा जाता है। इसी के साथ एक अन्य विशेष विधि होती है रुद्राभिषेक, जिसे वैदिक मंत्रों और विशेष सामग्री के साथ पूर्ण विधि-विधान से संपन्न किया जाता है। कई बार लोग इन दोनों पूजा विधियों को एक ही समझ लेते हैं, जबकि दोनों में बड़ा अंतर होता है। आइए जानते हैं कि जलाभिषेक और रुद्राभिषेक में क्या अंतर होता है।

जलाभिषेक क्या होता है?

जलाभिषेक का अर्थ है भगवान शिव का जल से अभिषेक करना। पूजा के दौरान शिवलिंग पर पवित्र जल अर्पित किया जाता है जिससे उन्हें शीतलता प्रदान हो और वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो। यह एक सरल और सामान्य विधि है जिसे श्रद्धालु घर पर भी कर सकते हैं। जलाभिषेक विशेष रूप से सावन मास में किया जाता है, जब भक्तगण शिवलिंग पर गंगाजल, दूध या सामान्य जल अर्पित करते हैं।

क्या है रुद्राभिषेक?

रुद्राभिषेक में ब्राह्मणों द्वारा वेद मंत्रों का उच्चारण करते हुए शिवलिंग पर दूध, शहद, दही, घी और शुद्ध जल सहित पांच पवित्र द्रव्यों से अभिषेक किया जाता है। यह पूजा विधि विशेष रूप से मानसिक शांति, ग्रह दोषों की शांति, संतान सुख, रोग मुक्ति और मनोकामना पूर्ति के लिए की जाती है। घर पर रुद्राभिषेक करते समय शिवलिंग को उत्तर दिशा में स्थापित करना चाहिए और पूज करते समय पूर्व दिशा की ओर मुख करके अभिषेक करना चाहिए।

इन बातों का रखें ध्यान

तुलसी के पत्ते शिव पूजा में वर्जित माने जाते हैं, इसलिए इनका प्रयोग न करें।

अभिषेक करते समय मन को शांत और एकाग्र रखना चाहिए, आपस में बातचीत करने से बचें।

मंत्रों का उच्चारण शुद्ध रूप से करें, गलती से भी मंत्रों को तोड़-मरोड़कर न पढ़ें।

जल से रुद्राभिषेक करने के लिए तांबे के पात्र का प्रयोग सबसे शुभ माना जाता है।

रुद्राभिषेक के दौरान रुद्राष्टाध्यायी या वैदिक मंत्रों का जाप अत्यंत फलदायक माना जाता है।

सावन मास में अगर नियम और विधि-विधान के साथ रुद्राभिषेक या जलाभिषेक किया जाए, तो भगवान शिव की कृपा जल्दी प्राप्त होती है और जीवन में शांति, समृद्धि और सकारात्मकता का संचार होता है।

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