- विपक्षी दलों ने कहा, ऋण का अधिभार किसान पर ही पड़ेगा
- भाजपा ने कहा, बजट गरीब और किसान के लिए हितकारी
जनवाणी ब्यूरो |
शामली: वर्ष 2021-22 के आम बजट को लेकर विपक्षी दलों ने बजट के जरिए किसानों को और कर्जदार बनाए जाने के नजरिए से देखा है।
उनका कहना है कि एमएसपी पर खरीद के आंकड़ों के माध्यम से बजट को किसान हितैषी होने का दावा किया गया जबकि हकीकत में 90 फीसदी किसानों को एमएसपी मिलती ही नहीं है। वहीं भाजपा ने बजट को आम जनता के साथ-साथ किसान हितैषी करार दिया।
बजट से किसान को मिली निराशा
वित्त मंत्री ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद के आंकड़ों के माध्यम से बजट के किसान हितैषी होने का दावा किया है लेकिन सच्चाई है कि 96 प्रतिशत किसानों को एमएसपी नहीं मिलती। किसानों को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि बढ़ने की उम्मीद थी लेकिन उसके बजट में इस बार कटौती कर दी गई।
![]() सरकार ने मंडियों में निवेश के लिए धन जुटाने के लिए सेस लगाने की घोषणा से एपीएमसी मंडियों को बन्द नहीं होने के प्रति विश्वास दिलाने की कोशिश की है, लेकिन इससे किसानों के बजाय आढ़तियों का लाभ अधिक होगा। फसल ऋण के बजट में प्रत्येक वर्ष की तरह 1.5 लाख करोड़ की बढ़ोतरी की गई है। इससे किसानों को अतिरिक्त कर्जा तो मिल सकेगा लेकिन वित्त मंत्री को इस पर भी ध्यान देना चाहिए था कि रिकार्ड फसल उत्पादन के बाद भी किसानों के कर्जे की आवश्यकता क्यों पड़ रही है। माइक्रो सिंचाई परियोजना एवं खेती से जुड़े अन्य सेक्टरों को सरकार द्वारा अधिक बजट दिया गया है जिसका स्वागत होना चाहिए। -प्रो. सुधीर पंवार, सपा नेता, पूर्व सदस्य राज्य योजना आयोग। |
बजट में सरकार किसानों को कर्ज बांटने की राशि तो बढ़ा रही है, पर उनकी आय कैसे बढ़े इस पर किंचित मात्र भी ध्यान नहीं दिया गया है। कर्ज बांटने से किसान पर कर्ज का बोझ तो बढ़ जाएगा, पर वह इस बोझ को उतारेगा कैसे? इस पर बजट मौन है। आमजनों को आयकर में कोई छूट नहीं मिली है। सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे आमजन की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और उसका आर्थिक बोझ कम हो।-वारिस राव, पूर्व विधायक |
![]() आम बजट में किसानों, गरीबों और मजदूरों को कुछ नहीं मिला है। फसलों के वाजिब दाम की मांग लगातार किसान करते रहे हैं। ऐसे में बढ़ती कमर तोड़ महंगाई देखते हुए खाद, बीज और सस्ती बिजली का प्रावधान बजट में होना चाहिए था ताकि अन्नदाता देश का पेट भर सके। लुभावनी घोषणा से समस्या का हल होने वाला नहीं है। यह बजट किसान, गरीब सहित पूरे देश का होता तो बेहतर होता। -राकेश पाल, बसपा जिलाध्यक्ष, जनपद शामली। |
![]() वर्ष 2021-22 के आम बजट में ऐसा कुछ भी नहीं है जिससे आम आदमी खुश हो सके। कोरोना महामारी के चलते मध्यम वर्गीय और नौकरी-पेशा व्यक्ति की उम्मीद थी कि उसको इंकम टैक्स स्लैब में राहत मिलेगी लेकिन वित्त मंत्री ने एक झटके में ही उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। कोरोना महामारी से लघु उद्योगों को जो बड़ा झटका लगा था, उससे उनको ऊबारे जाने की जरूरत थी लेकिन ऐसे कदम बजट में नहीं उठाए गए हैं। डीजल पर 2.25 फीसदी सेस बढ़ाने से किसानों को अधिभार झेलना पड़ेगा। -दीपक सैनी, कांगेस जिलाध्यक्ष, जनपद शामली। |
![]() वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण का बजट किसानों के लिए हताशा लेकर आया है। वित्त मंत्री ने एक तरफ खरीद बढ़ोतरी का हवाला देकर किसान को खुश करने का प्रयास किया लेकिन लंबे समय से चली आ रही किसानों की एमएसपी की मांग की कोई बात नहीं हुई, उल्टा सरकार ने खेती पर कृषि सेस लगाकर किसान की कमर तोड़ दी। देश के इतिहास में पहली बार बजट के ही दिन डीजल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ा दी गई। किसान को उम्मीद थी कि पेस्टिसाइड्स पर जीएसटी घटेगा तो उसकी जेब में कुछ पैसे बचेंगे खाली पेस्टिसाइड की खरीद में किसान 5000 करोड़ का जीएसटी हर साल दे रहा है लेकिन सरकार ने इस इस और कोई ध्यान नहीं दिया किसानों के यंत्रों पर किसी प्रकार की सब्सिडी की घोषणा वित्त मंत्री ने नहीं की। -डा. विक्रांत जावला, जिला उपाध्यक्ष, रालोद शामली। |



बजट में सरकार किसानों को कर्ज बांटने की राशि तो बढ़ा रही है, पर उनकी आय कैसे बढ़े इस पर किंचित मात्र भी ध्यान नहीं दिया गया है। कर्ज बांटने से किसान पर कर्ज का बोझ तो बढ़ जाएगा, पर वह इस बोझ को उतारेगा कैसे? इस पर बजट मौन है। आमजनों को आयकर में कोई छूट नहीं मिली है। सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जिससे आमजन की आर्थिक स्थिति मजबूत हो और उसका आर्थिक बोझ कम हो।

