Friday, December 9, 2022
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पृथ्वी की प्लेटोें में असन्तुलन से डोल रही धरती

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  • एक पखवाड़े में आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर आ चुका है भूकम्प
  • भूकम्प जोन: हिमालय पर्वत के नीचे दो प्लेट्स आपस में मिल रही हैं
  • असन्तुलन के चलते तनाव भी बन रहा भूकम्प की वजह

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: इस समय दुनिया के कई देशों में जमीन डोल रही है। कारण भूकम्प। जमीन डोलने की तीव्रता यदि रिक्टर स्केल के हिसाब से देखें तो कहीं खतरे के निशान से नीचे तो कहीं खतरे के निशान से बहुत ऊपर। पिछले एक पखवाड़े में लगभग आधा दर्जन से अधिक स्थानों पर भूकम्प के चलते जमीन डोल चुकी है। इसलिए खतरा बना हुआ है। इस संबंध में मेरठ कॉलेज की भूगोल विषय की एसोसिएट प्रोफेसर अनिता मलिक का कहना है कि हम भूकम्प जोन में हैं लिहाजा खतरा हम पर भी मंडरा रहा है।

प्रो. अनिता के अनुसार भूकम्प एक प्राकृतिक आपदा है, इसके कई कारण हो सकते हैं, लेकिन जो मुख्य कारण है वो पृथ्वी की प्लेटों में असंतुलन उत्पन्न होना है। वो कहती हैं कि इसी क्षेत्र में हिमालय पर्वत के नीचे दो प्लेट्स आपस में मिल रही हैं और इन प्लेट्स की गति अतिसारी और अपसारी होती हैं। प्रो. अनित मलिक के अनुसार जहां जहां यह गति होती है वहां पर भूकम्प और ज्वालामुखी का गौण (प्रमख) क्षेत्र बन जाता है।

पृथ्वी की प्लेटों के असन्तुलन के कारण ही कम्पन्न तरंगों के रुप आने लगते हैं और यही तरंगों वाला कम्पन्न भूकम्प होता है। हाल ही में मेरठ के अलावा दिल्ली व एनसीआर के साथ साथ महाराष्ट्र के नासिक, मैक्सिको, इडोनेशिया, तुर्की व सोलोमन आईलैण्ड में भूकम्प आ चुके हैं। मैक्सिकों में तो रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 6.2 व तुर्की में 6.1 थी जबकि सोलोमन आइलैण्ड में आए भूकम्प की तीव्रता 7.3 मापी गई।

यहां तो भूकम्प की चेतावनी तक जारी कर दी गई। प्रो. अनिता मलिक यह भी कहती हैं कि भूमध्य सागर से हिमालय पर्वत का क्षेत्र तथा थाईलैंड व इंडोनेशिया, इस पूरे क्षेत्र में एक अर्द्ध चन्द्राकार रुप में प्लेट्स आपस में मिली हुई हैं। वो कहती हैं कि जब इन क्षेत्रों में तनाव बढ़ता है तो इसी कारण इन क्षेत्रों में भूकम्प आते हैं।

10 मिनट तक रहा इतिहास का सबसे लम्बा भूकम्प

जब भी भूकम्प आते हैं वो कुछ सेकेण्ड तक ही धरती को हिलाते हैं लेकिन इतिहास का सबसे लम्बे समय का भूकम्प 2004 में आया था जो 10 मिनट का था। यह भूकम्प हिन्द महासागर में आया था। नेशनल अर्थक्वेक इंफॉर्मेशन सेंटर के अनुसार हर साल लगभग 20 हजार भूकम्प रिकॉर्ड किए जाते हैं और इनमें से लगभ्ज्ञग 100 भूकम्प ही खतरनाक होते हैं।

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