- इलेक्शन में सियासी दलों के वादे से 3800 करोड़ का नुकसान
- पीवीवीएनएल की एकमुश्त समाधान योजना नहीं चढ़ सकी परवान
- 4700 करोड़ के लक्ष्य में 900 करोड़ रुपये ही वसूल पाया महकमा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: बिजली विभाग को चुनावी मौसम में राजस्व का बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। महकमे की एकमुश्त समाधान योजना पूरी तरह सियासी दलों के चुनावी वादों की भेंट चढ़ गई। पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) ने इस योजना से 4700 करोड़ रुपये वसूली का लक्ष्य रखा था, मगर केवल 900 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके हैं। इस तरह राज्य में चुनाव होने से 3800 करोड़ रुपये के राजस्व का फटका महकमे को लगा है।
गौरतलब है कि अक्टूबर माह में बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं के लिए ओटीएस योजना निकाली थी। इस योजना के तहत उपभोक्ताओं को महकमे की ओर से सरचार्ज में छूट प्रदान की गई थी। इसमें विभाग की मंशा थी कि इस छूट के बहाने उसे अपने बड़े बकायदारों से बिजली बिल की वसूली करने में आसानी होगी।
इसी को ध्यान में रखकर ओटीएस योजना का लाभ उपभोक्ताओं को दिया गया था, मगर विभाग के इरादों पर सियासी दलों के चुनावी वादों ने पूरी तरह पानी फेर दिया। राज्य में चुनाव होने के कारण महकमा लक्ष्य के सापेक्ष बिजली के बकायदारों से वूसली नहीं कर सका है। जहां लक्ष्य अक्टूबर से जनवरी तक 4700 करोड़ रुपये वसूलने का निर्धारित किया गया था। वहां केवल 900 करोड़ की रिकवरी ही विभाग कर पाया है। इस तरह विभाग को चुनाव ने 3800 करोड़ रुपये के राजस्व का चपत लगाया है।
गठबंधन का 300 यूनिट फ्री बिजली का वादा
विधानसभा में गठबंधन ने 300 यूनिट फ्री बिजली देने का वादा जनता से किया है। इतना ही नहीं गठबंधन दलों की ओर से पुराने बिजली बिल माफ करने की बात भी कही गई है। ऐसे ही सियासी दलों के चुनावी वादों के चलते बिजली उपभोक्ताओं ने अपना बकाया बिल का भुगतान विभाग को नहीं किया है। भाजपा की ओर से भी बिजली बिलों में रियायत देने की घोषणा चुनाव में की गई है। कांग्रेस भी बिजली के मामले में यूपी की जनता को बड़ी राहत देने की बात कह रही है।

