
इस साल मौसम को ले कर सारे पूवार्नुमान गड़बड़ा रहे हैं। जब भारी गर्मी का अंदेशा था तो वैशाख के महीने में सावन जैसी झड़ी लग गई है। शक लग रहा है कि कहीं अब गर्मी और बरसात का गणित कुछ गड़बड़ा ना जाए। कोई साल बारिश का रूठ जाना तो कभी ज्यादा ही बरस जाना जलवायु परिवर्तन के दिनों-दिन बढ़ रहे खतरे का स्वाभाविक परिणाम है और भारत अब इसकी भीषण चपेट में है। इस बार अप्रैल के के पहले हफ्ते में ही सदानीरा कहलाने वाली गंगा घाटों से दूर हो गई है। प्रयागराज हो या फिर पटना हर जगह गंगा में टापू नजर आ रहे हैं। अधिकांश छोटी नदियां सूख गई हैं और इसका सीधा असर तालाब-कुओं-बावड़ियों पर दिख रहा है। स्काई मेट के अनुसार इस साल देश में सामान्य अर्थात कोई 96 फीसदी बरसात का अनुमान है।