- आवागमन में लोगों को करना पड़ रहा भारी मुसीबत का सामना
- ट्रैफिक पुलिसकर्मी और होमगार्ड यातायात कम वसूली मेें ज्यादा देते हैं ध्यान
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ट्रैफिक पुलिस लाख दावे करे कि शहर में जाम की समस्या नहीं है। ट्रैफिक पुलिस के ये तमाम दावे हवाई साबित हुए हैं। बेगमपुल शहर का एक ऐसा प्रमुख चौराहा है जहां लाखों की तादाद में दुपहिया व चौपहिया वाहन चालक रोज इस चौराहे से गुजरते हैं। कई 100 की संख्या में जमे थ्री व्हीलर्स व ई-रिक्शा के बाद बेगमपुल की ट्रैफिक व्यवस्था न केवल पूरी तरह चरमरा गई है, बल्कि लोगों के लिए आम मुसीबत बनी है।
बेगमब्रिज प्रमुख चौराहे पर ट्रैफिक का दिनोंदिन दबाव बढ़ता जा रहा है। प्रमुख चौराहे पर बढ़ते ट्रैफिक का आलम ये है कि हजारों की संख्या में ये ई-रिक्शा और थ्री व्हीलर्स बेगमपुल चौराहे पर बीचोंबीच खड़े होकर न केवल जाम की समस्या पैदा कर रहे हैं। बल्कि लोगों के आवागमन में बाधक बने हुए हैं। चौराहे पर तैनात दर्जनों ट्रैफिक पुलिसकर्मी और होमगार्डस इन थ्री व्हीलर्स व ई-रिक्शा चालकों के सामने खुद को असहाय समझकर सड़क किनारे साइड में खड़े हो जाते हैं।
इन ई-रिक्शा चालकों व थ्री व्हीलर्स का दुस्साहस इतना बढ़ जाता है कि ये नो एंट्री में भी घुसकर टैÑफिक व्यवस्थाको बाधित करने में नहीं चूकते। जिसके चलते सड़क दुर्घटनाओं के होने की प्रबल संभावना बनी रहती है। ई-रिक्शा व थ्री व्हीलर्स चालक सुबह से ही बेगमब्रिज पर अपना कब्जा जमा लेते हैं।

ट्रैफिक पुलिस की शह पर बेगमपुल चौराहे पर काबिज हजारों ई-रिक्शा और थ्री व्हीलर्स लोगों के लिए आवागमन में जी का जंजाल बने हैं। ट्रैफिक पुलिस इन पर लगाम लगाने के बजाय इनसे वूसली में लगी रहती है। ट्रैफिक पुलिस की मौजूदगी में बेगमपुल पर ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमराकर रह गई है। बेगमपुल जैसे प्रमुख चौराहे पर जाम से निजात दिलाने के नाम पर तैनात ट्रैफिक पुलिसकर्मी शोपीस बनकर रह गए हैं।
निगम के कर्मचारियों की संपत्ति की हो जांच, अधिकारी मौन
मेरठ: नगर निगम 23 कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है। जिसमें जहां एक तरफ उनकी फर्जी नियुक्ति कि जांच कर उन पर कार्रवाई के लिये तत्कालीन निगम के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी डा. प्रेम सिंह तमाम आलाधिकारियों से शिकायत कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ बीके गुप्ता ने भी डीएम, नगर विकास मंत्री समेत तमाम आलाधिकारियों को ट्वीट करके इस मामले में कार्रवाई की मांग की है और निगम में कार्यरत कर्मचारियों की संपत्ति की जांच कराने की भी मांग की है। वहीं इस मामले में निगम के अधिकारी मौन बने हुये हैं।
नगर निगम निगम में 23 कर्मचारियों की फर्जी नियुक्ति समेत विभिन्न मामले लगातार तूल पकडेÞ ता रहे हैं। वहीं, निगम के अधिकारी फर्जी नियुक्ति के मामले में किन तथ्यों के आधार पर सभी 23 कर्मचारियों को क्लीन चिट दी गई वह स्पष्ट रूप से बताने को तैयार नहीं हैं। इस मामले में जो जांच अपर नगरायुक्त ममता मालवीय के द्वारा मुख्यमंत्री के पोर्टल पर शिकायत के संबंध में डीएम को भेजी है।
उसमें तत्कालीन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम ने जांच समिति कब गठित हुई और किस पत्रांक व दिनांक पर आयुक्त मेरठ मंडल मेरठ के यहां से पत्र जारी हुआ उन सब पर सवाल खडेÞ कर दिये थे। अब उन्होंने 23 कर्मचारियों में से दो ऐसे कर्मचारी बताये हैं। जिन्होंने नगर निगम में रहते हुये करीब एक करोड़ रूपये से अधिक की संपत्ति कैसे अर्जित कर ली। उनकी संपत्ति की जांच कराने की मांग की है। वहीं, दूसरी ओर बीके गुप्ता ने डीएम, नगर विकास मंत्री समेत तमाम अधिकारियों को ट्वीट किया है और इस मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है।
वहीं, बीके गुप्ता का कहना है कि निगम में 200 ड्राइवर 2215 सफाई कर्मचारी जलकल विभाग के संविदा कर्मचारी को भी 23 कर्मचारियों की जो नियुक्ति निगम के द्वारा वैध बताई गई हैं तो उन सभी कर्मचारियों को भी स्थाई किया जाये। वहीं, तत्कालीन मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी नगर निगम व बीके गुप्ता के द्वारा तमाम आरोप लगाते हुये निगम में बढ़ते भ्रष्टाचार के मामले की जांच के साथ दो ऐसे कर्मचारी बताये हैं। जिन्होंने निगम में रहते हुये करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित कर ली है। वहीं, इन सब आरोप प्रत्यारोप के बीच निगम के अधिकारी मौन बने हुये हैं।

