- ड्रिप इरीगेशन और पॉलीहाउस जैसे प्रोजेक्ट पर दी जा रही सब्सिडी
- जलवायु अनुकूल नई किस्मों की बुवाई करेंगे तो किसानों को मिलेगा अधिक फायदा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: देश में खेती उन्नत होगी तो हम हर क्षेत्र में प्रगति कर सकते हैं। यह तभी संभव होगा जब किसान कम खाद और कम पानी में तथा आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करके खेती करें। ऐसा करने से किसानों को खेती में लाभ भी मिलेगा। इसके साथ ही उत्पादन में भी वृद्धि होगी। किसानों नई तकनीकों को अपनाकर खेती में अधिक मुनाफा कमा सकते हैं।
खेती के तौर तरीके बदलने का कोशिश में जुटी सरकार
वहीं, केंद्र सरकार खेती-किसानी में बड़ा परिवर्तन करने के लक्ष्य को लेकर आगे बढ़ रही है। इसलिए न सिर्फ किसानों को सीधा आर्थिक मदद दी जा रही है, बल्कि कृषि यंत्रों पर सब्सिडी एवं विभिन्न योजनाओं के जरिए किसानों को प्रोत्साहित भी कर रही है। सरकार ऐसी तकनीक को बढ़ावा दे रही है।
जिससे खेती में कम पानी और कम खाद की जरूरत हो। इसके तहत ड्रिप इरीगेशन और पॉलीहाउस जैसे प्रोजेक्ट पर सरकार की ओर से सब्सिडी दी जा रही है। इससे कम लागत में किसान अधिक मुनाफा कमा सकते हैं। साथ ही हेल्थ कार्ड के जरिए अपने खेत के पोषक तत्वों के बारे में जानकर किसान कम खाद में ही काम चला सकते हैं।
नई किस्मों की बुवाई करें किसान
वर्तमान समय में क्लाइमेट स्मार्ट खेती की बात की जा रही है। जलवायु परिवर्तन के कारण फसलों को नुकसान हो रहा है। इसलिए खेती में कम समय में तैयार होने वाली किस्में निकाली जा रहा हैं। वहीं, किसान भी ऐसी किस्मों का विकास कर रहे हैं जिनमें रोग कम लगे।
उधर, साल 2021 में प्रधानमंत्री नरेंदÑ मोदी ने किसानों को 35 ऐसी नई फसलों की वैरायटी का तोहफा दिया था, जो पोषण तत्वों से भरपूर और रोगरोधी हैं। इसमें जलवायु अनुकूल धान, सूखा प्रभावित क्षेत्रों के लिए चने, अरहर और सोयाबीन जैसी किस्में शमिल थीं। किसान जलवायु अनुकूल नई किस्मों की बुवाई करेंगे तो उन्हें अधिक फायदा मिलेगा।
अब जनसुविधा केंद्र के माध्यम से हो सकेगी ई-केवाईसी
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना की धनराशि अब आधार बेस खाते में भेजा जाएगा। इसके लिए लाभ पाने वाले किसानों को जनसुविधा केंद्र पर अपना अंगूठा स्क्रीन कराकर ई-केवाईसी कराना होगा। शासन ने ईकेवाइसी के लिए 31 मई तक तिथि बढ़ा दी है। जिले में प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के तहत लाखों लोगों को लाभ मिल रहा है।
वहीं, शासन से सम्मान निधि की धनराशि का भुगतान आधारबेस करने का फरमान जारी किया है। किसानों को आधारबेस भुगतान के लिए ई-केवाईसी कराना होगा। कृषि विभाग आधार लिंक करने के लिए लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान भी चला रहा है। आधार व खाता से लिंक मोबाइल पर ओटीपी आने के बाद ई-केवाईसी हो पाती थी।
सरवर काम नहीं करने व ओटीपी आने में समस्या होने के कारण शासन से ओटीपी का आॅप्शन समाप्त कर दिया गया। अब जनसुविधा केंद्र के माध्यम से किसान अपना अंगूठा लगाकर ई-केवाईसी करा पाएगा। जिससे किसानों को इस कार्य के लिए शुल्क भी अदा करना पड़ेगा। वहीं, जनसुविधा केंद्रों पर इस कार्य के 100 रुपये शुल्क देना होगा। किसान जनसुविधा केंद्र पर जाकर ई-केवाईसी करा सकते हैं।

