जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: आज 1 फरवरी को संसद में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आठवां बजट पेश कर रही है। इस दौरान वित्त मंत्री ने कहा है कि, इस बार का बजट गरीबों, युवाओं, किसानों और महिलाओं पर केंद्रित है। सरकार का ध्यान रोजगार पर है। सरकार नवाचार पर ध्यान दे रही है और कृषि के क्षेत्र में भी रोजगार बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है।
शिक्षा के लिए उत्कृष्ट संस्थान की संस्थापना की जाएगी
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता की शिक्षा के लिए उत्कृष्ट संस्थान की संस्थापना की जाएगी। मेडिकल कॉलेजों में 10 हजार अतिरिक्त सीटें बढ़ाई जाएंगी। सभी जिला अस्पतालों में डे केयर केंसर सेंटर बनाए जाएंगे। 2025-26 में ऐसे 200 सेंटर बनाए जाएंगे।
ऑनलाइन प्लेटफॉर्म वर्कर्स
सरकार उनके परिचय पत्र बनाने में मदद करेगी और उन्हें ई-श्रम कार्ड मुहैया कराएगी। इससे 1 करोड़ Gig वर्कर्स को फायदा मिलेगा।
डिजिटल किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी
स्कूलों और उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए डिजिटल किताबें उपलब्ध कराई जाएंगी। 5 आईआईटी में शिक्षा और बेहतर की जाएगी और आईआईटी पटना को वित्त पोषित किया जाएगा।
जानिए,पिछले 10 वर्षों में शिक्षा और रोजगार को बजट से क्या मिला?
शिक्षा क्षेत्र में 2014 से बजट आवंटन में वृद्धि देखी गई है। अब तक, शिक्षा क्षेत्र को आवंटित सबसे अधिक बजट वर्ष 2024 में है। 2024-25 के लिए शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।
2014 में शिक्षा बजट – कुल 82,771.10 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिसमें से 68,728 करोड़ रुपये योजना व्यय थे। 2014 के बजट में प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से शिक्षकों की कमी को दूर करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। पहली बार कौशल कार्यक्रम शुरू किए गए और वर्चुअल कक्षाओं के लिए 100 करोड़ रुपये आवंटित किए गए
2015 में शिक्षा बजट – 2015 में मंत्रालय को 69.074 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे और इसका फोकस उच्च शिक्षा, नए सरकारी संस्थान खोलने और नई सरकारी योजनाएं शुरू करने पर था।
2016 में शिक्षा बजट – 2016 के बजट में शिक्षा क्षेत्र के लिए 72,394 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो 4.9 प्रतिशत की वृद्धि है। बजट में भारत को अंतरराष्ट्रीय शिक्षा केंद्र के रूप में स्थापित करने और उच्च शिक्षा पर भी ध्यान केंद्रित किया गया
2017 में शिक्षा बजट – 2017 के बजट में 79,685.95 करोड़ रुपये आवंटित किए गए थे, जिसे बाद में संशोधित कर 81,868 करोड़ रुपये कर दिया गया। महत्वपूर्ण घोषणाओं में से एक राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी की स्थापना थी, जो नीट, जेईई मेन और यूजीसी नेट जैसी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने के लिए एक स्वायत्त संगठन है।
2018 में शिक्षा बजट – स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक सुरक्षा के लिए कुल 1.38 लाख करोड़ रुपए आवंटित किए गए, जिसमें से 83,010.29 करोड़ रुपए शिक्षा क्षेत्र को दिए गए। 2018 के बजट में विदेशी छात्रों को आकर्षित करने के लिए ‘स्टडी इन इंडिया’ कार्यक्रम की शुरुआत की गई।
2019 में शिक्षा बजट – 2019 के बजट में 94,853.64 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो 13.4 प्रतिशत की वृद्धि है। 2019 के बजट में खेल शिक्षा को बढ़ावा देने पर ध्यान केंद्रित किया गया।
2020 – शिक्षा क्षेत्र को 99,311.52 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
2021-22 – 93,224.31 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 6 प्रतिशत की कमी है।
2022 – शिक्षा क्षेत्र को 1,04,277.72 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो 2021 से काफी अधिक है। विभिन्न अन्य आवंटनों के अलावा शिक्षक प्रशिक्षण, केवीएस और एनवीएस पर ध्यान केंद्रित किया गया।
2023 में शिक्षा बजट – शिक्षा मंत्रालय को 1,12,899.47 करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जो पिछले वर्ष से 13 प्रतिशत की वृद्धि है। 2023 के बजट का उद्देश्य अनुसंधान कार्यक्रम शुरू करना, अनुसंधान केंद्र स्थापित करना, नए नर्सिंग कॉलेज स्थापित करना है।
2024-25 – शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये का आवंटन किया गया।
चलिए जानते है इस वर्ष बजट से क्या उम्मीदें हैं?
आम बजट में विद्यार्थियों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और अन्य शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी श्रेणियों के लिए कई उम्मीदें बंधी हैं। पिछले कुछ वर्षों में, मोदी सरकार ने शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास के लिए बजट आवंटन में लगातार वृद्धि की है। 2024 के बजट में शिक्षा के लिए 1.48 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए, जिनमें से 73,498 करोड़ रुपये स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग को मिले थे।
पीएम विद्यालक्ष्मी योजना: छात्र लोन का समर्थन
2024 के केंद्रीय बजट में उच्च शिक्षा के लिए 10 लाख रुपये तक के लोन पर वित्तीय सहायता देने की घोषणा की गई थी। इस योजना के तहत छात्रों को बिना गारंटर के एजुकेशन लोन मिलेगा और किसी संपत्ति को गिरवी रखने की आवश्यकता नहीं होगी। इसे लागू करने के लिए एक नया पोर्टल भी तैयार किया गया है, और इस योजना से लगभग 22 लाख छात्र हर साल लाभान्वित हो सकते हैं।
वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन: शोध और नवाचार को बढ़ावा
शोध और इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नवंबर 2024 में ‘वन नेशन वन सब्सक्रिप्शन’ (ONOS) योजना की शुरुआत की घोषणा की। इस योजना का उद्देश्य देशभर के सरकारी उच्च शिक्षा संस्थानों के 1.8 करोड़ छात्रों, शिक्षकों, शोधकर्ताओं और वैज्ञानिकों को एक साथ जोड़ना है। इस पहल के लिए 6000 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है।
शिक्षा के सस्ते होने की उम्मीद
कई छात्र सोशल मीडिया पर बजट से जुड़ी अपनी उम्मीदें जाहिर कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस बजट में शिक्षा को सस्ता बनाने के लिए खास कदम उठाए जाएं, ताकि वे बिना किसी आर्थिक दबाव के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें।
शिक्षा के लिए बजट आवंटन में वृद्धि
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में शिक्षा के बजट में वृद्धि हुई है, लेकिन डिजिटल युग और रोजगार क्षेत्र की नई जरूरतों को ध्यान में रखते हुए आवंटन में और वृद्धि की आवश्यकता महसूस हो रही है। उच्च गुणवत्ता वाली शिक्षा का प्रावधान न सिर्फ व्यक्तिगत विकास के लिए, बल्कि देश की आर्थिक प्रगति के लिए भी जरूरी है।
डिजिटलीकरण पर जोर
2025 के बजट में शिक्षा के डिजिटलीकरण पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है, खासकर महामारी के बाद ऑनलाइन शिक्षा की बढ़ती लोकप्रियता को देखते हुए। इस बार की योजना में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP 2020) को और प्रभावी बनाने के लिए कुछ कदम उठाए जा सकते हैं।


