
मानसून की पहली वर्षा में ही त्राहिमाम मच गया। लाखों नहीं, करोड़ों नहीं, अरबों नहीं, बल्कि खरबों रूपयों का नुकसान हो गया। इतना ही नहीं बल्कि इस बाढ़ में हमारी अर्थव्यवस्था भी डूब गई है। कई प्रदेशों में स्थिति कितनी खतरनाक और जानलेवा हो गई, यह किसी से छिपी हुई बात नहीं है। पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश में बाढ़ ने विकराल रूप धारण कर लिया है। देश की राजधानी दिल्ली में ही वर्षा से जनता त्राहिमाम कर रही है। यमुना नदी खतरे के निशान को चुनौती दे रही है। दिल्ली में बाढ़ से हजारों लोग सुरक्षित स्थान पर जाने के लिए विवश हैं। उत्तराखंड में तो कई सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सड़कें और पुल बह गए हैं, जिसके कारण सामरिक रूप से जरूरी संपर्क टूट गए हैं। हिमाचल प्रदेश की स्थिति तो बहुत ही खतरनाक है, जहां पर 15सौ से अधिक सड़कें क्ष्तिग्रस्त हो गर्इं हैं और चौदह सौ बस रूटें पूरी तरह से बंद कर दी गई हैं, भूस्खलन से कई गांवों का अस्तित्व ही मिट गया है।