- वोटर्स के लिए खूब चल रहे भंडारे, कट रही मौज
- शराब के शौकीनों की निकल पड़ी लाटरी
जनवाणी संवाददाता |
फलावदा: विधानसभा चुनाव में वोटरों को आकर्षित करने के लिए अवभागत का सिलसिला शुरू हो गया है।उम्मीदवारों के लिए खुले वोटर सेवा शिविर में चाय पानी के साथ हजारों लोगों के मुफ्त खाने और पीने पिलाने का माकूल बंदोबस्त चल रहा है। शराब के शौकीनों और मुफ़्तखोरों की लाटरी निकल पड़ी है।
विधानसभा चुनाव प्रचार अभियान चरम पर पहुंच चुका है। प्रत्याशी वोटरों को लुभाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। प्रत्याशी लोगों का मुंह देख कर बयान बाजी कर रहे हैं।कहीं धर्म की तो कहीं बिरादरी की दुहाई देकर वोट बटोरने की कवायद हो रही है। मतदाताओं को आकर्षित करने के लिए भगत के प्रबंध किए गए हैं।
कई स्थानों पर चल रहे भंडारे मुफ्त खोर के लिए मौज मस्ती के अड्डे बने हुए हैं। बताया जा रहा है कि मतदाताओं के लिए कहीं चाय और पकौड़ी तो कहीं मुफ्त खाने के साथ अंग्रेजी शराब परोसने का भी इंतजाम है। चुनावी बयार में प्रत्याशियों की ओर से चल रही खातिरदारी से फायदा उठाने की होड़ लगी हुई है।
आलम यह है कि हार जीत को लेकर संशय की स्थिति में चल रहे मतदाता सभी प्रत्याशियों के सत्कार का फायदा उठा रहे हैं। प्रत्याशियों की नजर में चढ़ने के लिए काफी लोग सुबह शाम ठिकाने बदल रहे हैं। बटन किसी भी निशान पर दबे, लेकिन फिलहाल मुफ्तखोर मतदाता किसी भी प्रत्याशी की खातिरदारी छोड़ना नहीं चाहते।
चुनाव में फलावदा के वोटर ही पी गए थे 10 टायरा गाड़ी शराब
राजनीति का स्वरूप इतना बदल गया है कि पांच साल तक जनप्रतिनिधियों के पीछे दौड़ने वाले वोटर अब चुनाव में प्रत्याशियों की नाक रगड़वाने में कसर नहीं छोड़ते। वोट का झांसा देकर नेताओं को भानात्मक तरीके से ब्लैक मेल करने वाले फलावदा के वोटर पिछले विधानसभा चुनाव में 10 टायरा गाड़ी शराब पी गए थे।
होली के मौके पर हथियाई गई चुनावी शराब से दीपावली तक मस्ती ली गई। कस्बे व आसपास के गांवों में चुनावी शराब चुनाव को रंगीन बना रही है। चुनाव में वोट बटोरने के नाम पर वोटों के कुछ ठेकेदार शराब से सराबोर हो रहे है। कस्बे में शराब के मुफ्त खोर शौकीनों का आलम ये है कि पिछले विधानसभा चुनाव में एक प्रत्याशी को आॅन डिमांड वोटरों के लिए 10 टायरा गाड़ी शराब उतरवाई गई थी।
चुनाव के बाद खुद प्रत्याशी ने इस बात का खुलासा किया था। इस चुनावी शराब से होली से लेकर दीपावली तक मौज कटी गई थी। कस्बे में होने वाली शराब की खपत से विधानसभा क्षेत्र में होने वाले शराब के खर्च का अंदाजा लगाना सहज है। पिछले चुनाव के दौरान अन्य स्थान पर पुलिस द्वारा पकड़ी गई शराब की खेप खुद पुलिस ने एक असरदार नेता को चुनाव में प्रयोग को गिफ्ट कर दी थी।
चुनाव से अंग्रेजी ठेके की सेल प्रभावित हुई है। जबकि देसी शराब की बिक्री में इजाफा बताया जा रहा है। ठेके से देशी शराब बोरे भर-भरकर गांवों में पहुंच रही है। बाइक द्वारा शराब की सप्लाई की जा रही है। शराब के ठेके पर सेल के आंकड़े से साफ है कि चुनाव को रंगीन बनाने में दूसरे राज्य की अंग्रेजी शराब अधिक इस्तेमाल की जा रही है।

