नमस्कार, दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। सनातन धर्म में सभी त्योहारो को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। इनमें से ही एक गणेश जयंती का पर्व भी है। इस पर्व को विशेष रूप से महाराष्ट्र और कोंकण के तटीय क्षेत्रों में बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के उपलक्ष में मनाया जाता है। भारत के विभिन्न क्षेत्रों में इसे अलग-अलग समय पर मनाने की परंपरा है। महाराष्ट्र और कोंकण में यह उत्सव माघ माह की शुक्ल चतुर्थी को मनाया जाता है, जबकि अन्य स्थानों पर इसे भाद्रपद मास की गणेश चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है।
महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। वे बुद्धि, समृद्धि और विघ्न-विनाशक के रूप में पूजे जाते हैं। माना जाता है कि गणेश जयंती के दिन विधि-विधान से पूजा करने और व्रत रखने से भक्तों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। साथ ही उनके जीवन से सभी प्रकार की बाधाएं दूर हो जाती हैं। इस दिन भगवान गणेश की पूजा करने से मानसिक शांति, सुख और समृद्धि की प्राप्ति होती है।
तिथि और पूजा मुहूर्त
इस साल माघ माह की शुक्ल चतुर्थी तिथि का प्रारम्भ 1 फरवरी 2025 को सुबह 11:38 बजे से होगा और समापन 2 फरवरी 2025 को सुबह 09:14 बजे होगा। ऐसे में 1 फरवरी को ही गणेश जयंती का उत्सव मनाया जाएगा। इस दौरान गणेश पूजा शुभ मुहूर्त सुबह 11:38 बजे से 01:40 बजे तक रहेगा। यानी पूजा के लिए कुल 02 घण्टे 02 मिनट का समय मिलेगा।
पूजा विधि
गणेश जयंती के अवसर पर प्रातःकाल स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पूजा स्थल को शुद्ध करें और एक चौकी पर लाल या पीले कपड़े को बिछाकर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित करें। पूजा से पहले संकल्प लें और भगवान गणेश को फल, फूल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें। भगवान गणेश को मोदक, लड्डू और तिल से बनी मिठाइयों का भोग लगाएं। इसके बाद विधिपूर्वक पूजा करने के बाद गणेश जी की आरती करें और मंत्रों का जाप करें। व्रत करने वाले भक्त फलाहार कर सकते हैं और पूरे दिन भगवान गणेश के ध्यान में लीन रहते हैं। इसके बाद संध्या के समय फिर से स्नान करके गणेश जी की पूजा करें। रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का समापन करें।
गणेश जयंती के शुभ मंत्र
गणेश जयंती के दिन विशेष मंत्रों का जाप करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कुछ महत्वपूर्ण मंत्र इस प्रकार हैं
गजाननं भूतगणादि सेवितं, कपित्थ जम्बूफलचारु भक्षणम्।
उमासुतं शोकविनाशकारकं, नमामि विघ्नेश्वर पादपङ्कजम्॥
ॐ गं गणपतये नमः
इन मंत्रों का जप करने से बुद्धि, ज्ञान और समृद्धि की प्राप्ति होती है और जीवन की बाधाएं समाप्त होती हैं।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, माता पार्वती ने भगवान गणेश को माघ शुक्ल चतुर्थी के दिन अपने उबटन से उत्पन्न किया था। इसी कारण, इस दिन स्नान करके भगवान गणेश की मूर्ति की स्थापना कर उन्हें विधिपूर्वक पूजने की परंपरा प्रचलित है। इस दिन श्रद्धा और भक्ति के साथ गणेश जी की आराधना करने से सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं।

