जनवाणी संवाददाता |
हस्तिनापुर: मिशन क्लीन गंगा के तहत 2012 में शुरू हुई मेरी गंगा मेरी सूस एक सप्ताह पूर्व बिजनौर बैराज से शुरू डॉल्फिन गंगा अभियान का सोमवार को नरोरा पर हुआ। पांच दिन तक डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग द्वारा चलाए गए संयुक्त अभियान में गंगा में लगातार बढ़ रही डॉल्फिन की संख्या के बाद खुशी का इजहार किया।
विश्व में पाई जाने वाली दुर्लभ डॉल्फिन की प्रजातियों में से एक प्रजाति गंगा में निवास करती है। जिसका वर्णन पौराणिक ग्रंथों व ऐतिहासिक पुस्तकों में है। गंगा से विलुप्त होती इस प्रजाति को बचाने के लिए 2012 में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ व वन विभाग द्वारा संयुक्त रूप से गंगा नदी में डॉल्फिन संवर्धन व संरक्षण की शुरूआत की गई।
जिसमें विलुप्त होती प्रजाति को बचाने के साथ इनको संवर्धन किए जाने पर विशेष जोर दिया गया। अभियान के कोआॅर्डिनेटर शाहनवाज खान ने बताया कि 2012 में बचाना सूस की जान है, गंगा मेरा सम्मान है की शुरूआत की गई थी। इससे पूर्व 2009 में डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया।
पर्यावरण वन एवं जलवायु के संवर्धन एवं संरक्षण के लिए डॉल्फिन का संबोधन बेहद जरूरी था। 2012 में शुरू की गई डॉल्फिन की गणना के बाद डॉल्फिन की संख्या में लगातार इजाफा हुआ, 2015 में डॉल्फिन की गणना के बाद गंगा में महज 22 डॉल्फिन मिली। माही 2020 में पांच दिन तक चली गणना में इनकी संख्या बढ़कर 41 हो गई।
सावक डॉल्फिन दिखाई देने से खिले टीम के चेहरे
परियोजना अधिकारी संजीव यादव ने बताया की रविवार देर शाम समाप्त हुई गणना में बिजनौर बैराज से लेकर नरोरा तक 37 डॉल्फिन और चार सावक डॉल्फिन मिली वहीं 2012 में गंगा में लगभग दो दर्जन डॉल्फिन बची थी।
गंगा को रखती है स्वच्छ
वैज्ञानिकों के अनुसार गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन दुर्लभ प्रजाति की होने के साथ गंगा को स्वच्छ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका रखती है। मीठा पानी पसंद करने वाली डॉल्फिन नियमित गंगा सफाई कर्मियों भी मानी जाती है। डॉल्फिन गंगा में आने वाले अवशेषों और गंदगी को अपना आहार बनाती है।
है नेत्रहीन, लेकिन समझदार
वैज्ञानिकों के मत के अनुसार गंगा में पाई जाने वाली डॉल्फिन नेत्रहीन होती है, लेकिन अपनी ध्वनि तरंगों के कारण बेहद समझदार होती है। कई बार अपनी ध्वनि तरंगों के कारण ये नेत्रहीन स्तनधारी जीव इंसान से भी अधिक समझदारी का परिचय देता है और डूबते इंसान तक को बचा लेता है। स्वच्छता के प्रहरी डॉल्फिन में इससे भी अधिक कई और खूबियां हैं।
प्रतिवर्ष बढ़ा डॉल्फिन का आंकड़ा
बेहद समझदार राष्ट्रीय जलीय जीव डॉल्फिन की गंगा में लगातार बढ़ रही आमद बेहद खुशी की बात है। कोआॅर्डिनेटर शाहनवाज खान ने बताया कि 2015 में गंगा में डॉल्फिन की संख्या महज 22 थी तो 2016 में बढ़कर 30 हो गई। जहां 2017 में डॉल्फिन की संख्या 32 हुई तो वही 2020 आते-आते डॉल्फिन की संख्या गंगा में बढ़कर 40 हो गई।

