
भारत में खाद्य तेल की समस्या है। हम इसका पर्याप्त उत्पादन नहीं करते हैं। इसका 70 फीसदी से अधिक विदेशों से आता है। क्या यह किसी संस्था या संघ को मानव स्वास्थ्य की कीमत पर आत्मनिर्भर बनने का अधिकार देता है? हमें याद रखना चाहिए कि हम 1995-96 तक खाद्य तेल में आत्मनिर्भर थे। फिर हमारे सिस्टम में ऐसा क्या गलत है, जिसने हमें इस क्षेत्र में विकलांग बना दिया है? इसमें कोई संदेह नहीं है कि खाद्य तेल क्षेत्र में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए सोचने और कार्रवाई करने का समय आ गया है, लेकिन क्या जीएम (जेनेटिकली मॉडिफाइड) सरसों ही इसका एकमात्र जवाब है? इसका उत्तर बड़ा नहीं है।