नमस्कार,दैनिक जनवाणी डॉटकॉम वेबसाइट पर आपका हार्दिक स्वागत और अभिनंदन है। इस साल 2025 में सोने ने महज 90 दिनों में 12 फीसदी ही मुनाफा दिया है। दरअसल,इस साल सोने की कीमतों में काफी वृद्धि हुई है, जो एक वैश्विक तनाव और व्यापारिक टैरिफ के चलते हो रही है। बता दें कि, एक जनवरी को 10 ग्राम सोने के भाव 79,390 रूपये था जो कि अब 92,150 रूपये हो गया है।
दरअसल, 2025 के पहले तीन महीनों में सोने की कीमतों ने नई ऊंचाइयां छुई हैं, और अब यह एक वर्ष में 37% तेजी के साथ 3106 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गया है। इसका मुख्य कारण वैश्विक आर्थिक स्थिति, देशों के बीच बढ़ता तनाव, और अन्य वित्तीय अनिश्चितताएं हैं। तो चलिए इसके बारे में डिलेट से जानते हैं..
वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक तनाव: हाल के महीनों में व्यापारिक युद्ध, राजनीतिक अस्थिरता और वैश्विक संकटों जैसे उधारी संकट, महामारी के बाद की अस्थिरता आदि ने निवेशकों को सोने में सुरक्षित निवेश की ओर आकर्षित किया है। सोने को एक “सुरक्षित आश्रय” के रूप में माना जाता है, खासकर जब बाजारों में उथल-पुथल हो।
महंगाई और मुद्रा अवमूल्यन: वैश्विक स्तर पर महंगाई दर में वृद्धि और डॉलर जैसी प्रमुख मुद्राओं के अवमूल्यन ने भी सोने की कीमतों को बढ़ावा दिया है। जब मुद्राएं कमजोर होती हैं, तो सोने की कीमतें आमतौर पर बढ़ती हैं क्योंकि लोग अपने धन को सुरक्षित रखने के लिए सोने का सहारा लेते हैं।
निवेशकों की मांग: सोने में निवेश की मांग में बढ़ोतरी हुई है, क्योंकि यह एक स्थिर और दीर्घकालिक निवेश माना जाता है। इसके अलावा, केंद्रीय बैंकों ने भी अपने गोल्ड रिजर्व को बढ़ाना शुरू किया है, जो सोने की कीमतों पर दबाव बना रहा है।
फेडरल रिजर्व और ब्याज दरों का प्रभाव: अमेरिका के केंद्रीय बैंक (फेडरल रिजर्व) द्वारा ब्याज दरों में बढ़ोतरी की संभावना के बीच सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव आया है। हालांकि, जब ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो सोने की कीमतों में आमतौर पर गिरावट हो सकती है, लेकिन अगर बाजार में अनिश्चितता बनी रहती है तो सोने की कीमतें बढ़ती हैं।
इस स्थिति में, सोने की कीमतों का 3106 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचना दर्शाता है कि वैश्विक निवेशक अब सोने को एक महत्वपूर्ण और सुरक्षित निवेश मान रहे हैं।
अब जानते हैं कि क्या इससे आगे सोने की कीमतें और बढ़ सकती हैं?
सोने की कीमतों का भविष्य काफी हद तक वैश्विक आर्थिक, राजनीतिक और वित्तीय माहौल पर निर्भर करेगा। यदि वैश्विक तनाव और मुद्राओं के अवमूल्यन की स्थिति बनी रहती है, तो सोने की कीमतों में और वृद्धि हो सकती है।