जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: ब्रिटेन और महारानी एलिजाबेथ द्विीय का भारत से गहरा नाता रहा है। वे 70 साल के अपने महारानी काल में तीन बार भारत आई थीं। उनकी देश के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहर लाल नेहरू से लेकर इंदिरा गांधी और आईके गुजराल व समकालीन राष्ष्ट्रपतियों डॉ. राजेंद्र प्रसाद, ज्ञानी जेल सिंह और केआर नारायणन से भी मुलाकातें हुई। पीएम नरेंद्र मोदी 2018 में लंदन में उनसे मिले थे।
महारानी एलिजाबेथ पहली बार 21 जनवरी 1961 को भारत दौरे पर आई थीं। तत्कालीन पीएम पं. जवाहरलाल नेहरू और तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद दिल्ली के पालम एयरपोर्ट पर उनका स्वागत करने पहुंचे थे। वह डॉ. राजेंद्र प्रसाद के न्यौते पर गणतंत्र दिवस परेड में शामिल होने आई थीं।
महारानी के साथ उनके पति स्व. प्रिंस फिलिप भी आए थे। रॉयल दंपती ने दिल्ली के अलावा मुंबई, चेन्नई व कोलकाता तथा आगरा के प्रसिद्ध ताजमहल का दौरा किया था। दिल्ली में उन्होंने राजघाट जाकर राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी थी। तब महारानी ने दिल्ली के रामलीला मैदान में हजारों लोगों की सभा को भी संबोधित किया था।
एलिजाबेथ द्वितीय की दूसरी भारत यात्रा 7 नवंबर 1983 को हुई थी। तब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और तत्कालीन राष्ट्रपति ज्ञानी जेल सिंह ने उनका स्वागत किया था। इसी दौरान उन्होंने मदर टेरेसा को मानद सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द मेरिट‘ प्रदान किया था। तब वे राष्ट्रमंडल देशों के सम्मेलन में भाग लेने दिल्ली आई थीं।
दिवंगत महारानी इसके बाद 13 अक्टूबर 1997 को तीसरी बार भारत आई थीं। तब तत्कालीन पीएम इंद्र कुमार गुजराल और तत्कालीन राष्ट्रपति केआर नारायणन ने उनका स्वागत किया था। इसी दौरान शाही दंपती ने आजादी के आंदोलन के दौरान हुए जलियांवाला बाग हत्याकांड का जिक्र करते हुए उसे दुखद बताया था। इसके बाद महारानी और उनके प्रिंस फिलिप ने जलियांवाला बाग स्मारक जाकर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की थी।
महारानी एलिजाबेथ द्वितीय से पीएम नरेंद्र मोदी ने 2015 और 2018 में अपनी ब्रिटेन यात्रा के दौरान मुलाकात की थी। पीएम ने उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए कहा है कि वह उनकी गर्मजोशी और दयालुता को नहीं भूलेंगे। बकौल पीएम महारानी ने एक मुलाकात के उन्हें वह रूमाल दिखाया था, जो महात्मा गांधी ने उन्हें उनकी शादी में उपहार में दिया था।
महारानी एलिजाबेथ ने भारत में उनके गर्मजोशीपूर्ण स्वागत सत्कार की खूब तारीफ की थी। उन्होंने अपने एक संबोधन में कहा था कि भारतीयों की गर्मजोशी और आतिथ्य भाव के अलावा भारत की समृद्धि और विविधता हम सभी के लिए एक प्रेरणा रही है।

