
महिला सुरक्षा व संरक्षण के जितने दावे हमारे देश में किए जाते हैं, उतने किसी देश में नहीं किए जाते। इसी तरह जितना धार्मिक होने का दिखावा हमारे देश में किया जाता है,धर्म व अध्यात्म की जितनी चर्चा हमारे देश में की जाती है शायद अन्यत्र कहीं नहीं होती। परंतु इसके विपरीत पूरे देश में उतना ही अधिक अधर्म व्याप्त नजर आता है। कोई क्षेत्र कोई संस्था कोई विभाग ऐसा नहीं जहां नारी का अपमान न होता हो। देश के लाखों मंदिरों मस्जिदों व अन्य सभी धर्मस्थलों से भजन कीर्तन आरती अजान भजन शब्द प्रेयर आदि की आवाजें सुनाई देती हैं। विभिन्न धर्मों व समुदायों के धार्मिक जुलूस सड़कों पर उतर कर अपने धार्मिक होने का प्रदर्शन करते रहते हैं। कन्याओं की पूजा भी शायद हमारे देश के सिवा और कहीं नहीं की जाती। देवियों की परिकल्पना भी शायद सिर्फ हमारे ही देश में की गयी है।
हकीकत तो बिल्कुल इससे विपरीत है। नारी शोषण तथा नारी अत्याचार की जितनी घटनाएं बल्कि जितनी घिनौनी और वीभत्स घटनाएं हमारे देश में होती हैं उतनी कहीं नहीं होतीं। और इससे भी शर्मनाक बात यह कि दुष्कर्मियों व हत्यारों को सत्ता का संरक्षण मिलते हुए भी देखा जा सकता है। पिछले दिनों तो ऐसी अनेक घटनाएं देश में घटीं जिन्हें सुनकर यह सोचने के लिये मजबूर होना पड़ा कि जब संभ्रांत व अभिजात वर्ग की महिलाओं का यह हाल है, वे तक सुरक्षित नहीं फिर आखिर साधारण परिवार की या गरीब घरों की कन्याओं की सुरक्षा की बात कैसे सोची जा सकती है? कोलकाता में गत अगस्त माह में आरजी कर मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ उसी अस्पताल के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा पहले दुष्कर्म किया गया उस के बाद उसकी हत्या कर दी गई।
इसी प्रकार 15 सितंबर को एक सैन्य अधिकारी की मंगेतर के साथ ओडिशा के भुवनेश्वर स्थित भरतपुर पुलिस स्टेशन में पहले बदसलूकी की उसका यौन-उत्पीड़न किया, फिर आर्मी आॅफिसर को लॉकअप में बंद कर दिया। हद तो यह है कि पीड़िता के अनुसार थाने में मौजूद पुलिस अधिकारी ने पहले उसके हाथ-पैर बांधे फिर उसके कपड़े उतारे उसके बाद एक पुरुष पुलिस अधिकारी ने उनके अंडरगारमेंट उतारे, फिर छाती पर लातें मारीं। उसके बाद जब थाने में इंस्पेक्टर-इन-चार्ज पहुंचा तो उसने पीड़ित की पैंट नीचे कर उसे अपना प्राइवेट पार्ट दिखाया और अश्लील बातें कीं। हालांकि इस मामले के हाई प्रोफाइल हो जाने के बाद 5 पुलिसकर्मी सस्पेंड होने की खबर जरूर है परन्तु इस सवाल से कैसे मुंह मोड़ा जा सकता है कि एक शिक्षित महिला अपने सैन्य अधिकारी मंगेतर के साथ जब सुरक्षित नहीं फिर आखिर साधारण महिलाओं की इज्जत आबरू की कौन सी गारंटी? खबर यह भी है कि इस घटना के बाद सेना में भी रोष पैदा हो गया था।
याद कीजिए गत वर्ष 30 अगस्त को एक बावर्दी महिला कांस्टेबल खून से लथपथ हालत में अयोध्या स्टेशन के करीब सरयू एक्सप्रेस में बर्थ के नीचे छुपी मिली थी। यानी चलती ट्रेन में दुस्साहसी अपराधियों ने उसकी वर्दी की परवाह किए बिना उसपर हमला बोल दिया था। बाद में पुलिस द्वारा दावा किया गया कि घटना के 20 दिन बाद ही आरोपी को यूपी पुलिस ने एनकाउंटर में मार गिराया। इसी तरह विभिन्न सरकारी कार्यालयों से खबरें आती हैं कि कार्यालय के वरिष्ठ या दबंग किस्म के लोग अपनी अधीनस्थ महिला कर्मियों को अपनी हवस का शिकार बनाते हैं। उत्तर प्रदेश के पी डब्ल्यू डी विभाग का ऐसा ही एक मामला तो इस वक़्त काफी चर्चित हो गया है जिसमें सह कर्मचारियों द्वारा एक महिला को डरा धमकाकर कई बार दुष्कर्म किया गया। वह गर्भवती हो गयी और कोविड के दौरान उसकी मौत भी हो गयी।
धर्मस्थान व धर्मगुरु तो नारी शोषण को लेकर तो कुछ ज्यादा ही चर्चा में रहते हैं। कहीं मंदिर में दुष्कर्म की खबरें आती हैं। कहीं कोई पुजारी पकड़ा जाता है। हद तो यह है कि पिछले दिनों अयोध्या के नवनिर्मित राम जन्म भूमि मंदिर में वहां की एक सफाई कर्मी महिला के साथ वहां कार्यरत लोगों द्वारा दुष्कर्म किए जाने की खबर आ गयी। उससे अधिक पवित्र,सुरक्षित व सम्मानित स्थान और किसे कहा जाए? कुछ समय पूर्व गाजियाबाद जिले में पड़ने वाली गंग नहर के किनारे स्थित एक मंदिर में वहां के महंत द्वारा महिलाओं के कपड़े बदलने वाले हिस्से में एक गुप्त कैमरा लगाया गया था। इस कैमरे को महंत अपने मोबाइल फोन में देखता रहता था।
मध्य प्रदेश के इंदौर में तेजाजी नगर के एक मंदिर में एक पुजारी के घिनौने कृत्य का पदार्फाश हुआ। यहां एक 35 वर्षीय पुजारी ने एक 21 साल की युवती के साथ मंदिर में बने कमरे में ही दुष्कर्म कर डाला। इतना ही नहीं बल्कि पुजारी ने दुष्कर्म करने के बाद न केवल युवती को धमकाया बल्कि वह युवती के पिता पर इस बात के लिए दबाव भी बनाया करता था कि वह अपनी बेटी को रोज मंदिर भेजा करे। देश के किसी न किसी कोने से आए दिन ऐसी कई घटनाएं रोज होती रहती हैं। यहां तक कि मासूम किशोरियों को भी भेड़िये मानसिकता के लोग नहीं बख़्शते। दरअसल जहां लोगों की विकृत मानसिकता इन घटनाओं के लिए जिम्मेदार है वहीं दुष्कर्मियों को मिलने वाला सत्ता का प्रश्रय व सहयोग भी इसके लिए कम जिम्मेदार नहीं। कहीं आजीवन कारावास काट रहे किसी हत्यारे दुष्कर्मियों को अपने राजनैतिक लाभ के लिए चार साल में रिकार्ड 15 बार पेरोल दे दी जाती है तो कहीं सामूहिक दुष्कर्मियों व हत्यारों को सत्ता द्वारा चरित्र प्रमाण पत्र देकर जेल से रिहा करवा दिया जाता है। महिला सुरक्षा को लेकर सरकार जो चाहे दावे करे या अपनी पीठ थपथपाये परन्तु सच तो यही है कि दर्पण कभी भी झूठ नहीं बोलता।


