जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: ग्रीन बेल्ट में ध्वस्तीकरण अभियान अभी ओर भी चलेगा। इसके संकेत एमडीए उपाध्यक्ष मृदुल चौधरी ने दिये हैं। उनका कहना है कि ग्रीन बेल्ट को पूरी तरह से अवैध कब्जों से मुक्त कर दिया जाएगा। इसके लिए सूची मांगी गई हैं, जिसके बाद फिर से ग्रीन बेल्ट में किये गए अवैध निर्माण पर व्यापक स्तर पर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। यह कार्रवाई होली के बाद संभव होगी।
हालांकि पंचायत चुनाव में फोर्स मिल पाएगी, ऐसा मुश्किल ही नजर आ रहा है, लेकिन फिर भी फोर्स की मांग करने के बाद ग्रीन बेल्ट में कार्रवाई की जाएगी।
बागपत बाइपास सर्विस रोड पर ‘रोड वाइडिंग’ व ग्रीन बेल्ट में मंडप तक बना रखे हैं, जिनको एमडीए इंजीनियर नहीं हटा पा रहे हैं। इसकी शिकायत भी की गई हैं, एमडीए की सूची से मंडप ध्वस्तीकरण का मामला गायब है। हालांकि एमडीए उपाध्यक्ष मृदुल चौधरी ने शुक्रवार को जनवाणी के साथ हुई बातचीत में कहा है कि ग्रीन बेल्ट व रोड वाइडिंग को खाली कराना उनकी प्राथमिकता है।
इसके लिए सूची और भी तैयार की जा रही है, ताकि ग्रीन बेल्ट को पूरी तरह से क्लीन किया जा सके। ढाबे, दुकान व जो मकान ग्रीन बेल्ट में बने है, उन्हें भी गिराया जाएगा। जानकारी मिली है कि सुभारती सर्विस रोड से बागपत बाइपास पर जाने वाले रास्त पर अवैध तरीके से मंडप भी बना हुआ हैं, जिसका कोई मानचित्र भी स्वीकृत नहीं है। ग्रीन बेल्ट व रोड वाइडिंग में ये यह मंडप बना हुआ है।
इसके खिलाफ भी इंजीनियरों को कार्रवाई करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा बाइपास पर ही मंडप के अलावा ओयो होटल भी ग्रीन बेल्ट में चल रहे हैं, जिनके खिलाफ अभी कार्रवाई बाकी हैं। इनको नोटिस देकर ध्वस्तीकरण की कार्रवाई प्रस्तावित है।
एनएच-58 के दोनों तरफ ग्रीन बेल्ट हैं, लेकिन इसमें ज्यादातर स्थानों पर निर्माण कर दिये गए हैं। ग्रीन बेल्ट भी एमडीए सुरक्षित नहीं रख पाया हैं, जिसको लेकर एमडीए वीसी ने कहा कि ग्रीन बेल्ट में कार्रवाई होना तय है। देर सबेर हो सकती हैं, मगर ग्रीन बेल्ट में कार्रवाई नहीं रुकेगी।
अवस्थापना निधि में नहीं मिल रहा पैसा
अवस्थापना निधि से एमडीए को बड़ी आर्थिक मद्द मिलती थी। शहर के बड़े-बड़े कार्य अवस्थापना निधि से ही कराये जाते थे। बोर्ड बैठक में भी इसके लिए विशेष तौर पर प्रस्ताव लाकर विकास कार्य कराये जाते थे, लेकिन दुर्भाग्य पूर्ण बात यह है कि पिछले तीन वर्षों से एमडीए को अवस्थापना निधि का पैसा नहीं मिल रहा है। इस तरह से शहर में एमडीए विकास कार्य भी नहीं करा पा रहा है।
यह एमडीए को बड़ा झटका लगा है। क्योंकि एमडीए शहर में सौंदर्यकरण हो या फिर सड़क के निर्माण समेत कई बड़े काम इसी निधि से कराये जाते थे। कलेक्टर के आवास के चारों तरफ जो सड़क चौड़ीकरण किया गया फिर नये तरीके से डिवाइडर बनाकर सड़क तैयार की गई, यह भी अवस्थापना निधि से छह वर्ष पहले तैयार की गई थी। बता दें, कलेक्टर आवास के आसपास पहले इतनी चौड़ी सड़क नहीं थी।
नहीं इसके सामने डिवाइडर ही था। इसके लिए तत्कालीन डीएम पंकज यादव ने सड़क चौड़ी करने के लिए अपने आवास में से चार से पांच मीटर जमीन दी हैं, जिसके बाद ही सड़क का चौड़ीकरण एमडीए ने किया था। इस पूरा खर्च अवस्थापना निधि से ही किया गया।
इस तरह से बड़े-बड़े काम अवस्थापना निधि से ही किये जाते थे, लेकिन फिलहाल इस पर ब्रेक लग गया है। वह भी पिछले तीन वर्षों से। एक पैसा भी अवस्थापना निधि से एमडीए को नहीं मिला है। इस तरह से शहर के विकास के लिए दिक्कत पैदा हो गयी है। एमडीए के पास भी ज्यादा धनराशि नहीं है, यही वजह है कि एमडीए अवस्थापना निधि से काम कराता रहता था। एमडीए की आर्थिक स्थिति भी बेहतर नहीं हैं, जिसके चलते जनहित के कार्य नहीं हो पा रहे हैं।
पीएम आवास के लिए नहीं मिल रही ग्रांट
प्रधानमंत्री आवास योजना को पूरा अब कई विभाग करेंगे। ऐसे में दिक्कत पैदा होना लाजिमी है। अब तक यूपी व केन्द्र सरकार से इस योजना के लिए धनराशि मिल रही थी, लेकिन आगे ऐसा नहीं होगा। पीएम आवास योजना की जिम्मेदारी पेयजल आपूर्ति के लिए पाइप लाइन बिछाने का काम सिंचाई विभाग या फिर जल निगम करेगा। सीवर लाइन भी जल निगम तैयार करेगा।
विद्युतीकरण का काम ऊर्जा निगम करेगा। एमडीए मकान बनाकर देगा। जमीन भी एमडीए की है। पहले यूपी व केन्द्र सरकार पीएम आवास बनाने के लिए पूरा पैसा दे रहा था, लेकिन फिलहाल सरकार ने रणनीति बदलते हुए यह तय कर दिया है कि पीएम आवास में जो भी काम होंगे, वो संबंधित विभाग ही करायेगा।
कई विभागों के पास पीएम आवास बनाने की जिम्मेदारी होने से अब यह आवास निर्माण का मामला लटक सकता है। क्योंकि इस दिशा में सिंचाई विभाग, पीडब्ल्यूडी, जल निगम समेत कई विभाग अपनी जिम्मेदारी नहीं निभा पा रहे हैं। अभी तक पीएम आवास के लिए काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है, जहां पर काम रुका हुआ था, वहीं पर रुका हुआ है। एमडीए जमीन दे चुका हैं।
निर्माण भी करा रहा हैं, लेकिन बाकी विभाग पीएम आवास प्रोजेक्ट को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। यही हाल रहा तो पीएम प्रोजेक्ट लटक सकता हैं। इसकी व्यवस्था को कमिश्नर सुरेन्द्र सिंह को अपने हाथ में लेना पड़ेगा, जिसके बाद ही पीएम आवास योजना आगे बढ़ सकती हैं।
दरअसल, पीएम आवास के करीब बीस हजार से ज्यादा लोग शहर में चिन्हित किये गए हैं, जो पात्र भी हैं। इसके अलावा भी लोगों ने पीएम आवास के लिए आवेदन किये हैं। पीएम आवास के मकान बड़ी तादाद में बनाये जा रहे हैं, लेकिन दूसरे चरण में ही शासन से इसके लिए किश्त नहीं दी जा रही है।

