Saturday, April 4, 2026
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गंदगी में खो गया ग्रीन वर्ज, जिम्मेदार कौन?

  • आवास विकास परिषद ने करोडों रुपये खर्च कर सवा किमी लंबी ग्रीन बेल्ट की थी तैयार

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: नगर निगम के वार्ड-48 में आवास विकास परिषद के द्वारा माधवपुरम में मेडा, नगर निगम, वन विभाग संयुक्त रूप से मिलकर दिल्ली रोड से माधवपुरम पुलिस चौकी के निकट तक करीब सवा किमी दूरी तक ग्रीन बेल्ट तैयार की थी। जिसमें दोनों तरफ के नालों के बीच 30 से 40 फीट चौडाई में पेड़-पौधे लगाये गये थे। साथ ही नालों को कवर्ड किया गया था, लेकिन निगम के द्वारा ग्रीन बेल्ट का रखरखाव नहीं करने पर वह पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है।

जिसमें वर्तमान में सवा किमी ग्रीन बेल्ट में नर्सरी अवैध रूप से संचालित की जा रही है और निगम के द्वारा कूड़ा डलवाया जा रहा है। कुछ जगह में नालों से जो दूषित पानी का रिसाव होता है। उससे जलभराव की समस्या खडी हो गई है। जो ग्रीन बेल्ट बच्चों के खेलने के लिये बनाई गई थी, वह कुछ ही वर्षों में बर्बाद हो चुकी है।

महानगर में आवास विकास के द्वारा कॉलोनी विकसित करने के दौरान ग्रीन बेल्ट भी तैयार की गई थी। जिसमें अधिकतर जगहों पर ग्रीन बेल्ट रखरखाव के अभाव में बर्बाद हो गई है। केवल नाम की ग्रीन बेल्ट हैं, धरातल पर पेड़-पौधे और वह खूबसूरती दिखाई नहीं देती, जो ग्रीन बेल्ट के नाम को सुनने से लगती है। इसमें दिल्ली रोड पर वार्ड-48 माधव पुरम में भी विगत वर्षों में आवास विकास परिषद के द्वारा सवा मीटर लंबी एवं 30 से 40 फीट चौड़ाई की जगह में ग्रीन बेल्ट तैयार की थी।

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यह ग्रीन बेल्ट आवास विकास ने नगर निगम एवं वन विभाग एवं एमडीए के संयुक्त सहयोग से मिलकर की थी। जिसमें इस ग्रीन बेल्ट के रखरखाव का जिम्मा नगर निगम का बताया गया, लेकिन वर्तमान में धरातल पर नाम की ही ग्रीन बेल्ट शेष बची है। यदि देखा जाये तो सवा किमी दूसरी में जो ग्रीन बेल्ट बनी थी। उसमें करीब 300 मीटर के क्षेत्र में तीन नर्सरी जोकि अवैध रूप से संचालित होना बताया जा रहा है।

वहीं करीब 500 मीटर दूरी के क्षेत्र में निगम के द्वारा कूड़ा डलवाया जा रहा है। इतना ही नहीं जो शेष जगह बची है, उसमें कुछ जगहों पर पेड़ तो खड़े हैं, लेकिन नालों से जो दूषित पानी का रिसाव होकर जलभराव के रूप में जमा है। उसमें मच्छर मक्खी पैदा होकर बीमारी का घर मुख्य कारण बन गये हैं। जिसमें माधवपुरम निवासी व्यापारी राकेश कुमार, उदित शर्मा, कमलेश, प्रशांत आदि का कहना है कि नगर निगम में इस कॉलोनी के रखरखाव के लिये कहा गया,

लेकिन सुध नहीं ली गई। ग्रीन बेल्ट के दोनो तरफ नालों का निर्माण किया गया था। जिसमें नालों को कवर्ड करने के लिये हुक वाले ढक्कन लगाये गये थे, लेकिन वह भी टूट-फूट गये। और वर्तमान में ग्रीन बेल्ट कम कूड़ाघर एवं दूषित पानी के जलभराव की समस्या से मानों ग्रीन बेल्ट पूरी तरह से बर्बाद हो गई हो।

जब भी माधवपुरम से ग्रीन बेल्ट की जगह पर कूड़ा आदि डालने की शिकायत मिलती है तो जांच कराकर कार्रवाई करा दी जाती है।

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वर्तमान में ग्रीन बेल्ट किस हालत में है, उसे दिखवाया जायेगा। -डा. हरपाल सिंह, प्रभारी मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी एवं पशु चिकित्सा कल्याण अधिकारी नगर निगम मेरठ

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