- तीसरे चुनाव में लगातार बसपा का फ्लॉप शो, एक भी सीट नहीं मिली
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जनपद में विधानसभा की सात सीट हैं। सातों सीट पर पिछले तीन चुनाव में यहां एक भी सीट पर बसपा का हाथी चिघांड नहीं भर पाया है। अबकी बार चुनाव परिणाम से भी बसपा को निराशा ही हाथ लगी और इसके साथ ही हाथी ने हार की हैट्रिक लगा दी है। यानी एक दशक बाद भी अपने प्रदर्शन में कोई सुधार बसपा नहीं कर सकी है और उसका लगातार फ्लॉफ शो जारी है।
गौरतलब है कि बसपा ने वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव में जिले की सात में से चार सीटों पर कब्जा किया था। उस समय दो रिजर्व सीट सिवालखास और हस्तिनापुर के साथ ही हाथी सरधना और खरखौदा में मस्त चाल चला था। उसके बाद से लगातार मेरठ में बसपा का ग्राफ गिरता ही चला जा रहा है। परिसीमन के बाद 2012 के चुनाव में मायावती की पार्टी को सत्ता में होने के बावजूद बुरी हार मिली थी और वह एक भी सीट यहां नहीं जीत पायी थी। हालांकि मेरठ दक्षिण, किठौर और मेरठ कैंट में उसके प्रत्याशी रनरअप रहे थे। जबकि सरधना, सिवालखास, शहर और हस्तिनापुर में तीसरे पायदान पर पार्टी पहुंच गई थी।
बसपा के लिए 2017 का चुनाव 2012 से भी ज्यादा निराशाजनक रहा था। इस चुनाव में पार्टी का वोट प्रतिशत भी पहले से कम हो गया था और फिर से सभी सीटों पर करारी हार झेलनी पड़ी थी। इस चुनाव में हस्तिनापुर सुरक्षित, मेरठ दक्षिण और कैंट सीट पर उसके प्रत्याशी दूसरे पायदान पर जरुर रहे थे, मगर वोट प्रतिशत के मामले में भारी गिरावट आ गई थी।
2022 का चुनाव बसपा के लिए सबसे बुरा साबित हुआ है इस बार हाथी की सवारी करने वाले प्रत्याशी की जीत तो बहुत दूर एक भी उम्मीदवार दूसरे नंबर तक नहीं पहुंच पाया। सबसे अधिक वोट मेरठ दक्षिण सीट पर बसपा के कुंवर दिलशाद अली को करीब 40 हजार मिले हैं। जबकि कैंट, शहर, सरधना, हस्तिनापुर में राष्ट्रीय पार्टी का प्रदर्शन सम्मानजक भी नहीं रहा है। सिवालखास और किठौर में हाथी ने 30 हजार के आसपास वोट तो लिए हैं, मगर वह मुकाबले से पूरे तरह बाहर रहे हैं।
सीट मिले वोट
किठौर 31213
सरधना 18075
सिवालखास 29850
हस्तिनापुर 14240
मेरठ शहर 4939
मेरठ कैंट 28519
मेरठ दक्षिण 39857

