- मई माह में लगातार चढ़ रहा पारा, लोग हुए घरों में कैद
जनवाणी संवाददाता |
मोदीपुरम: हीटवेव का रुख लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में गर्मी बढ़ने के कारण लोग बीमारी का शिकार हो गए हैं। पारा 42 डिग्री के पार पहुंच गया है। यह बढ़ती गर्मी जहां महिलाओं बच्चों और बुजुर्गों को परेशान कर रही है। वहीं, बढ़ती गर्मी के कारण लोगों ने घरों से निकलना भी बंद कर दिया है। एसी और कूलर भी इस तपती गर्मी में फैल हो गए हैं। बढ़ती गर्मी ने बाजारों और हाइवे की रौनक को भी समाप्त कर दिया है। दिन निकलते ही सूरज की तपिश के साथ प्रचंड गर्मी का रुख शुरू हो जाता है। धीरे-धीरे यह गर्मी दोपहर तक हाल बेहाल कर देती है।
जिसके चलते लोग डी-हाइडेÑशन का शिकार हो रहे हैं। अगर मौसम वैज्ञानिकों की माने तो उनका कहना है कि गर्मी का प्रकोप फिलहाल एक सप्ताह तक लगातार बढ़ेगा। हीटवेव के साथ गर्मी बढ़ेगी। क्योंकि यह गर्म हवाएं तापमान को बढ़ा रही है। लू के थपेड़ों के चलने से लोगों को परेशानी होती है और जिसके कारण लोग बीमारी का शिकार हो रहे हैं। राजकीय मौसम वैधशाला पर शनिवार को दिन का अधिकतम तापमान 42.0 डिग्री एवं न्यूनतम तापमान 27.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

अधिकतम आर्द्रता 46 एवं न्यूनतम आर्द्रता 28 प्रतिशत दर्ज की गई। लू के थपेड़े सुबह से लेकर शाम तक चले। मौसम का मिजाज पश्चिमी विक्षोभ में सक्रियता बढ़ने के कारण गर्म हो रहा है। क्योंकि मानसून मेरठ में 27 जून तक आएगा। जिसके चलते अमूमन मई के महीने में गर्मी बढ़ जाती है। इस गर्मी के बढ़ने के कारण लोगों को काफी समस्याओं से जूझना पड़ता है। इसलिए इस मौसम में घरों से बाहर सिर्फ और सिर्फ जरूरी काम से ही बाहर निकलने का प्रयास करे।
ज्येष्ठ माह शुरू होते ही आसमान से बरसी आग
मेरठ: ऐसी कहावत है कि ज्येष्ठ मास में पड़ने वाले नौतपे में हिरण का रंग भी काला पड़ जाता है। ज्येष्ठ मास के नौ दिन ऐसे होते हैं। जिनमें भीषण गर्मी होती है। इसलिए इन्हें नौतपा कहा जाता। इस समय पूरा प्रदेश प्रचंड गर्मी से त्राहि-त्राहि कर रहा है। कल से नौतपा शुरू हो गया है, जोकि आगामी 2 जून तक रहेगा। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही नौतपा शुरू हो जाता है। जोकि रेवती नक्षत्र तक रहता है।
रेवती नक्षत्र के स्वामी चंद्रमा हैं, जिन्हें शीतलता का कारक माना जाता है, इस समय में जब सूर्य चंद्रमा के नक्षत्र में प्रवेश करते हैं तो सूर्य के ताप से चन्द्रमा का प्रभाव कम हो जाता है। यानी कि पृथ्वी पर चंद्रमा की शीतलता कम हो जाती है। इन दिनों सूर्य वृषभ राशि में विराजमान होते हैं। इन नौ दिनों में सूर्य देव का रौद्र रूप देखने को मिलता है। जिस कारण इन दिनों भयंकर गर्मी पड़ती है। साथ ही ऐसा भी कहा जाता है कि नौतपा के दिनों में अगर बारिश पड़ती है तो भविष्य में भी अच्छी बरसात होती है।
आचार्य विवेकानंद शास्त्री बताते हैं कि नौतपा के साथ एक जून तक अंगारक योग भी बन रहा है। राहु और मंगल की युति से अंगारक योग का निर्माण होता है। जिससे जनहानि, आगजनी, दुर्घटना जैसी समस्या उत्पन्न होती है। इन दिनों व्यक्ति के जीवन में काफी उथल-पुथल रहती है। इसलिये इन दिनों घरों से बाहर कम निकले और वाहनों को सावधानी से चलाएं। निरंतर हनुमान चालीसा, सुंदरकांड, हनुमान अष्टक का पाठ करें। आचार्य विवेकानंद शास्त्री बताते हैं कि नौतपा के दिनों में भगवान शिव व सूर्यदेव की उपासना सर्वश्रेष्ठ फलदायी मानी जाती है।

इन दिनों सुबह जल्दी उठकर भगवान सूर्य को अर्ध्य दें, भगवान शंकर का जलाभिषेक करें व इन दिनों घर में तुलसी का पौधा लगाएं और पेड़-पौधों की सेवा करें। पशु-पक्षियों को निरंतर जल डालें, इससे पितृ प्रसन्न होते हैं। इसके अतिरिक्त स्कंद पुराण के अनुसार इन दिनों दान पुण्य करने का भी विशेष महत्व है। इन दोनों गरीबों और जरूरतमंदों को ऐसी चीज दान करें जो गर्मी से राहत देती हो जैसे-फल, घड़ा, सत्तू, पंखा, छाता आदि। साथ ही घर के दरवाजे पर आने वाले व्यक्ति को पानी अवश्य पिलायें।
आखिर क्यों मौन है प्रदूषण विभाग?
मोदीपुरम: प्रदूषण विभाग की लापरवाही लगातार देखने को मिल रही है। अस्पतालों से निकलने वाले कूड़े-करकट के ढेर प्रदूषण को बढ़ाने में लगे हुए हैं, लेकिन विभाग द्वारा अस्पताल संचालकों के विरुद्ध कोई भी कार्रवाई नहीं की जा रही है। जिसके चलते प्रदूषण बढ़ाने में यह इजाफा लगातार हो रहा है। प्रदूषण विभाग द्वारा अभी तक किसी भी अस्पताल को न तो नोटिस जारी किया है और न ही इनके विरुद्ध जुर्माना की कार्रवाई की गई है। महानगर में अस्पतालों से निकलने वाले कूड़े-करकट से कई गुना प्रदूषण बढ़ता है।
अस्पताल संचालक अस्पतालों से निकलने वाले कू ड़े-करकट को घरेलू कूड़े में डाल देते हैं। जिसके चलते यह कू ड़ा प्रदूषण अधिक बढ़ाता है। इससे बीमार तक होने की कगार पर महानगर के लोग पहुंच जाते हैं। यह बढ़ता प्रदूषण महानगर में सांस और दमा के रोगियों को काफी दिक्कतों में डाल रहा है। जिसके चलते लोेगों को परेशानी होने के साथ-साथ यह दिक्कतें महिलाएं, बुजुर्गों में भी अब बढ़ रही है, लेकिन विभाग कार्रवाई करने के बजाए चुपचाप है।

