Thursday, March 19, 2026
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100वें वर्ष में हॉकी का फिर शुरू होगा स्वर्णिम सफर

  • बीते दो ओलंपिक खेलों में 28 वर्ष का मेडल सूखा खत्म करने के साथ ही आगामी प्रतिस्पर्द्धा में मजबूत है दावेदारी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: पेरिस ओलंपिक में भारत जिन खेलों में देश के लिये मेडल हासिल किये गये उनमें हॉकी भी शुमार था। यह दूसरा मौका था जब पुरुष हॉकी टीम ने ब्रांज मेडल देश के लिए जीता। हम यहां बात हॉकी की इसलिये कर रहे हैं, क्योकि आज का दिन हॉकी के लिये बेहद खास मायने रखता है। आज हॉकी का जादूगर के नाम विख्यात मेजर ध्यानचंद का जन्मदिन है,जिसे पूरा देश राष्टÑीय खेल दिवस के रूप में मना रहा है।

यह वर्ष इसलिये भी खास है कि भारतीय हॉकी टीम आगामी लॉस एंजलेस ओलंपिक-2028 में उस स्वर्णिम सफर को दोहराने की दहलीज पर पहुंचने के प्रयास में है, जो सौ साल पहले 1928 के एमस्टर्डम ओलंपिक से शुरू होकर 1956 तक अनवरत जारी रहा था। भारतीय हॉकी के सबसे दिग्गज खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद को सर्वकालिक सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ियों में से एक माना जाता है।

1928 तक 1936 तक लगातार तीन ओलंपिक में गोल्ड मेडल हासिल करने वाली टीम में खेलते हुए मेजर ध्यानचंद ने हॉकी के जादूगर का खिताब हासिल किया। कहा जाता है कि जब वह मैदान पर हॉकी स्टिक से बॉल ड्रिबल कर विरोधियों के गोलपोस्ट की ओर बढ़ते थे तो लगता था मानों उनके हाकी स्टिक में चुंबकीय तत्व है, जो बॉल को स्टिक से चिपकाकर चलता था। विरोधी के खेमें में हलचल पैदा करने के लिये मेजर ध्यानचंद को याद रखा जाता है।

चंद कहकर बुलाते थे दोस्त, पहले ओलंपिक में दागे थे 14 गोल

मेजर ध्यानचंद को उनके साथी चंद कहकर बुलाते थे, वह इलाहबाद में जन्मे थे और रात में ड्यूटी खत्म होने के बाद चांद की रोशनी में घंटों हॉकी फील्ड में अभ्यास करते थे। जब भारतीय हॉकी महासंघ का गठन हुआ तो एम्स्टर्डम में 1928 के ओलंपिक के लिये भारतीय हॉकी के टीम के ट्रॉयल में मेजर को शामिल किया गया। टीम मे जगह बनाने के साथ ही मेजर ने 14 गोल दागे और भारत के स्वर्णिम सफर की शुरुआत में बड़ा योगदान दिया।

1932 के ओलंपिक में ट्रॉयल के बिना ही उन्हें स्थान दिया गया। ध्यानचंद 34 साल की सर्विस के बाद अगस्त 1956 में भारतीय सेना से लेफ्टिनेंट के रूप में रिटायर्ड हुए और इसके बाद उन्हें भारत के तीसरे सबसे बड़े नागरिक सम्मान पद्म भूषण पुरस्कार से सम्मानित किया गया। जबकि भारत के राजपत्र ने ध्यानचंद को रिटायर्ड होने पर लेफ्टिनेंट की उपाधि दी।

ये है पुरुष हॉकी का वर्तमान

सनातन धर्म इंटर कालेज के हॉकी कोच ने बताया कि पुरुष फील्ड हॉकी वर्तमान में स्वर्णिम सफलता की ओर कदम बढ़ा रही है, देश के लिये खेल रहे खिलाड़ी अब मेरठ के हॉकी खिलाड़ियों के प्रेरणाश्रोत है। चाहे वह गोलकीपर श्रीजेश हो या फिर कप्तान हरमनप्रीत सिंह हो हर खिलाड़ी इन्हें देखकर हॉकी के गुर सीख रहा है।

महिला खिलाड़ी भी बना रही पहचान

एनएएस इंटर कालेज में बालिकाओं को फील्ड में बिना थके निरंतर अभ्यास कराने वाले हॉकी कोच प्रदीप चिन्योटी की मानें तो महिला हॉकी टीम आगामी ओलंपिक में देश का प्रतिनिधित्व करने के लिये पूरी तरह प्रतिबद्ध है। आने वाले समय में बेटियां वह कारनाम कर सकती है, जो महिला हॉकी को नया आयाम देगा।

सुरक्षित माहौल में बेफिक्र होकर खेले बेटियां

क्षेत्रीय क्रीड़ा अधिकारी योगेंद्र पाल सिंह का कहना है कि खिलाड़ी विशेषकर बेटियों को मैदान में सुरक्षित माहौल मिले यह विभाग का पहला लक्ष्य था, जिसे वह पूरा कर रहे है। अब बेटियों को मौका है कि वह बेफिक्र होकर अभ्यास करें और जिला और देश का नाम रोशन करें।

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