Thursday, March 5, 2026
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विरासत आगे बढ़ाएंगे हंटर बिन हादी

  • उत्तराखंड के खतरनाक जंगलों में शिकार करेंगे मेरठ के सैयद बिन हादी
  • जारी की गई 15 शिकारियों की सूची में यूपी से हैं तीन शिकारी
  • पहले भी उत्तराखंड में शिकार कर एडवेंचर कर चुके हैं बिन हादी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: हंटिंग की विरासत को संभाल रहे सैयद बिन हादी एक बार फिर उत्तराखंड के जंगलों में एडवेंचर पर जाने के लिए तैयार हैं। जैसे ही सरकार की ओर से समय दिया जाएगा, वैसे ही वह अपने सफर पर निकलेंगे। जिसमें वह अपने पूर्वजों की दी हुई तालीम से राष्ट्रीय की सेवा करेंगे।

दरअसल, उत्तराखंड सरकार द्वारा आयोजित किए जा रहे आखेट में खतरनाक जानवरों का शिकार मेरठ बिन हादी करेंगे। इसके लिए देशभर से 15 शिकारियों की सूची जारी की गई है। जिसमें प्रदेश भर से तीन और मेरठ शहर के इकलौते शिकारी सैयद बिन हादी का चयन किया गया है।

गौरतलब है कि मेरठ के रहने वाले सैयद बिन हादी का वर्ष 2014 में भी शिकार के लिए चयन किया गया था। उस समय वह पूरी टीम के साथ एडवेंचर के लिए रवाना हुए थे, लेकिन इस बार नियमों के अनुरूप उन्हें अपनी प्रतिभा का परिचय देते हुए एडवेंचर पर अकेले ही जाना होगा।

बताते चले कि उत्तराखंड सरकार की ओर से मानव जीवन के खतरनाक बन चुके जानवरों के शिकार के लिए इस एडवेंचर का आयोजन किया जाता है। जिसमें देशभर से शिकारी हिस्सा लेते हैं। इस बार भी इस आखेट के लिए उत्तराखंड सरकार द्वारा सूची जारी कर दी गई है।

हालांकि, अभी तक सरकार की ओर कोई समय निर्धारित नहीं किया गया है। जैसे ही समय निर्धारित किया जाएगा, वैसे ही शिकारियों को उत्तराखंड के जंगलों शिकार पर भेजा जाएगा। इस बार के शिकार की खास बात यह है कि शिकारी को हंट पर एकल रूप से ही जाना होगा। फिर चाहें इसमें आपका सामना एक पक्षी से हो सकता या किसी खतरनाक भालू से भी।

कुछ यूं होता है हंटिंग का गेम

सरकार द्वारा आयोजित किए जाने वाले इस आखेट में आम जानवरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया जाता है। इसमें सिर्फ उन्हीं जानवरों का हंट किया जाता है जो आम लोगों का शिकार करने लगते हैं, या फिर अपने आपे से बाहर हो जाते हैं।

ऐसे में पहले उन जानवरों को भी ट्रैप करके उसके आम व्यवहार में लाने की कोशिश की जाती है, लेकिन बावजूद इसके जब हालांत बद से भी बदतर होते हैं, तभी उसका शिकार किया जाता है।

पीढ़ियों से चला आ रहा खतरनाक जानवरों का हंट

शिकार करना न तो किसी एकेडमी में सिखाया जाता है और न ही इसके लिए कोई विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है यह कहना है मेरठ के एडवेंचरर सैयद बिन हादी का।

उन्होंने कहा कि शिकार करने की कला किसी अन्य स्पोर्ट्स की तरह सिखाई नहीं जा सकती। इसके लिए साहस की जरूरत होती है। सैयद की पीढ़ियां शिकार करती आ रही हैं।

साल 1952 में सर्दी के दिनों में उनके दादा सैयद इक्तेदार हुसैन ने मैन ईटर एलीगेटर का शिकार गंगा घाट से किया था। जो कि मनुष्य जीवन के लिए हानिकारक बना हुआ था। उस समय एसडीएम मवाना आरके शर्मा भी साथ में मौजूद थे, जो कि अब रिटायर्ड होकर अमेरिका शिफ्ट हो चुके हैं।

इस शिकार के समय 26 दिसंबर को मेरठ के सर्किट हाऊस में मृत एलिगेटर का एक फोटोग्राफ लिया गया था। बता दें कि यह एलिगेटर 18 फीट लंबा और 880 किग्रा वजन का था।

इस मैन ईटर एलिगेटर के पेट से बच्चों की खोपड़ियां पाई गईं थी। जिनका उसने शिकार किया होगा। साथ ही, औरतों के जेवर भी इसके पेट से बरामद किए गए थे। इसके अलावा बिन हादी के पिता सैयद मोहम्मद हादी भी काफी समय पहले शिकार किया करते थे।

जिम कॉरबेट से भी रहा है नाता

सैयद बिन हादी ने बताया कि उनके घर उस समय जिम कॉरबेट का भी आना जाना रहता था। जो कि ब्रिटिश समय के बहुत बड़े शिकारी थे।

कॉरबेट के नाम पर ही जिम कॉरबेट नेशनल पार्क का नाम रखा गया है। जिम अपनी बहन मैगी के साथ उनके नाना के यहां आया करते थे।

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