Saturday, April 4, 2026
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अवैध कालोनी काट सरकारी खजाने को लगाई जा रही चपत

  • हस्तिनापुर क्षेत्र में बिना मानकों के ही काटी जा रही अवैध कॉलोनियां
  • कॉलोनी काटने में कॉलोनाइजर कर रहा वारे-न्यारे

जनवाणी संवाददाता |

हस्तिनापुर: महाभारत कालीन तीर्थ नगरी में धड़ल्ले से अवैध कॉलोनी काटी जा रही हैं। प्रशासन की मौन स्वीकृत के चलते कॉलोनी का नक्शा तथा डायवर्सन पास कराए बिना ही मनमाने तरीके से प्लाट बेचे जा रहे हैं। कॉलोनाइजर बिना पंजीयन के ही यह काम कर रहे हैं। जहां सरकारी खजाने को चपत लगाई जा रही है। वहीं, कॉलोनाइजरों के झांसे में फंसने के बाद लोगों को कॉलोनी में सुविधा नहीं मिलती, जिससे वे परेशान होते हैं।

गत कई महीने से महाभारत कालीन तीर्थ नगरी में कालोनियों को कारोबार धड़ल्ले से फल-फूल रहा है। राजस्व विभाग के कर्मचारियों और प्रॉपर्टी डीलरों की सांठगांठ से खेती की जमीन औने पौने-दामों पर खरीद कर अवैध कॉलोनी काटी जा रही है। भू-माफियों के जाल में फंस कर प्लॉट करने वाले उपभोक्ता इनके झांसे में आ जाती हैं। शहर में अवैध कालोनियों का कारोबार काफी जोरों पर है। अवैध रूप से नगर में फल-फूल रहे कॉलोनियोें के धंधे से कालोनी व्यापारियों की पौ बारह होने के साथ सरकारी खजाने को लाखों की चपत लग रही है। अधिकारी में डबल इंजन योगी सरकार के बुलडोजर का कोई खौफ नजर नहीं आ रहा। वहीं, इस संबंध में अधिशासी अधिकारी नगर पंचायत हस्तिनापुर, मुकेश मिश्रा का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है। जांच कर कस्बे में अवैध रूप से कालोनी काट रहे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जायेगी। उधर, एसडीएम मवाना अमित गुप्ता का कहना है कि यदि कालोनी काट जाने में मानकों की अनदेखी की जा रही है तो जांच कर ऐसे लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।

क्या है कॉलोनी काटने के नियम?

नगर में जहां भी नवीन कॉलोनियां काटी जा रही हैं, उनका सबसे पहले राजस्व विभाग में डायवर्सन होना चाहिए, लेकिन कॉलोनाइजर रजिस्ट्रेशन फीस से बचने के चक्कर में डायवर्सन नहीं कराते हैं। जिससे राजस्व की चोरी खुलेआम की जा रही है।

कॉलोनी में नियमावली के अनुसार पक्की रोड, नाली, पानी की सुविधा, बिजली, खंभों पर स्ट्रीट लाइटें, पार्क आदि की सुविधाएं होनी चाहिए। मगर कॉलोनाइजर खेतों में कच्ची रोड डालकर प्लाट काट देते हैं। बैनामा के दौरान भी उपपंजीयक आॅफिस में यह लिखा जाता है कि जांच उपरांत जमीन बंधक नहीं पाई गई है। पर सर्विस प्रोवाइडर और रजिस्ट्रार इस पर कतई ध्यान नहीं देते हैं।

नगर पंचायत के पास नहीं है कॉलोनियों का रिकॉर्ड

नगर पालिका के पास कॉलोनियां काटने के लिए किसी भी व्यक्ति द्वारा लाइसेंस नहीं लिया गया है। कॉलोनाइजिंग एक्ट के तहत किसी भी जमीन मालिक ने नियम का पालन नहीं किया, जबकि नगर परिषद की बिना अनुमति नगरीय क्षेत्र में कॉलोनी नहीं काटी जा सकती। सबसे बड़ी बात तो यह है कि प्रशासन के पास कॉलोनियों का रिकॉर्ड तक नहीं है। प्रशासन ने अभी तक सर्वे नहीं कराया है।

अवैध कॉलोनियों के कारण नगर परिषद को संपत्ति कर के रूप में हर साल लाखों रुपये का नुकसान हो रहा है। खास बात यह है कि अवैध कॉलोनी काटने वालों के खिलाफ कार्रवाई न होने की वजह से नगर के कई इलाकों में अवैध रूप से प्लाटिंग की जा रही है। जिससे कृषि योग्य जमीन को भी कॉलोनी में परिवर्तित कर दिया गया है।

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