- मजलिस में मनाया शोक: सिर्फ पांच लोग रहे मजलिस में शामिल, अजादारों ने किया गाइडलाइन का पालन
जनवाणी ब्यूरो |
नजीबाबाद: इमामबड़ा हैदरी जोगीपुरा में सरकार की गाइडलाइन का पालन करते हुए मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अली हैदर ने कहा कि अगर हजरत इमाम हुसैन अपने साथियों के साथ कुबार्नी ना देते तो आज इस्लाम का नाम लेने वाला कोई नहीं होता।
इमाम हुसैन के चेहलुम के अशरे की मजलिस को खिताब करते हुए मौलाना अली हैदर ने कहा कि इस्लाम जिंदा होता है हर कर्बला के बाद। अगर इमाम हुसैन अपनी और अपने परिवार की कुरबानी ना देते तो आज दुनिया में इस्लाम का नाम लेने वाला कोई ना होता। हजरत इमाम ने पूरे घर की कुरबानी दे कर इस्लाम को बचाया है।
आज दुनियां के हर मुल्क और हर खित्ते में इमाम-ए-हुसैन का गम मनाया जाता है। हुसैन अलैहिस्सलाम की शहादत के बाद उनके पहले चालीसवें, चेहलुम या अरबईन के अवसर पर पैगम्बरे इस्लाम सल्लल्लाह अलैहे व आलेही वसल्लम के अहम सहाबी जाबिर इब्ने अब्दुल्लाह अंसारी, जो बहुत वृद्ध और अंधे हो चुके थे, इमाम हुसैन और उनके साथियों की पाक (पवित्र) कब्रों पर पहुंचे।
इमाम हुसैन के परिजनों का कारवां भी जो इससे पहले यजीद की कैद में थे, चेहलुम के मौके पर कर्बला पहुंचा और उसने बनी हाशिम के कुछ लोगों के साथ मिल कर वहां इमाम हुसैन का शोक मनाया। चेहलुम के मौके पर निकलने वाला अरबईन का जलूस कोविड 19 के चलते नहीं निकाला गया।
वहीं क्षेत्र के ग्राम मुंडाखेड़ा में चेहलुम का जुलूस कोरोना जैसी महामारी कोविड-19 को लेकर शासन-प्रशासन के कड़े निर्देशोंं के कारण नहीं निकला। नजीबाबाद में चेहलुम को देखते हुए चौकी इंचार्ज जलालाबाद बलराम सिंह यादव पुलिस फोर्स के साथ ग्राम मुंडाखेड़ा पहुंचे और जुलूस नहीं निकालने के निर्देश दिए। चौकी इंचार्ज बलराम सिंह यादव जलालाबाद ने कहा कि यदि कोई शासन प्रशासन का सहयोग नहीं करता है शरारती तत्वों को बख्शा नहीं जाएगा।

