Monday, July 22, 2024
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अरहर की उन्नत खेती

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भारत का विश्व में अरहर के क्षेत्रफल व उत्पादन में प्रथम स्थान हैं। विश्व के कुल क्षेत्रफल में भारत की कुल भागीदारी 79.65 प्रतिशत व उत्पादन में 67.28 प्रतिशत है। अरहर का सामान्य क्षेत्र 44.29 लाख है जिसमें 80.6 किलोग्राम/ हेक्टेयर की उत्पादकता के साथ 35.69 लाख टन का उत्पादन होता है। कुल खरीफ दलहन क्षेत्र में अकेले अरहर का योगदान 34 प्रतिशत व उत्पादन में 47 प्रतिशत योगदान है।

कृषि कार्यमाला

दलहनी फसलों में अरहर का विशेष स्थान है। अरहर की दाल में लगभग 20-21 प्रतिशत तक प्रोटीन पाई जाती है, साथ ही इस प्रोटीन का पाच्यमूल्य भी अन्य प्रोटीन से अच्छा होता है। अरहर की दीर्घकालीन प्रजातियाँ मृदा में 200 कि.ग्रा. तक वायुमण्डलीय नाइट्रोजन का स्थिरीकरण कर मृदा उर्वरकता एवं उत्पादकता में वृद्धि करती है।

प्रजातियों का चुनाव

बहुफसलीय उत्पादन पद्धति में एवं हल्की ढलान वाली असिंचित भूमि में जल्दी पकने वाली प्रजातियाँ बोनी चाहिए। मध्यम गहरी भूमि में जहां पर्याप्त वर्षा होती हो, सिंचित एवं असिंचित दोनों स्थिति में मध्यम अवधि की प्रजातियाँ बोयें।

खेत की तैयारी

मिट्टी पलट हल से एक गहरी जुताई के उपरांत 2-3 जुताई हल अथवा हैरो से करना उचित रहता है। प्रत्येक जुताई के बाद सिंचाई एवं जल निकास की पर्याप्त व्यवस्था हेतु पाटा लगाना आवश्यक है।

बुआई का समय तथा विधि

शीघ्र पकने वाली प्रजातियों की बुआई जून के प्रथम पखवाड़े मे पलेवा करके करना चाहिए तथा मध्यम व देर से पकने वाली प्रजातियों की बुआई जून से जुलाई के प्रथम पखवाड़े में करें।

उर्वरक

मृदा परीक्षण के आधार पर समस्त उर्वरक अंतिम जुताई के समय हल के पीछे कूड़ में बीज की सतह से 5 सेमी गहराई व 5 सेमी साइड में देना सर्वोत्तम रहता है। बुआई के समय 20-25 किग्रा नत्रजन, 40-50 किग्रा फास्फोरस, 20-25 किग्रा पोटाश प्रति हेक्टर कतारों में बीज के नीचे दें।

बीज शोधन

मृदाजनित रोगों से बचाव के लिए बीजों को 2 ग्राम थाइरम 1 ग्राम कार्बेन्डाजिम प्रति किग्रा अथवा 3 ग्राम थाइरम प्रति किग्रा की दर से शोधित करके बुआई करें या कार्बोक्सिन (वीटावेक्स) 2 ग्राम, 5 ग्राम ट्रायकोडरमा प्रति किलो बीज के हिसाब से उपचारित करें। बीजशोधन बीजोपचार से 2-3 दिन पूर्व करें।

बीजोपचार

10 किग्रा अरहर के बीज के लिए राइजोबियम कल्चर का एक पैकेट (100 ग्राम) पर्याप्त होता है। 50 ग्राम गुड़ या चीनी को 1/2 लीटर पानी में घोलकर उबाल लें। घोल के ठंडा होने पर उसमें राइजोबियम कल्चर मिला दें। इस कल्चर में 10 किग्रा बीज डाल कर अच्छी प्रकार मिला लें ताकि प्रत्येक बीज पर कल्चर का लेप चिपक जायें। उपचारित बीजों को छाया में सुखा कर, दूसरे दिन बोया जा सकता है। उपचारित बीज को कभी भी धूप में न सुखायें, व बीज उपचार दोपहर के बाद करें।

दूरी: शीघ्र पकने वाली: पंक्ति से पंक्ति: 45-60 सेमी पौध से पौध:10-15 सेमी
मध्यम व देर से पकने वाली: पंक्ति से पंक्ति: 60-75 सेमी पौध से पौध:15-20 सेमी

बीजदर

जल्दी पकने वाली जातियों का 20-25 किलोग्राम एवं मध्यम पकने वाली जातियों का 15 से 20 कि.ग्रा.बीज/हेक्टर बोयें। चौफली पद्धति से बोने पर 3-4 किलों बीज की मात्रा प्रति हेक्टेयर लगती है।

सिंचाई एवं जल निकास

चूंकि फसल असिंचित दशा में बोई जाती है अत: लंबे समय तक वर्षा न होने पर फसल में तीन सिंचाई करना आवष्यक रहता है। ब्रान्चिग अवस्था (बुवाई से 30 दिन बाद) पुष्पावस्था (बुवाई से 70 दिन बाद) फली बनते समय (बुवाई से 110 दिन बाद) फसल में आवश्यकतानुसार सिंचाई करें। अधिक अरहर उत्पादन के लिए खेत में उचित जलनिकास का होना प्रथम शर्त है अत: निचले एवं अधो जल निकास की समस्या वाले क्षेत्रों में मेड़ो पर बुआई करना उत्तम रहता है। मेड़ों पर बुवाई करने से अधिक जल भराव की स्थिति में भी अरहर की जड़ो को पर्याप्त वायु संचार होता रहता है।

खरपतवार नियंत्रण

खरपतवारनाशक पेन्डीमेथीलिन 0.75-1.00 कि.ग्रा. सक्रिय तत्व/हेक्टर बोनी के बाद प्रयोग करने से खरपतवार नियंत्रण होता है । खरपतवारनाशक प्रयोग के बाद एक ंिनराई लगभग 30 से 40 दिन की अवस्था पर करना लाभदायक होता है। किन्तु यदि पिछले वर्षों में खेत में खरपतवारों की गम्भीर समस्या रही हो तो अन्तिम जुताई के समय खेत में फ्लूक्लोरोलिन 50 प्रतिशत (बासालिन) की 1 कि.ग्रा. सक्रिय मात्रा को 800-1000 ली. पानी में घोलकर या एलाक्लोर (लासा) 50 प्रतिशत ई.सी. की 2-2.5 कि.ग्रा. (सक्रिय तत्व) कि.ग्रा. मात्रा को बीज अंकुरण से पूर्व छिड़कने से खरपतवारों पर प्रभावी नियंत्रण पाया जा सकता है।

कटाई एवं गहाई

जब पौधे की पत्तियां खिरने लगे एवं फलियांसूखने पर भूरे रंग की हो जाए तब फसल को काट लें। खलिहान मे 8-10 दिन धूप में सूखाकर टैÑक्टर या बैलों द्वारा दावन कर गहाई की जाती है।

उपज

15-20 क्ंिवटल/हे. उपज असिंचित में, 25-30 क्ंिवटल/हे. सिंचित में प्राप्त कर सकते हैं एवं 50-60 क्ंिवटल लकड़ी प्राप्त होती है।

भंडारण

भंडारण हेतु नमी का प्रतिशत 8-10 प्रतिशत से अधिक नहीं होना चाहिए। भंडारण में कीटों से सुरक्षा हेतु अल्यूमीनियम फास्फाइड की 2 गोली प्रति टन प्रयोग करे।

स्त्रोत: सीडनेट, कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार एवं भा.द.अनु.सं.-

भा.कृ.अनु.प., कानपुर


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