Friday, September 17, 2021
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भारतीय शास्त्र की बढ़ रही है लोकप्रियता: देव पुजारी

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जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: संस्कृत भारती मेरठ प्रांत की ओर से शनिवार को चौधरी चरण सिंह विवि स्थित अतिथि ग्रह में एक प्रेसवार्ता का आयोजन किया गया। वार्ता को संबोधित करते हुए संस्कृत भारती के अखिल भारतीय महामंत्री देव पुजारी ने कहा कि संस्कृत में निहित ज्ञान विज्ञान को बाहर लाकर उसके अध्ययन से ही समस्त मानवता का कल्याण होना है।

बिना संस्कृत के अध्ययन के हम आधुनिक तकनीक, चिकित्सा विज्ञान, प्रबंधन, वाणिज्य आदि विषयों को नहीं जान सकते है। इसलिए आवश्यकता है कि संस्कृत के अध्ययन को सरलता से किया जाए। क्योंकि इसका अध्ययन सरल है कठिन नहीं। उन्होंने कहा कि हाल ही में अमेरिका, कैलिफोर्निया आदि देशों की संस्कृत भारती के कार्य की दृष्टि से यात्रा कर यह अनुभूत किया गया है कि भारत में ही नहीं बल्कि संम्पूर्ण विश्व में संस्कृत भाषा के प्रति लोगों में रुचि उत्पन्न हो रही है।

जिसका मुख्य कारण है संस्कृत भाषा में निहित तत्वज्ञान। वहीं भारत की बात करे तो यहां भी कुछ समय से संस्कृत के प्रति लोगों को रुझान बढ़ा है और छात्र संख्या में भी वृद्वि हो रही है। इतना ही नहीं संस्कृत भाषा का संभाषण करने वाले युवक-युवतियां लाखों की संख्या में तैयार हुए है और अनेक संस्कृत परिवारों का निर्माण भी हो रहा है। संस्कृत भारती 1981 से संस्कृत संभाषण आंदोलन को लेकर प्रयासरत है।

संस्कृत भारती पूरे वर्ष संम्पूर्ण भारत में विभीन्न प्रकार के कार्यक्रम चलाती रहती है जैसे कि संस्कृत संभाषण शिविर, व्याकरण वर्ग, संस्कृत बालकेंद्र, शास्त्रवर्ग, स्त्रोत कक्षाएं, वेदांत वर्ग, न्याय वर्ग, योग वर्ग आदि का समय-समय पर कार्यकर्ताओं के द्वारा सम्मेलन आयोजित किया जाता रहता है। वहीं 19,20 और 21 नवंबर को मेरठ में अखिल भारतीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है।

जिसमें सम्पूर्ण भारत से 500 से अधिक कार्यकर्ता सम्मलित हो रहे है। यह लोग तीन दिन मेरठ में रहकर नई शिक्षा नीति के तहत हमें किस प्रकार से कार्य करना है उसकी रणनीति तैयार करेंगे। ताकि संस्कृत को बढ़ावा मिल सकें। संस्कृत भारती के प्रांत अध्यक्ष प्रो. पवन कुमार ने कहा कि आज तक लोगों को बताया ही नहीं गया कि संस्कृत क्या हैं,लेकिन धीरे-धीरे इसकों लोग स्वीकार कर रहे है।

कोरोना काल में योग, आयुर्वेद और संस्कृत काफी लोकप्रिय हुई है। वहीं प्राथमिक स्तर पर संस्कृत का प्रचार न होने पर देव पुजारी ने कहा कि सरकार द्वारा शिक्षकों की नियुक्ति नहीं की जा रही हैं, लेकिन संस्कृत भारती की ओर से प्रचार-प्रचार किया जा रहा है। वहीं नई शिक्षा नीति में कक्षा तीन से कई तरह की भाषाओं को जोड़ा गया है ताकि छात्र उनका अध्ययन कर सकें।

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