जनवाणी संवाददाता |
सहारनपुर: विश्व हृदय दिवस (World Heart Day) के अवसर पर, वरिष्ठ फिजिशियन एवं हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव मिगलानी (एम.डी., गोल्ड मेडलिस्ट) ने हृदय रोगों के भयावह रूप से बढ़ते मामलों, खासकर युवाओं में, पर गहन चिंता व्यक्त की है। डॉ. मिगलानी के अनुसार, हृदय रोग पूरे विश्व में मृत्यु का नंबर 1 कारण है, और यदि वर्तमान दर पर वृद्धि जारी रही तो 2030 तक हर तीसरे मरीज़ की मौत हृदय की बीमारी से होगी। उन्होंने बताया कि भारत में इस समय लगभग 52.3 करोड़ हृदय के मरीज़ हैं और यह संख्या शहरी क्षेत्रों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी लगातार बढ़ रही है।
युवाओं में हार्ट अटैक के मुख्य कारण
डॉ. मिगलानी ने युवाओं में हार्ट अटैक के प्रमुख कारणों को रेखांकित किया है, जिनमें आरामदेह जीवन शैली सबसे बड़ा कारण है। आजकल युवा घंटों कुर्सी पर बैठकर बिना किसी शारीरिक गतिविधि के कंप्यूटर या लैपटॉप पर काम करते हैं, जिसके परिणामस्वरूप मोटापा बढ़ता है। उनका कहना है कि जिन पुरुषों की कमर 90 से.मी. से ज़्यादा और महिलाओं की कमर 80 से.मी. से ज़्यादा होती है, उनमें हार्ट अटैक का खतरा 10 गुना ज़्यादा होता है। दूसरा बड़ा कारण जंक फ़ूड का अत्यधिक इस्तेमाल है। समोसा, चाऊमीन, पिज्जा, बर्गर, डोसा और फिङ्गर चिप्स जैसे खाद्य पदार्थों में सैचुरेटेड फैट और कोलेस्ट्रॉल बहुत ज़्यादा होता है, जो हृदय की नसों में जमा होकर हार्ट अटैक की संभावना को बढ़ाता है। इसके अतिरिक्त, मानसिक तनाव और चिंता (एन्ज़ाईटी और डिप्रेशन), बढ़ती डायबिटीज और टाइप-ए पर्सनैलिटी (गुस्सा व चिंता ज़्यादा करने वाले लोग) भी युवाओं में इस खतरे को बढ़ा रहे हैं।
दिल के दौरे के मुख्य कारण और लक्षण
डॉ. मिगलानी के अनुसार, दिल के दौरे के मुख्य कारणों में धूम्रपान (10 से ज़्यादा सिगरेट प्रतिदिन), उच्च रक्तचाप (हाई बी.पी.), मोटापा, खून में वसायुक्त पदार्थों की मात्रा का बढ़ना (हाइपरलिपिडेमिया), डायबिटीज (जिसका सही नियंत्रण न हो), टाइप-ए पर्सनैलिटी, और अधिक शराब पीना शामिल हैं। आनुवांशिकता भी एक बड़ा कारक है। दिल के दौरे के लक्षणों को पहचानना अत्यंत आवश्यक है। इनमें छाती के बीचों-बीच ज़ोरदार दर्द, जो दोनों बाज़ुओं (अक्सर बाएँ) और गले तक जाता है, तथा दर्द के साथ पसीना और उल्टी आना, और साँस फूलना शामिल हैं।
हृदय रोगियों के लिए ज़रूरी सावधानियाँ और आहार
डॉ. मिगलानी ने हृदय रोगियों के लिए कुछ अनिवार्य सावधानियाँ बताई हैं: ज़्यादा भारी काम न करें और सीधी सीढ़ियाँ/चढ़ाई नहीं चढ़ें। खाना खाने के बाद थोड़ा आराम करें। सबसे महत्वपूर्ण, ज़्यादा सर्दी से बचें, विशेषकर सुबह 4 बजे से सुबह 10 बजे तक। यह समय खतरनाक होता है क्योंकि इस दौरान कैटिकोलामीन हार्मोन का रिसाव बढ़ने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है और हार्ट की नसें सिकुड़कर हार्ट अटैक हो सकता है। ज़्यादा गुस्सा न करें, धूम्रपान और शराब का सेवन पूर्णतः निषिद्ध है, और चिकनाई युक्त पदार्थ नहीं खाने चाहिए। उन्होंने यह भी सलाह दी कि सुबह की सब्ज़ी में इस्तेमाल किया हुआ तेल शाम को इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे हार्ट की एंडोथिलियम कमजोर हो जाती है।
आहार तालिका में उन्होंने वनस्पति घी, तली हुई चीज़ें (समोसा, पूरी, पिज्जा, मोमोज़), बकरे का मीट, अंडे का पीला भाग, आचार, मक्खन और मलाई वाला दूध जैसी चीज़ों से परहेज़ करने को कहा है। इसके विपरीत, हरी पत्तेदार सब्ज़ियाँ, सलाद, ताज़े फल, साबुत दालें, ब्राउन ब्रेड/राइस, और गेहूँ के आटे में चना और जौ का आटा मिलाकर खाना लाभदायक आहार है।
प्राथमिक चिकित्सा और ‘डोंट मिस अ बीट’ थीम
डॉ. मिगलानी ने ज़ोर दिया कि हार्ट अटैक के बाद शुरुआती 3 घंटे महत्वपूर्ण होते हैं। यदि किसी व्यक्ति को छाती में दर्द के साथ बाज़ुओं में दर्द और उल्टी हो, तो तुरंत किसी अच्छे चिकित्सक को दिखाएं। दिल का दौरा पड़ने पर रोगी को तुरंत आधि डिसप्रिंट और सॉरबिट्रेट लेकर योग्य चिकित्सक के पास जाना चाहिए। इस वर्ष वर्ल्ड हार्ट डे 2025 की थीम है: “Don’t Miss a Beat” यानी “एक भी धड़कन न चूकें”। यह थीम लोगों से आग्रह करती है कि वे दिल की समस्याओं के प्रारंभिक संकेतों पर ध्यान दें, नियमित जांच कराएँ और स्वस्थ जीवन शैली अपनाकर अपने हृदय स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहें।

