जनवाणी ब्यूरो |
नई दिल्ली: मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने WhatsApp की प्राइवेसी पॉलिसी को लेकर मेटा प्लेटफॉर्म्स को सख्त चेतावनी दी। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि तकनीकी कंपनियां भारत में रहकर नागरिकों के निजता अधिकार का उल्लंघन नहीं कर सकतीं। अदालत ने यह भी कहा कि अगर कंपनियां संविधान का पालन नहीं कर सकतीं, तो उन्हें देश छोड़ देना चाहिए। यह सुनवाई WhatsApp की 2021 की प्राइवेसी पॉलिसी से जुड़ी है, जिस पर भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) ने 213 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था, जिसे राष्ट्रीय कंपनी कानून अपीलीय अधिकरण (NCLAT) ने बरकरार रखा था। मेटा और व्हाट्सएप ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।
सुप्रीम कोर्ट की बेंच में मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पांचोली शामिल हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) को भी याचिका में एक पक्ष बनाने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने कंपनियों को चेतावनी दी है कि अगर वे डेटा साझा करने के बारे में लिखित आश्वासन नहीं देतीं, तो अदालत आदेश पारित करेगी। बेंच ने यह भी स्पष्ट किया कि इस मामले में 9 फरवरी को अंतरिम आदेश पारित किया जाएगा।
सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी की भाषा पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “निजता का अधिकार इस देश में अत्यंत महत्वपूर्ण है और कंपनियां इसका उल्लंघन नहीं कर सकतीं।” बेंच ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा, “आप डेटा शेयरिंग के बहाने इस देश की प्राइवेसी के साथ नहीं खेल सकते। आपकी प्राइवेसी शर्तें इतनी चालाकी से तैयार की गई हैं कि एक आम आदमी उन्हें समझ ही नहीं पाता। यह निजी जानकारी चोरी करने का एक ‘सभ्य तरीका’ है, जिसे हम होने नहीं देंगे।” चीफ जस्टिस ने आगे कहा, “अगर आप हमारे संविधान का पालन नहीं कर सकते, तो भारत छोड़ दें। हम नागरिकों की निजता के साथ कोई समझौता नहीं होने देंगे।”
अदालत ने साफ कर दिया है कि वह डेटा के एक भी शब्द की साझेदारी की अनुमति नहीं देगी। अब सबकी नजरें 9 फरवरी पर टिकी हैं, जब कोर्ट इस मामले में अपना अंतरिम आदेश सुनाएगा।

