Thursday, February 12, 2026
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Meerut News: शहर में अंधाधुंध बिजली कटौती, सरकार को बदनाम करने की साजिश तो नहीं?

महकमे के अभियंताओं को बना दिया हैं संग्रह अमीन, बिजली व्यवस्था देखें या रिकवरी करें

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: महानगर और छावनी क्षेत्र में इस वक्त अंधाधुंध बिजली की कटौती की जा रही है। बिना किसी सूचना के किसी भी वक्त कट लगा दिया जाता है, जो घंटों चलता रहता है। कोई दिन ऐसा नहीं, जब शहर के कई क्षेत्रों में कटौती का कहर न बरप रहा हो। शहर के साथ ही साथ छावनी क्षेत्र भी बेहाल है। यहां कई क्षेत्रोें में कटौती इतनी ज्यादा है कि लोग घरों में बिलबिला गए हैं। हैरत की बात यह है कि एमईएस बिजली घर ने अपने ही क्षेत्र की बीसी लाइन में बुधवार को 61 बार बिजली की कटौती की। संभवत: इस तरह के कट किसी साजिश का हिस्सा भी हो सकते हैं। जिस तरह का आलम है, उससे तो किसी साजिश की ‘बू’ आती है कि कहीं ये निजीकरण के विरोध में तो कटौती नहीं हो रही? सब कुछ सरकार की छवि धूमिल करने के लिए तो नहीं किया जा रहा।

भाजपा सरकार बराबर 24 घंटे बिजली की आपूर्ति का दावा कर रही है। बार-बार यह दावा भी किया जाता रहा है कि प्रदेश में बिजली की कोई कमी नहीं है और खूब आपूर्ति हो रही है। अब सरकार का 24 घंटे बिजली का दावा यहां फुस्स हो रहा है। कोई ऐसा क्षेत्र नहीं जहां अंधाधुंध बिजली कटौती न हो रही हो। कहीं बिजलीघर में किसी काम को लेकर तो कहीं लाइन में खराबी आने के चलते। कटौती का बिजली विभाग के पास अपना बहाना है, लाइन पर काम चल रहा है। इससे लोग बेहाल हैं, शिकायत करने के बाद भी अफसर कुछ सुनने के लिए तैयार नहीं हैं। हालत यह है कि शहर की कालोनियों में जहां अंधाधुंध कट लग रहे हैं, वहीं कैंट क्षेत्र भी कटौती से बेहाल है।

बिजली कट ने खोली सरकार के दावों की पोल

बिजली आपूर्ति की दुर्दशा ने योगी सरकार के शहर में 24 घंटे शहर में बिजली आपूर्ति के दावों की पोल खोलकर रख दी है। लोगों का यहां तक कहना है कि बिजली आपूर्ति की इतनी खराब इतनी पहले कभी नहीं देखी गयी। सपा शासन में 14 घंटे बिजली मिलती थी, लेकिन निर्बाध रूप से। अब ऐसा कुछ नहीं है। दावे कुछ हैं और आपूर्ति की स्थिति कुछ और। बिजली आपूर्ति को लेकर नित नए बहाने अफसर करते हैं। कभी बिजनेस प्लान के नाम पर कह दिया जाता है कि पीछे से कट चल रहा है, लेकिन आज तक यह नहीं पता चला कि ये पीछे से कौन सा कट होता है। इसके अलावा लोकल फाल्ट बताकर 24 घंटे में कई बार बिजली सप्लाइ बंद कर दी जाती है। जुलाई का महीना जबरदस्त गर्मी व उमस का होता है, ऐसे में यदि बिजली ही नहीं मिलेगी तो लोग उबल जाएंगे।

एमईएस बिजलीघर से 61 बार लगा कट

हैरान करने वाली बात है कि एमईएस बिजलीघर से कई क्षेत्रों में बिजली का 61 बार कट लगा। बीसी लाइन में रहने वाले लोगों ने बताया कि वैसे तो यहां बिजली आपूर्ति के बेहद खराब हालात चल रहे हैं, लेकिन बुधवार को तो हद हो गई। बिजलीघर से पूरे दिन में 61 बार कट लगा। इससे सोचा जा सकता है कि क्षेत्र में कितनी बिजली मिली होगी। इसी बिजलीघर के सोफीपुर में भी बुधवार को जमकर कटौती की गयी। यहां छोटे बड़े पूरे दिन में आठ घंटे के कट लगे। गर्मी और उमस के चलते लोग सड़कों पर नजर आए।

कटौती के पीछे कहीं निजीकरण मुद्दा तो नहीं

जिस तरह से अंधाधुंध बिजली की कटौती हो रही है, उसके पीछे कहीं बिजली के निजीकरण की चल रही तैयारियों के बीच विरोध का मामला तो नहीं? इस बात की भी चर्चाएं हैं कि बिजली कर्मचारी और अधिकारी ही जानबूझकर कोई न कोई बहानेबाजी कर कटौती करा रहे है, जिससे जनता नाराज हो जाए और सरकार की छवि धूमिल हो। यह स्थिति तो तब है, जबकि पीवीवीएनएल की एमडी यहां बैठती हैं और ऊर्जा विभाग के राज्यमंत्री भी यहां रहते हैं। सरकार तमाम क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है, मगर बिजली को लेकर जनता में नाराजगी बन रही है। इस तरफ किसी का ध्यान नहीं है।

अभियंताओं को बना दिया संग्रह अमीन

बिजली का संकट तो है ही और इसके पीछे अपने अपने तर्क हैं, लेकिन एक बड़ा कारण यह भी माना जा रहा है कि बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने का काम देखने वाले इंजीनियरों के कंधों पर आजकल रिकवरी का बोझ है। एक तरह से वे संग्रह अमीन बन कर रह गए हैं। रोजाना का बिजली बिलों का हिसाब उन्हें रखना पड़ रहा है और इसका हिसाब से रोजाना एमडी को देना पड़ रहा है। अब इंजीनियर इतने दबाव में हैं कि वे बिलों की रिकवरी देखें या फिर बिजली की व्यवस्था। कई इंजीनियरों ने अपनी व्यथा का इजहार भी किया, लेकिन आॅफ द रिकॉर्ड।

ये बोले-बिजली अफसर

पीवीवीएनएल के अधीक्षण अभियंता शहर मुनीश चोपड़ा ने बताया कि इन दिनों कांवड़ यात्रा की वजह से काम चल रहा है। यह काम लाइन बंद करके ही कराया जा सकता है। वहीं, एमईएस के एसडीओ ने बताया कि 33 की लाइन पर काम की वजह से बीसी लाइन व आसपास की सप्लाई पर बार-बार शटडाउन लेना पड़ रहा है।

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