- शहर की महिला खिलाड़ियों ने अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर लहराया परचम
जनवाीणी संवाददाता |
मेरठ: महिलाओं को घर की दहलीज के भीतर ही रहना चाहिए! महिलाओं का काम घर के बाहर नहीं बल्कि रसोई में चूल्हा-चौका संभालना है! यही सोच अक्सर महिलाओं को लेकर पुराने में समय में रही है, लेकिन धीरे-धीरे महिलाओं ने खुद को पुरुषों से भी आगे निकलकर साबित किया है।
ऐसी ही कुछ महिला खिलाड़ी मेरठ शहर ने देश को दी हैं। जिन्होंने हार न मानते हुए कड़े संघर्ष के साथ अंतर्राष्ट्रीय फलक पर अपना लोहा मनवाया है।
पहलवान अलका तोमर, एथलीट प्रियंका गोस्वामी, पारुल चौधरी, प्रफुल त्यागी, मानसी तोमर, फातिमा यह ऐसी ही महिलाओं के नाम हैं जिन्होंने जमीनी स्तर से उठते हुए खेल की दुनिया में खुद को नई पहचान दी और कई पदक अपने नाम किए हैं। आठ मार्च यानी अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर ऐसी ही कुछ महिला खिलाड़ियों की संघर्षपूर्ण कहानी से आपको अवगत कराते हैं:
प्रियंका ने मेहनत से हासिल किया ओलंपिक कोटा
माधवपुरम निवासी अंर्राष्ट्रीय पैदल चाल खिलाड़ी प्रियंका गोस्वामी ने हाल ही में ओलंपिक कोटा हासिल किया है। टोक्यो ओलंपिक देश का प्रतिनिधित्व मेरठ की स्टार रेस वॉकर करेंगी, लेकिन प्रियंका का ओलंपिक क्वालीफिकेशन तक का सफर आसान नहीं रहा। इसके पीछे प्रियंका के दस सालों की मेहनत है। प्रियंका के पिता मदनपाल रोडवेज में बस कंडक्टर थे, जिनको उच्चाधिकारियों की मिलीभगत के कारण निलंबित कर दिया गया। ऐसे में प्रियंका और उनके भाई की पढ़ाई का खर्च भी उन्होंने परेशानियों से वहन किया। वहीं, इसके बावजूद उनके पिता ने प्रियंका और उनके भाई को खेलों से जोड़ा। जिसके बाद रेस वॉकर प्रियंका ने कड़ी मेहनत और संघर्ष से अपना ओलंपिक कोटा तक का सफर शुरू किया। बता दें कि प्रियंका ने 2014 में जूनियर नेशनल रिकॉर्ड और 2015 में जूनियर फेडरेशन रिकॉर्ड हासिल किया है, जोकि दोनों ही 10 किमी के थे। इसके अलावा उन्हें वर्ष 2011 में यूपी की सर्वश्रेष्ठ महिला एथलीट का खिताब भी मिल चुका है। इसके अलावा उन्हें हाल ही में योगी सरकार द्वारा रानी लक्ष्मीबाई अवार्ड से भी नवाजा गया जा चुका है।
पारुल चौधरी की निगाहें ओलंपिक क्वालीफाई पर
प्रियंका के बाद मेरठ की एथलीट पारुल चौधरी भी ओलंपिक कोटा हासिल करने की दौड़ में हैं और शहर को उनसे भी इसकी पूरी उम्मीदें हैं। बता दें कि वह तीन हजार मीटर स्टेपल चेज और पांच हजार मीटर की दौड़ में प्रतिभाग करती हैं। ओलंपिक क्वालीफार्इंग के लिए 3000 मीटर स्टेपल चेज में 9:30:00 मिनट का टाइम है। जबकि पारुल का बेस्ट टाइम 9:56:00 मिनट है। इसी तरह 5000 मीटर की दौड़ में ओलंपिक क्वालीफाई टाइम 15:10:00 मिनट है। जिसमें वह मात्र 26 सेकेंड पीछे हैं। बताते चले कि पारुल अगस्त 2019 में ओलंपियन सुधा सिंह को 3000 मीटर स्टेपल चैज में हराकर स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं। इसके अलावा वर्ष 2019 में 23वें एशियन चैंपियनशिप दोहा में 5000 मीटर दौड़ में कांस्य पदक, नेपाल में हुए सैफ गेम्स में 5000 मीटर दौड़ रजत पदक, यूरोप में हुए वर्ल्ड रेलवे एथलेटिक्स चैंपियनशिप में 3000 मीटर और 800 मीटर में स्वर्ण पदक जीतकर उन्होंने देश का नाम रोशन किया है। इसके अलावा नेशनल और स्टेट में भी उनके नाम कई पदक शामिल हैं। फिलहाल में ऊटी में कैंप में शामिल हैं और मार्च में होने वाली सीनियर फेडरेशन की तैयारियों में जुटी हैं।
प्रफुल ने पॉवर लिफ्टिंग में बनाई पहचान
पश्चिमी उत्तर प्रदेश से हॉकी की पहली नेशनल महिला खिलाड़ी प्रफुल त्यागी क्षेत्रवाद और राजनीति का शिकार होने के बाद डिप्रेशन का शिकार हो गर्इं थी, लेकिन बावजूद इसके हार न मानते हुए उन्होंने अपना खेल बदला और परचम लहराया। मेरठ की प्रफुल त्यागी ने हॉकी से अपने खेल के कॅरियर की शुरूआत की थी। जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्तर तक अपना प्रदर्शन दिखाया। वहीं, वह लखनऊ साई हॉस्टल में भी रहीं, लेकिन यहां राजनीति का शिकार होने के कारण वह डिप्रेशन में चली गर्इं। लेकिन संघर्ष कर महीनों के डिप्रेशन से बाहर निकलते हुए उन्होंने पॉवर लिफ्टिंग में चुना और कई पदक झटका डाले। जिसमें उन्होंने कड़ा परिश्रम करते हुए वर्ष 2014 में स्टेट में रजत पदक और वर्ष 2015 व 2016 में नेशनल में स्वर्ण पदक झटका और खुद को साबित कर दिया। बताते चलें कि उन्हें फेडरेशन द्वारा आयरन लेडी का खिताब भी दिया जा चुका है। जो कि किसी भी खिलाड़ी को उसके वजन का तीन गुना ज्यादा वेट उठाने पर दिया जाता है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रफुल ने साल 2019 में जापान में हुई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक झटका। इसके अलावा वह फिलहाल खिलाड़ियों को नि:शुल्क प्रशिक्षण दे रही हैं।

