जनवाणी ब्यूरो ।
नई दिल्ली : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन(इसरो) ने आज 260 टन वजनी पीएसएलवी-C62 रॉकेट के जरिए पृथ्वी अवलोकन उपग्रह ‘अन्वेषा’ सहित 14 अन्य उपग्रहों का सफल प्रक्षेपण किया। यह वर्ष 2026 का इसरो का पहला मिशन है। श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किए गए सभी उपग्रहों को सूर्य-समकालिक ध्रुवीय कक्षा में स्थापित किया जाएगा।
‘अन्वेषा’ भारत की निगरानी और सुरक्षा क्षमताओं को नई मजबूती देगा। इसकी उन्नत क्षमताओं के कारण इसे भारत का “अंतरिक्ष से सीसीटीवी” भी कहा जा रहा है। यह उपग्रह दुश्मनों की गतिविधियों पर नजर रखने में अहम भूमिका निभाएगा।
दुश्मन की हर गतिविधि पर पैनी नजर
‘अन्वेषा’ पृथ्वी से लगभग 600 किलोमीटर ऊपर पोलर सन-सिंक्रोनस कक्षा में परिक्रमा करेगा। इसमें अत्याधुनिक हाइपरस्पेक्ट्रल सेंसर लगे हैं, जो सामान्य कैमरों की तुलना में कहीं अधिक सटीक और विस्तृत जानकारी प्रदान करते हैं। यह तकनीक जंगलों, बंकरों या छिपे ठिकानों में मौजूद दुश्मनों की पहचान करने में सक्षम है।
इस उपग्रह के माध्यम से आतंकियों, घुसपैठियों और देश विरोधी गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा सकेगी, जिससे भारतीय सुरक्षा बलों को रणनीतिक बढ़त मिलेगी।
डीआरडीओ द्वारा विकसित अत्याधुनिक सैटेलाइट
मिशन का प्रमुख उपग्रह EOS-N1, जिसे ‘अन्वेषा’ नाम दिया गया है, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा विकसित किया गया है। इसमें हाइपरस्पेक्ट्रल इमेजिंग तकनीक का उपयोग किया गया है, जो हर पिक्सल में सैकड़ों प्रकाश तरंगों को रिकॉर्ड करती है। इससे न केवल सैन्य निगरानी, बल्कि कृषि, मिट्टी की नमी, खनिज संसाधन, शहरी विकास और पर्यावरणीय बदलावों से जुड़ी बेहद सूक्ष्म जानकारी भी प्राप्त की जा सकेगी।
पीएसएलवी की 64वीं सफल उड़ान
इस मिशन में दो सॉलिड स्ट्रैप-ऑन मोटर वाले पीएसएलवी-डीएल वेरिएंट का इस्तेमाल किया गया। यह पीएसएलवी रॉकेट की 64वीं उड़ान है। पीएसएलवी इसरो का सबसे भरोसेमंद लॉन्च व्हीकल रहा है, जिसने चंद्रयान-1, मार्स ऑर्बिटर मिशन, आदित्य-L1 और एस्ट्रोसैट जैसे ऐतिहासिक मिशनों को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया है।
गौरतलब है कि वर्ष 2017 में पीएसएलवी ने एक ही मिशन में 104 उपग्रह लॉन्च कर विश्व रिकॉर्ड भी बनाया था।

