- जयंत चौधरी की नजदीकियां भाजपा से बढ़ी, लोकसभा सीटों को लेकर लगी मुहर
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: रालोद और भाजपा की नजदीकियों को लेकर पश्चिमी की सियासत कड़ाके की सर्दी में भी गर्म है। वहीं अखिलेश के किसानों को लेकर दिए गए बयान पर आखिर बुधवर को रालोद सुप्रीमो जयंत चौधरी ने चुप्पी तोड़ दी हैं। उन्होंने कहा कि किसान भोले हैं, लेकिन मूर्ख नहीं हैं। जयंत के इस बयान से अखिलेश यादव को झटका लग सकता हैं। इससे स्पष्ट हो गया है कि जयंत चौधरी की नजदीकियां भाजपा से बढ़ गई हैं।
कुछ लोकसभा सीटों को लेकर जो इनके बीच बातचीत चल रही हैं, उसमें फाइनल मुहर लगना बाकी हैं। इंडिया गठबंधन को एक और बड़ा झटका लगना अब तय माना जा रहा है। रालोद के एनडीए में जाने की चर्चाएं तेज हो गई हैं। दिल्ली में जयंत चौधरी ने भाजपा नेताओं से मुलाकात की है। मुजफ्फरनगर, हाथरस और बिजनौर सीट को लेकर सपा और रालोद के बीच दूरियां बन गईं।
राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के मुखिया चौधरी जयंत सिंह न सिर्फ भाजपा के संपर्क में हैं, बल्कि तीन सीटों पर सहमति होने का भी दावा किया जा रहा है। दरअसल, अखिलेश यादव ने बिजनौर, मुजफ्फरनगर और कैराना से सपा के प्रत्याशी को रालोद का सिंबल पर चुनाव लड़ाने के लिए कहा था। वैसे दिखावे के लिए रालोद के गठबंधन में ये सीट चली गई थी, लेकिन प्रत्याशी सपा के ही चुनाव लड़ते।

इसको लेकर रालोद-सपा के बीच दूरियां बढ़ गयी। अखिलेश की हठधर्मिता के चक्कर में जयंत चौधरी भाजपा के करीब पहुंच गए, जिसके बाद भाजपा ने जयंत चौधरी को चार सीटों का आॅफर भी कर दिया। इसी वजह से अखिलेश को जयंत के भाजपा से नजदीकियां बढ़ाने से बड़ा झटका लगेगा।
रालोद के पार्टी अकाउंट से डाली जवाबी पोस्ट
सपा मुखिया के बयान के जवाब में रालोद पार्टी के एक्स अकाउंट से एक पोस्ट साझा की गई, जिसमें लिखा है कि हमारे किसान भोले जरूर हैं पर मूर्ख नहीं हैं। वे बहुत समझदार हैं और सशक्त हैं।
यूं बिगड़ी बात
भाजपा पश्चिमी यूपी में मुस्लिम बाहुल्य सीटों के लिए रालोद को साधना चाहती है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव रालोद से गठबंधन की घोषणा कर चुके हैं। सीटें चिह्नित करने और सपा की ओर से तीन सीटों पर रालोद के चुनाव निशान पर अपने उम्मीदवार खड़ा करने की शर्त पर पेंच फंस गया। सपा चाहती है कि कैराना, मुजफ्फरनगर और बिजनौर में प्रत्याशी सपा का हो, जो रालोद के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरे।
सपा के समक्ष मुजफ्फरनगर सीट पर रालोद ने दावा ठोका था, जहां बीते चुनाव में दिवंगत अजीत सिंह महज छह हजार मतों से हार गए थे। रालोद नेताओं ने कैराना और बिजनौर सीट सपा के बताए प्रत्याशियों को देने पर सहमति भी दे दी थी, लेकिन मुजफ्फरनगर और हाथरस सीट को लेकर दोनों दलों के बीच दूरियां बन गईं। इसी दौरान चर्चा शुरू हो गई कि रालोद अध्यक्ष की भाजपा से गठबंधन की बात हुई है।

