जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: जितेन्द्र सिंह बाजवा ने कहा कि होटल इंड्रस्ट्री के लिए कोई राहत नहीं मांग रहे हैं। फिक्स बिल आ रहा है, वो भी बंद होटल में। जो चीजे प्रयोग नहीं की गई, उसके बाद भी फिक्स चार्ज देने पड़ रहे हैं। कोरोना काल में 50 से 60 लाख रुपये बंद होटल मालिकों ने सरकार को दिये हैं, लेकिन राहत कुछ नहीं। ‘बार’ का लाइसेंस, दस माह ‘बार’ बंद रहे, लेकिन चार्ज 12 माह का 14 लाख रुपये सरकार ने लिये।
इसके लिए राहत के तौर पर आगे बढ़ाया जा सकता था। यह मांग जायज थी। इसमें ‘बार’ संचालक सरकार पर बोझ बनना नहीं चाहते, बल्कि बोझ खुद उठा लेंगे। जो छूट देनी चाहिए थी, वह नहीं दी। ऊर्जा निगम ने भी फिक्स चार्ज तक में छूट नहीं दी। छोटे होटल लीज पर होते हैं, उनका किराया तक नहीं दिया जा सका।
यह साइकिल है, इसको आपदा कहते हैं। होटल इड्रस्ट्री तो अभी भी ठीक से नहीं चल पा रही है। एक नई चीज आई है कि 50 प्रतिशत पर ये समझ नहीं आ रहा है कि कितने कमरे चलाये। अधिकारी जो लिखकर भेज देते हैं, वहीं वेद वाक्य बन जाता है।
उसके पीछे की गहराई और सोच कहीं दिखाई नहीं देती। जैसा कि बिजली के बिल और बैंकों का ऋण। जिन लोगों ने बैंकों से लोन लिया। चार व साढे तीन प्रतिशत पर एफडी पर ब्याज दे रहे हैं, लेकिन बिजनेस मैन से बारह प्रतिशत ब्याज बैंक लेता है।
फिर भी कोविड कॉल में ब्याज में क्या बैंक छूट नहीं दे सकते थे। 90 प्रतिशत लोन होटल इंडस्ट्री के हैं, जो एनपीए हो चुके हैं। हालात यह है कि कोरोना ने होटल इंडस्ट्री के लोगों को खत्म कर दिया। क्योंकि आने वाले 20 वर्षों तक उन्हें लोन नहीं मिलेगा।
उससे बचा जा सकता था, लेकिन बैंकों ने निर्दयता दिखाई हैं। ऐसे में सरकार को बैंकों पर चाबुक चलानी चाहिए थी, जो नहीं चली। बिजनेस मैन को बैंकों ने खत्म कर दिया है। बैंकों की शर्मनाक हरकत यह रही कि कोरोना कॉल के तीन माह की किश्त एक साथ मांग ली।
तीन माह बाद ऐसा कौन सा जादुई छड़ी चल गई, जो एक दिन में जमा कर देगा। बैंकों ने कोविड कॉल का पालन गंदे तरीके से किया है। उन्होंने कहा कि अधिकारी वर्ग की इस तरह की मानसिकता रही है। बिजनेसमैन बैंकों से लोन लेकर किसी तरह से अपना कार्य करते हैं, लेकिन अधिकारी वर्ग बिजनेसमैन को धनकुबैर समझता है। किस तरह से बिजनेसमैन अपना काम चला रहा है।
समय से लोन की किश्त दे रहा है या फिर नहीं। सौ व दौ सौ लोगों को वेतन दे रहा है। इसको उस तरह से नहीं देखा जाना चाहिए। कोई धन लगा रहा है। उसे सुविधाओं से देखो। अव्यवहारिक निर्णय हो रहे हैं अधिकारियों के। अब ये देखिये कि 50 व 100 लोगों की शादी की अनुमति कर दी।
इसमें स्कवायर फिट के हिसाब से अनुमति देनी चाहिए। बड़ा होल है, उसके हिसाब से निर्णय करना चाहिए। आप पांच हजार स्कवायर फुट में पचास आदमी दे रहे हैं। सरकारी रोडवेज बस में 40 आदमी बैठकर जा रहे हैं। जो मेरठ से लखनऊ तक सफर 12 घंटे का कर रहे हैं। विवाह समारोह के दो घंटे के कार्यक्रम में सिर्फ 50 लोगों की एंट्री दे रहे हैं, यह अव्यवहारिक निर्णय है।
इसको सोच कर लागू करने चाहिए। ये निर्णय सरकार के खिलाफ जाते हैं। अधिकारियों को इस पर पुन: विचार करना चाहिए। अधिकारी वर्ग को ऐसे निर्णयों पर सोच कर निर्णय लेने चाहिए, क्योंकि ऐसे निर्णय सरकार की छवि को खराब करते हैं। सरकार अच्छा काम कर रही हैं, लेकिन अधिकारी वर्ग को सोचना चाहिए कि सरकार की छवि खराब नहीं करें। अच्छा काम कर रही है सरकार।
गॉडविन ग्रुप के चेयरमैन को उत्कृष्टता का सम्मान
एनएच-58 स्थित पांच सितारा गॉडविन होटल में न्यूज वन इंडिया द्वारा आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक सरोकार व समाज में अग्रणीय भूमिका निभाने गॉडविन ग्रुप के चेयरमैन जितेन्द्र सिंह बाजवा को उत्कृष्टता सम्मान से नवाजा गया। कार्यक्रम में कमिश्नर सुरेन्द्र कुमार, आईजी रेंज प्रवीण कुमार, डीएम के. बालाजी, केन्द्रीय राज्यमंत्री डा. संजीव बालियान, प्रदेश के राज्यमंत्री अतुल गर्ग, पूर्व विधायक योगेश वर्मा, भाजपा विधायक डा. सोमेन्द्र तोमर, व्यापारी नेता अजय गुप्ता, व्यापारी नेता आंशू, पूर्व कैबिनेट मंत्री शाहिद मंजूर, मेयर सुनीता वर्मा, कॉपरेटिव बैंक के चेयरमैन मनिंदरपाल सिंह, सपा नेता अतुल प्रधान आदि मौजूद रहे।


