
कर्नाटक विधानसभा चुनाव स्वयं को अजेय समझने वाली भारतीय जनता पार्टी बुरी तरह धराशायी हो गई है। भाजपा ‘कांग्रेस मुक्त’ भारत बनाने के सपने देखती रहती है, उसी कांग्रेस ने शानदार पूर्ण बहुमत हासिल कर राज्य की सत्ता पर अधिकार जमा लिया है। इन चुनाव परिणामों के तरह तरह के विश्लेषण हो रहे हैं। परन्तु एक बात तो साफ है कि राज्य के जागरूक, धर्मनिरपेक्ष मतदाताओं ने सामूहिक रूप से नफरत की राजनीति व ऐसे प्रयासों को,फुजूल की बयानबाजियों तथा धार्मिक भावनाओं के बहाने वोट हासिल करने के सभी प्रयासों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। कर्नाटक में सत्तारूढ़ रही जो भाजपा भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरी थी, चुनाव प्रचार के दौरान अपनी उपलब्धियों का जिक्र करने के बजाय अपनी चिरपरिचित रणनीति के तहत कांग्रेस, नेहरू गांधी परिवार व उसके पिछले शासनकाल पर ही ज्यादा हमलावर रही।