- भाजपा शहर और किठौर विधानसभा में पिछड़ी, बहुत कम वोट मिले
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: भाजपा के लिए एक बार फिर कैंट विधानसभा खेवनहार साबित हुई। भाजपा को शहर और किठौर विधानसभा में अपेक्षा से काफी कम वोट मिले। दक्षिण विधानसभा में भी भाजपा काफी पिछड़ी रही, लेकिन कैंट विधानसभा क्षेत्र की जनता ने फिर खेवनहार साबित हुई। उसने ही अरुण गोविल की नैया पार लगायी। हालांकि कैंट विधानसभा क्षेत्र दलित बाहुल्य है, इसके बावजूद कैंट क्षेत्र में भाजपा को खूब मतदान हुआ।
दरअसल, विधानसभा चुनाव में जो मत अमित अग्रवाल को मिले थे, उससे 140 मत कम भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल को मिले। अरुण गोविल को 161892 मत कैंट विधानसभा में मिले हैं। साथ ही कैंट विधानसभा क्षेत्र की जनता ने 96500 वोटों की लीड़ भाजपा को दिलाई। दरअसल, कैंट विधानसभा क्षेत्र भाजपा की जीत का रास्ता तय करता रहा हैं। वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा के राजेन्द्र अग्रवाल को 1.18 लाख की लीड दिलाकर जीत दर्ज करा दी थी। क्योंकि तब भी भाजपा के राजेन्द्र अग्रवाल किठौर, मेरठ शहर, मेरठ दक्षिण, हापुड़ विधानसभा क्षेत्रों में पराजय का मुंह देखना पड़ा था।
इसी तरह से 2024 के लोकसभा चुनाव में भी भाजपा को कैंट विधानसभा क्षेत्र से ही जीत का मंत्र मिला। कैंट विधानसभा क्षेत्र ने एक बार फिर दिखा दिया कि वो भाजपा की छपरौली हैं। भाजपा की छपरौली को भेद पाना इतना आसान नहीं हैं। विपक्षी दलों के पास ऐसा कोई मंत्र नहीं है, जिसके जरिये भाजपा की छपरौली में सेंध लगाई जा सके। भाजपा पर मेरठ कैंट विधानसभा में जिस तरह से वोटों की बारिश हुई, उसकी उम्मीद इस बार कम ही की जा रही थी। क्योंकि कैंट विधानसभा क्षेत्र में भी वोट प्रतिशत कम रहा। इसको लेकर भाजपा नेताओं में खासी चिंता दिखाई दे रही थी, लेकिन मतगणना के दौरान जिस तरह से इलेक्ट्रिक मशीनों ने वोट उगली, उसके बाद तो भाजपा नेताओं की बांछे खिल गई।
क्योंकि कैंट विधानसभा क्षेत्र ही भाजपा प्रत्याशी अरुण गोविल की जीत का आधार बन गया। फिर भाजपा हाईकमान की भी इसी सीट को लेकर पहले दिन से निगाहें लगी हुई थी। क्योंकि भाजपा हाईकमान ने अभिनेता अरुण गोविल को चुनाव मैदान में उतारकर सबको चौंका दिया था। भाजपा ने ‘राम’ के चेहरे के रूप में अरुण गोविल को पेश किया। क्योंकि अरुण गोविल टीवी सीरियल रामायण में राम का किरदार निभा चुके थे, जिसके बाद अरुण गोविल के बेहद लोकप्रियता मिली थी।
शहर विधानसभा से सपा प्रत्याशी को मिली बंपर वोट
समाजवादी पार्टी के लिए शहर विधानसभा राजनीति का गढ़ हैं। 2019 के लोकसभा चुनाव में भी शहर विधानसभा सीट से सपा-बसपा के संयुक्त प्रत्याशी हाजी याकूब कुरैशी को बंपर वोट मिली थी। इस बार सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा को भी 37 हजार से ज्यादा वोटों की लीड शहर विधानसभा से मिली। हालांकि कम मत प्रतिशत के चलते ये लीड का ग्राफ नीचे गया, लेकिन सपा के लिए एक बार फिर से शहर विधानसभा क्षेत्र ने ये साबित किया कि वो सपा का गढ़ हैं।
दरअसल, सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा ने अच्छा चुनाव लड़ा। कैंट विधानसभा को छोड़ दे तो बाकी विधानसभा में सपा प्रत्याशी सुनीता वर्मा जीत कर ही आयी, लेकिन कैंट में जैसे ही पहुंची, वहां धड़ाम हो गई। भाजपा के कैंट विधानसभा की तरह से सपा ने यदि शहर विधानसभा में मत प्रतिशत बढ़वाया होता तो शायद चुनाव परिणाम जुदा हो सकते थे, लेकिन सपा नेताओं ने इस पर पूरे चुनाव में ही फोकस नहीं किया कि किस विधानसभा सीट से उनकी वोट बढ़ाई जा सकती हैं।
इसकी कोई तैयारी सपा के संगठन के स्तर से भी नहीं की गई थी। सपा का संगठन भी चुनाव में तैयारी के नाम पर कहीं दिखाई नहीं दिया। सपा ने जीती हुई बाजी आखिर कैसे हारी ? ये भी बड़ा सवाल हैं। बहरहाल, सपा की शहर विधानसभा की जनता ने एक बार फिर से ये साबित कर दिया कि वो सपा का गढ़ हैं और रहेगी। रफीक अंसारी यहां से दो बार विधायक बन चुके हैं। क्योंकि शहर विधानसभा मुस्लिम बाहुल्य क्षेत्र हैं, जिसके चलते मुस्लिमों का एक तरफा मतदान होता रहा हैं।

