- बिना ड्यूटी के भी लोगों की मदद के लिए हर समय रहती है तैयार
- 75 दिन में 76 गुमशुदा बच्चे तलाशने की बदौलत आउट आफ र्टन प्रमोशन देकर एएसआई बनाया
जनवाणी संवादाता |
बड़ौत: किरठल की बहू सीमा ढाका ने 75 दिन में 76 गुमशुदा बच्चों को तलाशकर उनके परिजनों से मिलाया। उनके इस कार्य से दिल्ली पुलिस के साथ ससुराल वाले भी गौरव महसूस कर रहे है। गली-गली में चर्चा फैली हुई है। ससुराल लौटने पर सीमा का जोरदार स्वागत किया जाएगा।
मुजफ्फरनगर जनपद के भाजू गांव निवासी सीमा ढाका वर्ष 2006 में दिल्ली पुलिस में सिपाही के पद पर भर्ती हुई थी। जिनकी शादी वर्ष 2009 में किरठल निवासी अनित ढाका के साथ हुई थी। अनित भी दिल्ली पुलिस में 2006 में ही सिपाही पद पर भर्ती हुआ था। फिलहाल प्रमोशन होकर हैड कांस्टेबल है।
बताया कि सीमा ढाका के अंदर बचपने से ही दूसरों की मदद करने का जुनून है। ड्यूटी से हटकर भी वह समाजहित के लिए कार्य करती है। दूसरों की मदद करना वह अपनी ड्यूटी समझती है। समाजहित के कार्य देखकर शुरू से ही सीमा के परिजन व ससुराल बहुत खुश है। जिसका नतीजा यह हुआ कि उन्होंने मात्र 75 दिन में 76 गुमशुदा बच्चों को तलाशकर उनके परिजनों से मिला दिया।
बच्चों के परिजनों की ओर से उन्हें बधाई मिल रही है। उनके इस समर्पण व प्रेरणादाई कार्य से दिल्ली पुलिस भी गर्व महसूस कर रही है। इस कार्य की बदौलत दिल्ली पुलिस ने आउट आफ र्टन प्रमोशन देकर सीमा को एएसआई बना दिया। उनके कार्य से ससुराल वाले भी गौरांवित महसूस कर रहे है।
वापस लौटने पर बहू का जोरदार स्वागत किया जाएगा। जिसके लिए सभी पलक पावड़े बिछाए बैठे है। सीमा फिलहाल समयपुर बादली में तैनात है और उनके पति अनित ढाका रोहिणी में तैनात है। बिछड़े बच्चों को उनके घर वालों से मिलाने के किए गए कार्य व प्रमोशन पर घर व बाहर वालों से सीमा को फोन पर ढेरों बधाई मिल रही है। अनित के पिता वेदपाल एक किसान है और भाई सचिन आर्मी में नायब सूबेदार है।

