- 20 दिन से बंद पड़ी है टंकी की पाइप लाइन, नए सबमर्सिबल को भी नहीं किया जा सका शुरू
जनवाणी संवाददाता |
सरधना: नगर के कमरानवाबान मोहल्ले में बीमारी ने तो पीछा छोड़ दिया है। मगर पानी की किल्लत लोगों को तड़पा रही है। 20 दिन से टैंकरों के सहारे सैकड़ों घरों को जलापूर्ति की जा रही है। जो दैनिक उपयोग के लिए काफी नहीं हो रही है। यहां के लोगों को पानी की भारी किल्लत से जूझना पड़ रहा है। वहीं नगर पालिका द्वारा लगवाया गया नया सबमर्सिबल चालू तो हो गया है, लेकिन पाइप लाइन से अभी तक नहीं जोड़ा जा सका है। सबमर्सिबल भूमिगत की मांग के चलते यह काम भी अधर में लटका हुआ है। फिलहाल कमरानवाबान के लोग भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं।
कमरानवाबान मोहल्ले में करीब एक महीना पहले उल्टी-दस्त ने कहर बरपाना शुरू किया था। यहां बड़ी संख्या में लोग बीमारी की चपेट में आ गए थे। लोगों का कहना था कि दूषित पानी के सेवन से बीमारी फैल रही है। डीएम दीपक मीणा, सीडीओ नूपुर गोयल समेत जल विभाग के तमाम अधिकारियों ने मौके पर पहुंच कर जायजा लिया था। डीएम ने नगर पालिका को जल्द से जल्द समस्रूा का समाधान कराने को कहा था। दूषित पानी के शक में पुराने सबमर्सिबल को बंद कर दिया गया था। तभी से यहां टंकी की पाइप लाइन में सप्लाई बंद है। सैकड़ों घरों को टैंकरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है। मगर इन टैंकरों से लोगों के पानी की जरूरत पूरी नहीं हो पा रही है।
बाल्टी से पानी ढोकर लोग किसी तरह अपनी आवश्यकता की पूर्ति कर रहे हैं। बस्ती के लोग पानी की भारी किल्लत से जूझ रहे हैं। करीब बीस दिन बीत जाने के बाद भी कमरानवाबान के लोगों का जल संकट से जूझ रहे हैं। नगर पालिका द्वारा मस्जिद के पास सबमर्सिबल लगवाया गया है। मगर इसको भी अभी तक पाइप लाइन से नहीं जोड़ा जा सका है। कुछ लोग सबमर्सिबल को भूमिगत कराने की मांग कर रहे हैं। विरोध के चलते कनेक्टिविटी नहीं हो पा रही है। फिल्हाल यहां के लोग भारी परेशानी का सामना कर रहे हैं। जिससे लोगों में पालिका के खिलाफ रोष व्याप्त है।
बिना लाइसेंस संचालित मेडिकल स्टोर पर देखे जा रहे मरीज
फलावदा: विभागीय अफसरों की अनुकंपा के चलते नगर में जगह-जगह चल रहे मेडिकल स्टोर नियम कायदों को ठेंगा दिखा रहे हैं। मेडिकल स्टोर पर रोगियों का इलाज तक किया जा रहा है। सीएम हेल्प लाइन पोर्टल पर अनियमितताओं के खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बावजूद विभाग द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। नगर में जगह-जगह मेडीकल स्टोर खुल रहे हैं। आलम ये है कि मानकों के खिलाफ अशिक्षित लोग बिना फार्मोसिस्ट के दवाइयां फरोख्त कर रहे हैं।
नियम कायदों को ठेंगा दिखाते हुए कई स्टोर संचालक प्रतिबंधित दवाइयां भी विक्रय कर रहे हैं। मुनाफाखोरी के चलते मेडिकल स्टोर पर मरीजों का इलाज भी किया जा रहा है। गत दिवस स्वास्थ्य विभाग की छापेमारी के दौरान च मवाना के प्रभारी डा. अरुण ने एक मेडिकल स्टोर की जांच की। स्टोर संचालक शैक्षिक योग्यता के बारे में सवाल करने पर बगले झांकने लगा। सीएससी प्रभारी ने तत्काल डीआई को अवगत कराया, लेकिन सीएचसी प्रभारी की बात का कोई असर नहीं दिखा।
वहीं, कुछ दिन पूर्व कस्बे में संचालित एक मेडिकल स्टोर के खिलाफ दर्ज शिकायत पर भी कोई कार्रवाई नहीं हुई। शिकायत में आरोप है कि उक्त मेडिकल स्टोर पर एक्सपायर दवाइयां बेची जा रही है। जेनरिक दवाइयों को मनमाने रेट से बचा जा रहा है। मेडिकल स्टोर पर फ्रीज भी नहीं रखी गई है। सीएम पोर्टल पर दर्ज शिकायत के बावजूद उक्त स्टोर संचालक के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। बताया गया है कि स्वास्थ्य विभाग द्वारा जांच के नाम पर लीपापोती कर दी गई है।
जगह-जगह खुले मेडिकल स्टोर विभाग के गठजोड़ के चलते काफी फल फूल रहे हैं। सूत्र बताते हैं कि कई मेडिकल स्टोर पर नशे का कारोबार भी चल रहा है, लेकिन जिम्मेदार अफसर अवांछनीय कारणों से अपनी आंखें मूंदे हुए हैं। नगर में झोलाछाप डॉक्टर के साथ मेडिकल स्टोर संचालक भी जन स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। इस संबंध में ड्रग इंस्पेक्टर प्रियंका गर्ग से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।

