- लड्डू बेरों की पैदावार हो रही कम, रकबा भी हो रहा कम
जनवाणी संवाददाता |
हसनपुर लुहारी: देशभर में अपनी मिठास के बल पर डंका बजवा चुके लड्डू बेर लुहारी अब विलुप्त होने के कगार पर हैं। पूरे उत्तर भारत के इलाकों में लड्डू बेर की जबरदस्त मांग रहती थी लेकिन अब बेर की इस कीमती नस्ल पर बीमारियों और कृषि विभाग की अनदेखी भारी पड़ रही है।

इसका रकबा दिनों दिन सिकुड़ता जा रहा है। बेर की पैदावार कम होने से इसके स्वादिष्ट जायके को लोग तरस रहे हैं। आलम यह है कि दूसरे किस्म के बेर को लड्डू बेर लुहारी का कह कर बेचा जा रहा है। लेकिन इसके स्वाद की पहचान रखने वाले कुछ की पलों में बता देते हैं कि यह लुहारी बेर की मिठास है या नहीं।
देश-विदेश तक बरसों से जाता है बेर
जलालाबाद व इससे सटे गांव हसनपुर लुहारी में यहां रहे लोग आज भी थोड़े-बहुत बेर बचाकर पाकिस्तान अपनी रिश्तेदारियों में भेज ही देते हैं। वहीं सऊदी अरब, नेपाल, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड समेत कई राज्यों में यहां के बेर लोग अपने करीबियों को तोहफे में भेजते रहे हैं।
पेमदी कहो या लड्डू बेर
दुर्लभ पेमदी प्रजाति का मीठा बेर है। पाकिस्तान में पैदा होने वाली बेर की नस्ल को भी हसनपुरलुहारी का लडडू बेर आवाज से बेचा जाता है। पड़ोसी देश में हसनपुरलुहारी लड्डूू बेर भारत की शान बढ़ा रहा है। पेमदी इतना मीठा होता है कि इसे लड्डू बेर कहा जाता है।
ऐसे हुई बेरियों की शुरूआत
इस्लाम धर्म में बेर को पाक फल माना जाता है। शायद यहीं वजह रही होगी कि जलालाबाद व लुहारी पर अपना शासन स्थापित करने के बाद यहां के नवाब परिवारों ने उत्तम व मीठे बेरों की नस्ल की खोज की। दोनों नगरों को बेरों के बागों से ढक दिया गया। नवाब परिवार द्वारा यह प्रजातियां अफगानिस्तान से मंगवाकर रोपवाई गई। हालत यह हुई ये बेर अपनी मिठास के बल पर देशभर में प्रसिद्ध हो गए।

