Tuesday, March 3, 2026
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माफिया डान सुशील मूछ जेल से छूटकर हुआ अंडरग्राउंड

  • मुजफ्फरनगर से हुआ था आंबेडकरनगर जेल में शिफ्ट; हाईकोर्ट से मिली जमानत

जनवाणी संवाददाता |

मुजफ्फरनगर: गैंगस्टर के मुकदमे में आंबेडकर नगर जेल में बंद अंतर्राज्यीय माफिया डान सुशील मूछ जमानत पर छूटकर अंडरग्राउंड हो गया। मूछ इस समय कहां है किसी को इसकी जानकारी नहीं। हालांकि उसकी उसकी जमानत प्रेमपुरी के रहने वाले एक व्यक्ति ने ली है। आपराधिक दुनिया में बड़ा नाम रखने वाले सुशील मूछ पर 40 साल के दौरान हत्या, लूट और रंगदारी आदि के 52 मुकदमे दर्ज हुए।

थाना भोपा में 2003 में दर्ज गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में कोर्ट ने सुशील सिंह उर्फ मूछ के गैर जमानती वारंट जारी किये थे। जिसके बाद मूछ ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। 8 जनवरी 2022 को सुशील मूछ को जिला जेल से आंबेडकर नगर जेल शिफ्ट कर दिया गया था। 3 फरवरी 2022 को गैंगस्टर कोर्ट से मूछ की जमानत खारिज हो गई थी। तब से सुशील मूछ आंबेडकर नगर जेल में ही निरुद्ध था। मूछ पर हत्या के 12 मुकदमे दर्ज हैं। गैंगस्टर कोर्ट से जमानत खारिज होने के बाद सुशील मूछ की जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल की गई थी। जहां से उसकी जमानत स्वीकार होने के बाद 6 अगस्त 2022 को आंबेडकर नगर जेल से उसकी रिहाई हो गई थी। मूछ गुपचुप जेल से रिहा होकर अंडरग्राउंड हो गया। उसके बाद से आज तक किसी को मूछ के बारे में कोई जानकारी नहीं है। हांलाकि मूछ की जमानत शहर कोतवाली क्षेत्र के प्रेमपुरी निवासी सुरेन्द्र सिंह पुत्र दरियावसिंह ने ली थी। जिसकी तस्दीक शहर कोतवाली पुलिस ने की थी।

मूछ ने 1973 में रखा था क्राइम की दुनिया में कदम

माफिया डान मूछ ने अब से करीब 50 साल पहले भैंसी के कलीराम की हत्या से क्राइम की दुनिया में कदम रखा था, लेकिन उस केस में उसका नाम नहीं खुला था। 1983 में मूछ ने छात्र रहते महेश शुक्ला की हत्या की। उसके विरुद्ध थाना सिविल लाइन में हत्या का मुकदमा दर्ज हुआ था। सुशील जब मुजफ्फरनगर के जाट कॉलेज में पढ़ता था तो उसका नाम मूछ पड़ा। उस समय सुशील नाम के दो छात्र क्लास में थे, लेकिन मूछ होने के कारण उसका नाम सुशील मूछ पड़ा। वहीं पर एक बार सुरेंद्र कूकड़ा, शोभाराम यादव और उदयवीर केल ने उस पर हमला भी किया था।

1991 मे कर दी थी गई सुरेंद्र कूकड़ा की हत्या

सुशील मूछ ने 1991 में पूर्व ब्लॉक प्रमुख सुरेंद्र कूकड़ा की उसके 4 साथियों सहित नई मंडी में हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में भूपेन्द्र बाफर, यशपाल राठी व धर्मेन्द्र हिसावतड़ी भी उसके साथ थे। सुरेंद्र कूकड़ा और सुशील मूछ के बीच लंबे समय तक गैंगवार के चलते एक दर्जन हत्याएं हुई। सुरेंद्र कूकड़ा के लड़के कुलदीप की हत्या 1997 में हुई। 1999 में सुरेंद्र कूकड़ा के लड़के कुलदीप के दोस्त नवीन और मनीष निवासी मीरापुर की हत्या सुशील मूछ गैंग थाना खतौली क्षेत्र में की थी। इससे पहले 1992 में वकील हरि गर्ग तथा 1994 में उनके भाई की हत्या में सुशील मूछ का नाम आया। उन दिनों वह देहरादून जेल में ही था। 2003 में मूछ जेल से बाहर आया और 5 साल तक अपराध करता रहा। 1998 से कुख्यात नफीस कालिया से मूछ का गैंगवार चला। इसमें पहले उसने नफीस के साथियों को एक-एक कर मरवाया। 2004 में नफीस की भी हत्या कर दी गई।

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