- किसी की भी मौत होने के बाद मौत की वजह अक्सर बन जाती है पहेली
- आपराधिक केसों-जैसे हत्या के मामलों में पुलिस को सिर्फ होता है फोरेंसिक जांच का सहारा
जनवाणी संवाददाता |
मेरठ: किसी की हत्या हो जाए और मामला पुलिस से जुड़ जाए तो यह चुनौतीपूर्ण हो जाता है कि मौत की वजह क्या रही? इसको लेकर मेडिकल साइंस की फोरेंसिक जांच का अहम् रोल रहता है। जानते है फोरेंसिक जांच में जांच करने वाले डाक्टर किन बातों को ध्यान में रखते हुए अपनी रिपोर्ट तैयार करते हैं। मेडिकल के फोरेंसिक विभाग में पढ़ने वाले छात्रों को किसी भी मौत की वजह जानने की पढ़ाई कराई जाती हैं।
फोरेंसिक जांच का कानून को पालन कराने में भी अहम् किरदार रहता हैं। जब किसी की मौत अप्राकृतिक तरीके से होती है तो मौत की वजह जानने के लिए मेडिकल साइंस की फोरेंसिक जांच का ही सहारा होता है। मनुष्य को मरे हुए कितना समय हो गया है व मौत की वजह क्या है? जैसे सवालों से पर्दा उठानें में फोरेंसिक जांच काफी अहम् होती है। रत्ती नाम का पौधा जो काफी घातक जहरीला होता है आमतौर पर आसानी से झाड़ियों में मिल जाता है।
इस पौधे के सेवन से बच्चों की मौत होने के कई मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। इसके पौधे पर गहरे लाल रंग के छोटे फलनुमा दाने होते हैं। जिसको देखकर बच्चे आसानी से इसकी तरफ आकृषित हो जाते हैं और इसे खा लेते हैं। इस दानों का एक पीस भी किसी को पीसकर दे दिया जाए तो उससे मौत हो जाती है। ऐसे में अक्सर बच्चों की जहर से मौत होने की बात सामने आती है, लेकिन यह जहर किसी ने दिया है या बच्चों ने खुद इसे खाया है
इसका सच फोरेंसिक जांच से ही सामने आता है। विवाहित महिलाओं द्वारा माथे पर लगाया जाने वाला सिंदूर भी जहर ही होता है। सिंदूर को लगाने से पहले उसकी मात्रा पर भी विशेष ध्यान रखना चाहिए। ज्यादा लगाने या सांसों द्वारा शरीर में प्रवेश करने पर यह जानलेवा बन जाता है। इससे महिलाओं में एनिमिया, बाल झड़ने जैसे मामले सामने आने लगते हैं और अंत में यह मौत का कारण बन सकता हैं।
किसी की मौत यदि सांप के जहर से होती है तो उसकी पहचान भी फोरेंसिक जांच से ही होती है। दो तरह के सांप एक जहरीले व बिना जहर वाले। ज्यादातर सांप जहरीले नहीं होते, लेकिन सांप को जहरीला मानकर मार दिया जाता है। सवाल उठता है कैसे पता चले कि किसी सांप ने यदि किसी को काटा है तो वह जहरीला है या नहीं। इसके लिए सांप के काटने से होने वाली मौत में शव की फोरेंसिक जांच से पता चलता है।
मौत की वजह क्या रही होगी? बिना जहर वाले सांप के काटने से बनने वाले निशान अर्द्ध गोलाकार होते हैं। जबकि जहरीले सांप के काटने पर काटे गए स्थान पर केवल दो निशान ही मिलते हैं। सांप के काटने के बाद इंसान की मौत अधिकतर सांप के जहर के बजाय घबराहट में होती है।
गोली लगने से होने वाली मौत की पहचान
यदि किसी की मौत गोली लगने से होती है तो उसे कितनी दूर से गोली मारी गई है, कौन-सी गोली थी, जो जानलेवा साबित हुई। इसकी पहचान भी फोरेंसिक जांच से होती है। गोली लगने के निशान पर यदि स्टार बनता है तो यह साबित करता है कि गोली नजदीक से मारी गई है। जितनी दूरी बढ़ती जाएगी तो निशान बढ़ता जाता है।
लाश का सिर मिलने पर उसकी पहचान
हत्या होने पर केवल लाश का सड़ा-गला सिर मिलता है तो यह पहचान करना मुश्किल होता है कि मरने वाला पुरुष है या महिला। ऐसे में फोरेंसिक जांच से पता लगाया जाता है कि मृतक किस लिंग का है। सिर में कुछ ऐसी हड्डियां होती है, जो केवल या तो पुरुष या महिलाओं में होती हैं। इसी तरह कूल्हे की हड्डी से भी लिंग का पता लगाया जाता है।
मेडिकल साइंस में फोरेंसिक विभाग का काफी अहम् योगदान है। हत्याओं का खुलासा करने, मौत की वजह व कानूनी रूप से हत्यारे को क्या सजा मिले? इसके लिए फोरेंसिक जांच ही एकमात्र विकल्प है। फोरेंसिक जांच के जरिए कई बड़े मामलों में अपराधियों को सजा होती है। जो मेडिकल साइंस के लिए बड़ी बात है। -डा. आरसी गुप्ता, प्रिंसीपल मेडिकल कॉलेज

