Thursday, March 5, 2026
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मेरठ की सबसे बड़ी खबर, मलियाना दंगों में 39 आरोपी हुए बरी

जनवाणी संवाददाता |

मेरठ: अपर जिला जज कोर्ट सख्या 6 लखविन्दर सूद ने 1987 में थाना टीपीनगर क्षेत्र के अन्तर्गत मलियाना होली चौक में हुए साम्प्रदायिक दंगों के मामले में 39 आरोपियों को बरी करने के आदेश दिए हैं।

23 मई 1987 को मलियाना होली चौक पर साम्प्रदायिक दंगे हुए थे, जिनमें वादी याकूब अली पुत्र नजीर निवासी मलियाना ने 93 लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज कराया था। इस मामले में करीब 63 लोग मारे गये थे और 100 से भी ज्यादा घायल हुए थे। रिपोर्ट में वादी ने लिखाया था कि सभी लोग इकठ्ठा होकर आगजनी करते हुए आये और मारने के उद्देश्य से मारपीट और हमला कर दिया था।

मुसलमानों को टारगेट बनाया गया और गोली बरसायी गयी थी। जिसमें 63 से ज्यादा लोग मारे गये थे। इस मुकदमे का अपराध सं0 136 सन 1987 में दर्ज हुआ। इस मामले में दौरान केस सुनवाई के दौरान करीब 40 लोगों की मृत्यु हो चुकी है और करीब 39 लोग मुकदमे में आ रहे हैं। जबकि बाकी लोगों का कोई अता-पता नही चल पा रहा है।

इस मामले में वादी सहित 10 गवाहों ने अदालत में अपनी गवाही दी। लेकिन अभियोजन आरोपियों के खिलाफ केस साबित करने में सफल नही रहा। अदालत ने गवाहों की गवाही और पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर मौजूद 39 आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए आरोपी कैलाश भारती, कालीचरण, सुनील, प्रदीप, धर्मपाल, विक्रम, तिलकराम, ताराचंद, दयाचंद, प्रकाश, रामजी लाल, गरीबदास, भिकारी, संतराम, महेन्द्र, वीर सिंह, राकेश, जीते, कुन्नू, शशी, नरेन्द्र, कान्ति, त्रिलोक चंद, ओमप्रकाश, कन्हैया, अशोक, रूपचंद, ओमप्रकाश, पूरन, नरेश कुमार, राकेश, केन्द्र प्रकाश, सतीश, लख्मी व विजेन्द्र को बरी करने के आदेश दिए हैं।

22 मई 1987 को हाशिमपुरा कांड के अगले दिन मलियाना में खूनखराबा हुआ था। मलियाना के पीड़ित परिवारों में आज भी वह दर्द देखा जा सकता है। इतने साल बाद अपनों को खो चुके लोगों में न्याय की आस भी खत्म हो गई है।

मलियाना मामले में मोहल्ला शेखान निवासी याकूब ने 93 लोगों के खिलाफ थाना टीपीनगर में एफआइआर दर्ज कराई थी। सेशन कोर्ट में मामले की सुनवाई हो रही है।

वरिष्ठ अधिवक्ता अलाउद्दीन ने इस मामले में पीड़ितों की ओर से पैरवी की है। उन्होंने बताया कि 600 से अधिक तारीखें लग चुकी हैं। दंगे में 35 लोग घायल हुए थे। उनमें केवल सात के बयान हुए हैं। पिछली सुनवाई चार साल पहले हुई थी। उसके पीछे मुख्य वजह याकूब द्वारा की गई एफआइआर गायब हो जाना है।

मई 1987 को मेरठ शहर में एक दिन के अंतराल में दो ऐसे दंगे हुए जिन्होंने पूरे शहर को हिलाकर रख दिया। 22 मई को हाशिमपुरा में हुए दंगे की चिंगारी से शहर झुलस उठा था।

धार्मिक उन्माद की भड़की चिंगारी के बाद आपसी भाईचारा भी टूट गया। पुलिस, पीएसी, पैरामिलिट्री और सेना शहर में दंगे को काबू करने में लगी थी। लेकिन 24 घंटे भी नहीं बीत पाए थे कि हाशिमपुरा से सात किमी की दूरी पर मलियाना में भी दंगा फैल गया। देखते ही देखते पूरा शहर छावनी में तब्दील कर दिया गया था।

19 मई 1987 को तत्कालीन केंद्रीय गृह राज्यमंत्री पी. चिदंबरम और यूपी के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह भी मेरठ पहुंचे थे।

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