Thursday, March 5, 2026
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मन और प्रकृति

Amritvani 21

जो कुछ भी हमारे अंदर भरा होता है वो ही प्रकृति हमें लौटा देती है। दु:खी होकर समाधान के लिए अपने गुरु के पास पहुंचा और अपनी पीड़ा गुरुदेव को बताते हुए बोला-मेरे कर्मचारी, पत्नी, बच्चे और आसपास के सभी लोग बेहद स्वार्थी हैं। क्या करूं गुरुदेव? गुरुजी ने कहा-पुत्र, नि:संदेह तुम्हारी समस्या अति गंभीर है। तुम आज रात आश्रम में ही रहो। सुबह समाधान बताऊंगा। भोर की पूजा-अर्चना के पश्चात गुरुजी ने उस व्यक्ति को अपने पास बुलाया। वह व्यक्ति बोला-गुरुदेव, आपके आश्रम में भी स्वार्थियों ने अपना डेरा जमा रखा है। हर कोई आपसे कुछ न कुछ चाहकर ही यहां रुका है। गुरुदेव ने उसकी बातों को सुनकर कहा-मैं एक कहानी सुना रहा हूं, उसे गंभीरता से सुनना। इसमें ही तुम्हारी समस्या का समाधान छिपा है। एक गांव में एक विशेष कमरा था जिसमें एक हजार आईने लगे थे। एक लड़की उस कमरे में गई और खेलने लगी। उसने देखा एक हजार बच्चे उसके साथ खेल रहे हैं और वो उन बच्चों के प्रतिबिंब को देखकर खुश हो गई। जैसे ही वो ताली बजाती सभी बच्चे उसके साथ ताली बजाते। उसने सोचा यह दुनिया की सबसे अच्छी जगह है। बच्ची के प्रस्थान के पश्चात थोड़ी देर बाद इसी जगह पर एक उदास आदमी कहीं से आया। उसने अपने चारों तरफ हजारों दु:ख से भरे चेहरे देखे। वह बहुत दु:खी हुआ। उसने हाथ उठा कर सभी को धक्का लगाकर हटाना चाहा तो उसने देखा हजारों हाथ उसे धक्का मार रहे हैं। उसने कहा यह दुनिया की सबसे खराब जगह है। वह यहां दोबारा कभी नहीं आएगा और उसने वो जगह छोड़ दी। यह दुनिया एक कमरा है जिसमें हजारों शीशे लगे हैं। जो कुछ भी हमारे अंदर भरा होता है वो ही प्रकृति हमें लौटा देती है। संसार हमें अपने मन के अनुरूप ही दिखता है इसलिए अपने मन और दिल को साफ रखें।

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