जनवाणी संवाददाता |
देहरादून: उत्तराखंड सरकार में वन एवं पर्यावरण कैबिनेट मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने एक बड़ा बयान देकर एक बार फिर सबको चौंका दिया है। उन्होंने कहा है कि वह वर्ष 2022 में होने वाला अगला विधानसभा चुनाव नहीं लड़ेंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ कर दिया है कि वह राजनीति से संन्यास नहीं ले रहे हैं।
बता दें कि साल 2019 के नवंबर महीने के दौरान रुद्रप्रयाग में हरक सिंह रावत ने कहा था कि अब वे चुनाव नहीं लड़ना चाहते हैं। उनकी इच्छा है कि गांव में बसकर स्वरोजगार करें। इस दौरान उन्होंने कहा था कि ‘मैं अस्सी के दशक से चुनाव लड़ रहा हूं, अब लड़ने का मूड नहीं है।
शुक्रवार को मीडिया से बातचीत में उन्होंने अचानक अगला विधानसभा चुनाव न लड़ने की बात कही। रावत ने कहा कि इसकी जानकारी उन्होंने भाजपा प्रदेश महामंत्री संगठन अजेय कुमार समेत वरिष्ठ नेताओं को दे दी है। वैसे उन्होंने राजनीति छोड़ने या राजनीति से संन्यास लेने की बात से इनकार किया है।
यह पहली बार नहीं है, जब वन और पर्यावरण मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने 2022 का चुनाव न चुनाव न लड़ने की इच्छा जताई हो, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में उनका इस बयान के कई निहितार्थ निकाले जा रहे हैं। असल में, सरकार ने हाल में उन्हें भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद से हटाकर श्रम संविदा बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल को यह जिम्मेदारी सौंप दी थी।
हरक सिंह रावत के पास श्रम और सेवायोजन मंत्रालय भी है। भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद पर अब तक हरक सिंह रावत ही काबिज थे। गढवाल दौरे के बाद वह देहरादून पहुंचे। उन्होंने कहा था कि इस मामले में वह मुख्यमंत्री से बात करेंगे लेकिन अभी उनकी मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं हो पाई है।
मुख्यमंत्री गुरुवार शाम को दिल्ली से लौटे और शुक्रवार सुबह कुमाऊं मंडल के एक दिनी दौरे पर रवाना हो गए। हरक सिंह रावत के चुनाव न लड़ने के ऐलान को इस घटनाक्रम से जोड़कर भी देखा जा रहा है।

