Thursday, February 12, 2026
- Advertisement -

मोबाइल है अब थर्ड किडनी

पुराने जमाने में इंसान अपने दिल, दिमाग और पेट के बिना नहीं जी सकता था, लेकिन अब मोबाइल के बिना जीना संभव नहीं। आज अगर किसी से पूछो-भाई, तुम्हारा सबसे करीबी कौन? तो आधा देश बोलेगा-मेरा मोबाइल? और बाकी आधा बोलेगा-मेरे मोबाइल में सेव कॉन्टैक्ट्स। पहले लोग सुबह उठकर भगवान को याद करते थे, अब उठते ही मोबाइल को। रात को सोने से पहले भी पत्नी को शुभरात्रि कहने से पहले व्हाट्सऐप का ‘लास्ट सीन’ चेक किया जाता है। नींद टूटते ही तकिए के नीचे हाथ ऐसे जाता है जैसे रामायण में हनुमान जी संजीवनी खोजने निकले हों। बिना मोबाइल के बाथरूम जाना वैसा है जैसे बिना किताब के लाइब्रेरी जाना। मोबाइल के साथ बाथरूम में घुसने वाला इंसान बाहर आने तक नहाता कम है, रील्स ज्यादा देखता है। कुछ तो इतने प्रोफेशनल हैं कि साबुन के बुलबुलों में भी नेट स्क्रॉलिंग जारी रखते हैं। रोटी एक हाथ में, मोबाइल दूसरे हाथ में। दाल में नमक ज्यादा हो जाए तो नाराजगी पत्नी से नहीं, नेटवर्थ से जताते हैं- लगता है नेटवर्क स्लो है।

भक्ति, मुक्ति और शक्ति—इन तीन शब्दों के बीच अब चौथा शब्द भी जुड़ गया है-‘लाइकस। किसी की तेरहवीं में भी फोटो डाल देते हैं- मिस यू और साथ में दिल वाला इमोजी। गांव की गली से लेकर मॉल की लिफ्ट तक, हर जगह फोटो खींचने का मौका मिलना चाहिए, वरना ‘दिन बर्बादस हो जाता है। कई लोग बोलते हैं-मैं मोबाइल से दूर रह सकता हूं। ये वही लोग होते हैं जो चार घंटे बिना पानी रह सकते हैं, लेकिन पांच मिनट में चार बार स्क्रीन आॅन करके टाइम चेक करते हैं। आजकल लोग अपने घरवालों के साथ तीन वाक्य बोलते हैं- खाना खा लो, मोबाइल चार्ज हो गया? और मेरा चार्जर कहां है? कुछ तो ऐसे जुगाड़ू होते हैं कि मंदिर में घी का दिया जलाने से पहले चार्जिंग पोर्ट खोजते हैं-भगवान बाद में, बैटरी पहले। अब दोस्त वही जो हॉटस्पॉट दे। दुनिया में अब रिश्ते खून से नहीं, इंटरनेट स्पीड से चलते हैं।

आफिस मीटिंग में अगर कोई चुप है, तो इसका मतलब यह नहीं कि वह ध्यान से सुन रहा है- वह मोबाइल में म्यूट करके ‘जाने क्या ही’ देख रहा है। कुछ लोग पाप-पुण्य के हिसाब से ज्यादा चिंता डेटा बैलेंस की करते हैं। मोबाइल पर आंख गड़ाए चलने वाला व्यक्ति किसी सुपरहीरो से कम नहीं- एक हाथ में हैंडल, दूसरे में मोबाइल और ट्रैफिक में भी बैलेंस बना लेता है। प्रेमी युगल पार्क में बैठकर भी एक-दूसरे की आंखों में नहीं, मोबाइल स्क्रीन में देखते हैं। पहले रोमांस में गाने गाए जाते थे, अब स्टेटस डाल दिया? से प्यार शुरू और ब्लॉक कर दिया पर खत्म। जो लोग बचपन में होमवर्क के लिए पड़ोसी के बच्चे पर निर्भर थे, अब हर सवाल का उत्तर गूगल बाबा से लेते हैं। लोग बोलते हैं- मोबाइल छोड़ देंगे, लेकिन यह उतना ही संभव है जितना गधे को उड़ते देखना। एक घंटा बिना मोबाइल के रहना, मानो किसी को बिन आॅक्सीजन माउंट एवरेस्ट पर भेजना। मोबाइल अब सिर्फ एक मशीन नहीं, यह थर्ड किडनी है, जो दोनों किडनियों से भारी है।

spot_imgspot_img

Subscribe

Related articles

UP Budget 2026: योगी सरकार का बजट, 10 लाख रोजगार और लड़कियों के लिए 1 लाख रुपये सहायता

जनवाणी ब्यूरो | यूपी: उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार...
spot_imgspot_img