Sunday, April 26, 2026
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पुरानी फिल्मों की शरण में मल्टीप्लेक्स थियेटर

CINEWANI


लॉकडाउन की बात जाने दें, तो अब यह बात एकदम साफ हो चुकी है कि बडेÞ सितारों की बड़ी-बड़ी फिल्में मल्टीप्लेक्स थियेटर को सही मायने में प्राणवायु देने में विफल रही है। ऐसे में मल्टीप्लेक्स वाले वाले अपने अस्तित्व को बचाए रखने के लिए कुछ नए-नए उपाय ढूंढ रहे हैं। उसी कड़ी में अब उन्हें शिद्दत से पुरानी फिल्मों की याद आई है। हाल फिलहाल मल्टीप्लेक्स के एक बड़े चैनल पीवीआर थियेटर गु्रप ने इस मामले में बड़ी पहल की है। आइए इसका और विस्तार से आंकलन करें-

बिग बी ने रास्ता दिखाया
निश्चित तौर पर अमिताभ की दीवार, त्रिशूल, डॉन, कभी-कभी जैसी कई बड़ी हिट फिल्मों ने मल्टीप्लेक्स वालों को हमेशा चौंकाया है। पिछले साल अमिताभ के जन्मदिन पर जब उनकी फिल्म डॉन मुंबई के जुहू स्थित चंदन थियेटर में रीलिज हुई, तो इसके सारे शो के कलेक्शन से पीवीआर का मैंनेजमेंट भौंचक रह गया था। मगर बावजूद इसके थियेटर से यह शो हटा लिया गया था। वजह यह थी कि यह शो एक नई रीलिज फिल्म को देना था।

लेकिन बात नहीं बनी
सच तो यह है कि पिछले एक-दो साल से कई बड़ी फिल्में सूयवंशी, 83, सर्कस, चेहरे, बेलबॉटम, राध, टाइगर-3 आदि ने काफी हद तक थियेटर मालिकों को हताश ही किया है। इसके बाद शाहरुख, सलमान, शाहिद, रितिक की पठान, जवान, टाइगर-3, फाइटर, तेरी बातों मे ऐसा उलझा दिया जैसी ढेरों बड़ी फिल्मों की महा विफलता ने मल्टीप्लेक्स मालिकों को एकदम स्तब्ध कर दिया। जबकि उन्हें इस बात की पूरी उम्मीद थी कि ये फिल्में थियेटरों में एक नया उत्साह भरेंगी।

अब सबक मिला
निश्चित तौर पर गाहे-बगाहे रीलिज होनेवाली ओल्ड क्लासिक फिल्मों की सफलता ने थियेटर मालिकों को इन्हें नियमित स्पेस देने के लिए बाध्य कर दिया। यही वजह है कि ऐसी फिल्मों के टिकट रेट काफी कम कर दिया गया। 70 से 100 के बीच इनका टिकट रखा गया है। इस समय कम से कम सौ से ज्यादा ऐसी फिल्में हैं, जिन्हें मल्टीप्लेक्स की स्क्रीन के अनुकूल बनाया जा रहा है। इनके अलावा दिल तेरा दीवाना, चोरी-चोरी, हकीकत जैसी कई ब्लैक एड वाइट क्लासिक फिल्में रंगीन होकर थियेटर रीलिज की प्रतीक्षा कर रही हैं। इन फिल्मों पर भी मल्टीप्लेक्स थियेटर मालिकों की तीक्ष्ण नजर है।

दर्शकों का साथ
कुछ आलोचकों की बात पर यकीन करें तो 90 के दर्शक की कुछ अच्छी फिल्मों की डिमाड आज भी है। ऐसे में इस दशक और इससे पहले के दशक की ओल्ड कलसिक फिल्मों पर 40 से 45 से उपर के दर्शकों का एक खास क्रेज देखने को मिलती है। कुल मिलाकर पुराने दर्शक शाहरुख की दिलवाले दुलहनिया ले जाएंगे से लेकर मदर इंडिया, मुगल-ए-आजम, बैजू बावरा जैसी फिल्मों को आधुनिक साज सज्जा से युक्त मल्टीप्लेक्स में देखना चाहते हैं। भले ही यह थियेटर में एक या दो शो में लगे। थियेटर मालिक अब इसी मौके का पूरा फायदा उठाते हुए, पुरानी फिल्मों के लिए पूरा टाइम स्लॉट निकाल रहे हैं।

मल्टीप्लेक्स का आतंक
दूसरी ओर मल्टीप्लेक्स थियेटर के महंगे टिकट दर और खानपान को लेकर आम आदमी की परेशानी के बारे में काफी लिखा जा चुका है। इसलिए अब मल्टीप्लेक्स के मालिक काफी सजग हुए हैं। वह भी अब अपनी जिम्मेदारी को समझते हुए पुरानी फिल्मों के रीलिज को लेकर नई-नई प्लानिंग बना रहे हैं।


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