Friday, March 6, 2026
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बहुत गहराई तक हैं नगर निगम में घपले-घोटालों की जड़ें

एक ही पटल पर जमे बाबुओं का काला कारनामा !

  • जनमंच की मरम्मत में हुए घपले की जांच फिलहाल ठंडे बस्ते में
  • गमलों की खरीद में भी हुआ है गोलमाल !

वरिष्ठ संवाददाता |

सहारनपुर: भ्रष्टाचार को लेकर सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ सख्त हैं लेकिन, यहां के नगर निगम में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हैें कि आसानी से उनमें मट्ठा नहीं पड़ सकता।

यहां बाबू अकूत संपत्तियों के मालिक हैं और हर नियम-कायदों तो ताख पर रखकर मनमानी करते हैं। गमला खरीद हो, चूना, ब्लीचिंग सबमें कमीशनखोरी चरम पर है। भ्रष्टाचार की शिकायतों पर गंभीर जांच को भी ठंडे बस्ते में डाल दिया गया है। यहां लिपिकों का राज है।

एक ही पटल पर बाबू कई सालों से जमे हुए हैं। इन दिनों निगम के दफ्तरों में अवैध फाइलों कि लूट मची है। ई-टेन्डर की प्रक्रिया में भी घालमेल जमकर हो रहा है। यहां के बाबुओं का खेल देखने लायक है।

नगर निगम में रिकार्ड रूम का जिम्मा जो चुंगी लिपिक संभाले हुए है, उसकी जगह कुछ समय पहले जिसको चार्ज देने के आदेश उच्चाधिकारी द्वारा हुए थे, उस पर अमल ही नहीं हुआ।

अफसर के आदेश हवा में जरूर उड़ा दिये गये। हाल ये है कि यह चुंगी लिपिक रिकार्ड रूम पर ठाठ से कब्जा जमाए हुए है। यह लिपिक अपने मनमुताबिक चाहने वालों को ही ठेका देता है।

गलती से अगर कोई अन्य ठेकेदार डाउनलोड करके ठेका बदल दे तो उक्त लिपिक कुछ न कुछ करके ठेका निरस्त कर देता है। डाउनलोड किए ठेकों का पिछला रिकार्ड निकाला जाए तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। लेकिन यह जहमत उठाए कौन।

ऐसा ही हाल है गैराज लिपिक का है। यह भी हमेशा मलाईदार पटल पर ही रहता है। अगर जांच की जाए तो स्थिति साफ हो जाएगी। यह दिलचस्प है कि एक वर्ष में कई बार पौधों के ठेके निरस्त किए गए हैं।

आखिर इसके पीछे क्या खेल है? सूत्रों का कहना है कि रिकार्ड रूम स्तर से सबसे बड़ा घोटाला गमलों की खरीदारी में किया गया है। निविदा में जिस गमले का आकार 28 इंच का था, ठेका होने के बाद ठेकेदार से सांठ-गांठ करके उससे आधे आकार के गमले लगाए जा रहे हैं और बचे पैसों में बंदरबांट हो रही है।

इसमें विभागीय अफसर संलिप्त बताए जाते हैं। उल्लेखनीय है कि निविदा में पौधे की लंबाई 10 से 12 फुट है जबकि पौधे 4 से 5 फुट की लंबाई के लगाए जा रहे हैं।

दरअसल, इनकी कीमत आधी होती है। ऐसा ही कारनामा गैराज कीपर भी कर रहा है। तसला, फावड़ा, झाडू, बेलचा पाउडर, चूना ब्लीचिंग वगैरह में जिस मानक के हिसाब से सामान आना होता है, निवादा ठेका होने के बाद ठेकेदार अपनी मनमानी करते हैं।

ये लोग सबसे घटिया क्वालिटी का सामान मंगवाते हैं। ऐसा करने से सरकार को लाखों से लेकर करोड़ो रुपये का चूना लगता है। ऐसे कारनामों की अगर कोई शिकायत करे तो शिकायत उसी बाबू के प्रभारी अधिकारी को दी जाती है जो ठंडे बस्ते में डाल देता है।

शिकायकर्ता थक-हार कर मायूस होकर बैठ जाता है। निगम के ही अंतर्गत जनमंच का हाल तो उससे भी बुरा है। 2018-19 में जनमंच की मरमत में लाखों रुपये लगाए जाने के बाद भी इसका कायाकल्प नहीं हो सका।

शिकायत होने पर जनमंच में हुई धांधली की जांच शुरू की गई। लेकिन, 2019 की जांच आज तक ठंडे बस्ते में पड़ी है। जनमंच में जो गोलमाल हुआ वह एक जेई की दबंगई पर।

इस जेई पर पहले भी कई घोटालों के आरोप हैं। जिसकी जांच चल रही है। बता दें कि निगम के रिकार्ड प्रभारी, लाइट प्रभारी, गैराज प्रभारी, जनमंच प्रभारी, इनकी शिकायतों की बहुत लंबी लिस्ट है।

इसके चलते कुछ साल पहले इनका स्थानातरंण भी किया गया लेकिन दबंगपने में मशहूर अभियंता जुगाड़ लगाकर अपना स्थानातरंण रद्द करवा लिए।

जानकारों का कहना हैं कि अगर निगम के बाबुओं की संपत्ति की जांच कराई जाए तो इनकी काली करतूतें उजागर हो सकती हैं।

नगर आयुक्त ज्ञानेंद्र सिंह का कहना है कि पटल पर लंबे समय से जमे बाबुओं को जल्द हटाया जाएगा। किसी स्तर पर नहीं होने पाएगा।

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