
माफिया अतीक अहमद और उसके भाई अशरफ के आतंक का अंत इस तरीके से होगा इसकी उत्तरप्रदेश पुलिस और खुद अतीक और उसके परिवार को इसकी कल्पना नहीं रहीं होगी। लेकिन यह सच था कि पुलिस की कार्रवाई को लेकर वह सहमा था। उसके भीतर कहीं न कहीं यह भय था कि उसकी भी हत्या कि जा सकती है। झांसी में बेटे असद के एनकाउंटर के बाद उसका डर और गहरा हो गया था। इस घटना के बाद उत्तरप्रदेश पुलिस और राज्य की कानून व्यवस्था सवालों के घेरे में है। सवाल उठता है कि इतनी कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में अतीक और अशरफ की हत्या कैसे हुई। विपक्ष का सवाल उठाना लाजमी है कि फिर कानून व्यवस्था का क्या मतलब है? क्योंकि अतीक माफिया भले था लेकिन उसी प्रयागराज से पांच बार विधायक और एक बार सांसद रह चुका था।